न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

40 साल में पहली बार ग्रामीण मांग घटी, औसत खर्च 1501 से घट कर 1446 रुपये हुआ

381

New Delhi: पिछले 40 साल में पहली बार ऐसा हुआ है कि उपभोक्ताओं की खर्च की सीमा में गिरावट देखी गयी है. ये आंकड़े एक नये सरकारी सर्वे में सामने आये हैं. इसमें कहा गया है कि पिछले 40 सालों में पहली बार साल 2017-18 में उपभोक्ताओं की खर्च सीमा में गिरावट आयी है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस गिरावट का मुख्य कारण ग्रामीण इलाकों में मांग में आयी कमी है. यानी गांवों में लोगों की क्रय शक्ति में कमी आयी है.

Sport House

बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार ‘प्रमुख संकेतक: भारत में घरेलू उपभोक्ता व्यय’ नामक राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की लीक सर्वे में कथित तौर पर दिखाया गया है कि किसी भारतीय द्वारा एक महीने में खर्च की जानेवाली औसत राशि साल 2017-18 में 3.7 फीसदी कम होकर 1446 रुपये रह गयी है, जो कि साल 2011-12 में 1501 रुपये थी.

इसे भी पढ़ें – गोमियाः बीजेपी उम्मीदवार के मैदान में उतरने से बिगड़ेगा समीकरण, फिलहाल बबीता, लंबोदर और माधव हैं मैदान में

साल 2017-18 में ग्रामीण इलाकों के उपभोक्ताओं की खर्च सीमा में 8.8 फीसदी की गिरावट आयी है. इसी समयावधि में शहरी इलाकों के उपभोक्ताओं की खर्च सीमा में दो फीसदी की वृद्धि हुई है.

Vision House 17/01/2020

विशेषज्ञों के हवाले से रिपोर्ट दावा करती है कि आखिरी बार 1972-73 में एनएसओ ने उपभोक्ताओं की खर्च सीमा में गिरावट दिखायी थी.

भोजन की खपत में गिरावट खतरनाक

बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, सबसे खतरनाक खबर यह है कि दशकों में पहली बार भोजन की खपत में गिरावट आयी है. साल 2011-12 में जहां ग्रामीण भारतीय भोजन पर औसतन 643 रुपये खर्च करते थे, वहीं साल 2017-18 में यह राशि घट कर औसतन 580 रुपये हो गयी है.

SP Deoghar
Related Posts

#Amazon के CEO जेफ बेजोस चाहते थे PM मोदी से मिलना, लेकिन अपॉइन्टमेंट नहीं  मिला! क्या रही वजह

पीएम मोदी के बेजोस से न मिलने को अमेजन के स्वामित्व वाले अखबार वाशिंगटन पोस्ट में सरकार विरोधी आर्टिकल्स से जोड़कर भी देखा जा रहा है.

लीक हुए सर्वे की यह रिपोर्ट छह सालों के अंतराल के बाद आयी है. जिसके कारण यह साफ नहीं है कि उपभोक्ताओं के खर्च में यह गिरावट वास्तव में कब हुई.

इसे भी पढ़ें – #Jamshedpur: जमशेदपुर में एसीबी ने सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता के घर की छापेमारी, 2.44 करोड़ रुपये बरामद, जमीन और फ्लैट के दस्तावेज भी मिले

नोटबंदी और जीएसटी जैसे कदम जिम्मेदार

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि हो सकता है कि यह गिरावट पिछले कई सालों से होती चली आयी है. इस बात की की भी संभावना है कि हाल में अचानक गिरावट हुई है. इसके लिए नोटबंदी और जीएसटी जैसे कदमों को जिम्मेदार माना जा सकता है.

रिपोर्ट के अनुसार, एनएसओ खपत सर्वे को जुलाई 2017 से जून 2018 के बीच किया गया है और इसे जून 2019 में एक आधिकारिक समिति ने प्रकाशित करने के लिए मंजूरी दे दी थी. ऐसा माना जा रहा है कि आंकड़े अनुकूल न होने के कारण मंजूरी मिलने के बाद भी रिपोर्ट को दबा दिया गया.

एनएसओ के उपभोक्ता व्यय सर्वेक्षण को पांच महीने पहले एक बैठक में एनएससी द्वारा गठित एक कार्य समूह द्वारा मंजूरी दी गई थी.

सर्वेक्षण रिपोर्ट द्वारा दिखाये जा रहे गिरते उपभोक्ता खर्च से चिंतित सरकार ने आंकड़ों पर गौर करने के लिए एक उप-समिति का गठन किया था. सूत्रों के अनुसार, उप-समिति ने पिछले महीने एक रिपोर्ट में सरकार को बताया कि सर्वेक्षण में कोई खराबी नहीं थी.

इसे भी पढ़ें – #Paytm का फर्जी लिंक बनाकर लोगों के खाते से पैसे उड़ाने वाले चार साइबर ठगों को किया गया गिरफ्तार

Mayfair 2-1-2020

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like