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अलग सरना धर्म कोड के लिए सदन से प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजा जायेगा : डॉ रामेश्वर उरांव

Ranchi :  विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर झारखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ रामेश्वर उरांव ने सरना धर्म कोड के प्रस्ताव लाने की बात की है. उन्होंने कहा है कि अलग सरना धर्म कोड को मान्यता देने की मांग को लेकर विधानसभा से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा जाएगा. उन्हें उम्मीद है कि केंद्र सरकार इसे मान्यता प्रदान करेगी. डॉ उरांव ने विश्व आदिवासी दिवस पर प्रदेश मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में यह बात कही.

कार्यक्रम की शुरुआत आदिवासी समाज के महान विभूतियों भगवान बिरसा मुंडा, अमर शहीद सिद्धो-कान्हू, चांद-भैरव, नीलाम्बर-पीताम्बर और शहीद वीर बुद्धुभगत समेत शहीदों के चित्र पर माल्यार्पण से की गयी. कार्यक्रम में विधायक दल के नेता सह ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम, कृषि मंत्री बादल, पूर्व मंत्री सुबोधकांत सहाय सहित कई कांग्रेसी उपस्थित थे.

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आदिवासी के हित और अधिकार की रक्षा के लिए संविधान में है पर्याप्त उपाय: डॉ उरांव

डॉ. रामेश्वर उरांव ने कहा कि कांग्रेस पार्टी का देश को आजादी दिलाने और देश के विकास में बड़ा योगदान रहा है. आजादी के पहले देश के प्रथम राष्ट्रपति रहे राजेंद्र प्रसाद के नेतृत्व में सेवा दल का गठन किया गया, जिसमें आदिवासी समाज की बड़ी भूमिका रही.

देश की आजादी की लड़ाई में भी जनजातीय समुदाय का बड़ा योगदान रहा है. प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से पहले संथाल विद्रोह, हूल विद्रोह सहित टाना भगत समुदाय के लोग अंग्रेजी शासन की दमनकारी नीतियों के खिलाफ संघर्ष के लिए आगे. आजादी के बाद देश का संविधान बना, संविधान में आदिवासी समाज के हित और अधिकार की रक्षा के लिए पर्याप्त कदम उठाये गये.

 

आदिवासियों की जल, जंगल और जमीन लूटना चाहती थी भाजपा

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने आदिवासी समुदाय के हित में सीएनटी-एसपीटी कानून को मजबूत करने का काम किया. आदिवासियों की जमीन की रक्षा हो सके, इसके लिए कठोर कानून बनाये गये. लेकिन भाजपा सरकार ने जल-जंगल और जमीन को छीनने की कोशिश की. वर्ष 2013 में जमीन की रक्षा को लेकर बनाये गये कानून में छेड़छाड़ की कोशिश की गयी.

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लेकिन कांग्रेस पार्टी के प्रयास से उनकी यह कोशिश सफल नहीं हुई. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के लोगों को अपने हक और अधिकार की रक्षा के लिए ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है.

 

समाज के सभी वर्ग के हित के लिए काम कर रही है हेमंत सरकार: आलमगीर आलम

आलमगीर आलम ने कहा कि 9 अगस्त को विश्व आदिवासी मनाने की शुरुआत 35 वर्ष पहले शुरू हुई. इससे पहले 9 अगस्त को देश में अगस्त क्रांति दिवस मनाया जाता था. यूएनओ ने इसी दिन को विश्व आदिवासी दिवस के लिए चुना, इससे एक बड़ा संदेश जाता है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार समाज के सभी वर्गां के हित के लिए काम किया जा रहा है.

साजिश के तहत आदिवासी समाज को बताया जा रहा सनातन धर्मी : सुबोधकांत

पूर्व मंत्री सुबोधकांत सहाय ने कहा कि आदिवासी समाज प्रकृति के पूजक रहे हैं. कभी वे सनातन परंपरा के पक्षधर नहीं रहे हैं. लेकिन एक साजिश के तहत उन्हें सनातन धर्मी बताया जा रहा है. उनकी परंपरा से छेड़छाड़ की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर अलग सरना धर्म कोड को लेकर प्रस्ताव पारित कर भेजे,उसे पारित कराने के लिए कांग्रेस पार्टी दिल्ली में भी हरसंभव कोशिश करेगी.

आदिवासी संस्कृति के उत्थान का देन इंदिरा गांधी को जाता है: बादल

कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी हमेशा आदिवासी समाज को आगे लाने की दिशा में काम करती रही थी. झारखण्ड के आदिवासी संस्कृति का उत्थान भी इन्दिरा जी की देन है. कोरोना संक्रमण काल में पूरी दुनिया परेशान है, इसके बावजूद प्रदेश कांग्रेस कमिटी आदिवासियों के लिए कार्यक्रम प्रदेश से लेकर जिला स्तर तक आयोजित कर अपनी प्रतिबद्धता प्रकट कर रही है.

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