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61 वर्षों से चतरा संसदीय क्षेत्र पर बाहरी का राज, क्या 2019 में बदलेगाी तस्वीर?

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Palamu:झारखंड के बहुचर्चित चतरा संसदीय क्षेत्र का भूगोल और इतिहास चैंकाने वाले हैं. इस संसदीय क्षेत्र में चतरा जिले के अलावा पलामू जिले और लातेहार जिले के कुल तीन विधानसभा क्षेत्र भी आते हैं. पलामू का पांकी विधानसभा क्षेत्र और लातेहार का लातेहार तथा मनिका विधानसभा क्षेत्र चतरा के संसदीय क्षेत्र का महत्वपूर्ण अंग है.

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वर्ष 1957 से अब तक चतरा संसदीय क्षेत्र का सांसद बनने का सौभाग्य चतरा के स्थानीय निवासी को नहीं मिला है. कोडरमा एवं हजारीबाग संसदीय क्षेत्र से विभाजित होकर चतरा संसदीय क्षेत्र का निर्माण हुआ. अभी तक चतरा संसदीय क्षेत्र से जितने भी सांसद निर्वाचित हुए हैं, सभी चतरा जिले के बाहर के मतदाता रहे हैं.

स्थानीय को अबतक नहीं मिली बागडोर

चतरा संसदीय क्षेत्र से 1957 में पहली बार महारानी विजया राजे सांसद बनी. उनका संबंध पदमा (रामगढ़) के राजघराने से था. वह मूलतः हजारीबाग संसदीय क्षेत्र की मतदाता थी. वह लगातार तीन बार चतरा से सांसद बनीं. वर्ष 1971 के चुनाव में शंकरदयाल सिंह चतरा के सांसद निर्वाचित हुए. वे अविभाजित बिहार के औरंगाबाद जिले के थे.

बिहार-झारखंड के दूसरे इलाके के प्रत्याशियों का रहा कब्जा

वर्ष 1977 में सुखनंदन प्रसाद वर्मा सांसद चुने गए. श्री वर्मा बिहार के जहानाबाद के रहने वाले थे. इसके बाद 1980 में गया निवासी रंजीत सिंह चतरा के सांसद बने. वर्ष 1984 में धनबाद के योगेश्वर प्रसाद योगेश चतरा से सांसद निर्वाचित हुए. लगातार दो बार 1989 और 1991 में चतरा के लिए निर्वाचित सांसद उपेन्द्रनाथ वर्मा का संबंध गया के मानपुर से था. इनके बाद धीरेन्द्र अग्रवाल को वर्ष 1996 एवं वर्ष 1998 में लगातार दोबार चतरा के लिए सांसद बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. वह भी गया के निवासी थे.

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चतरा संसदीय क्षेत्र से 1999 में संसद सदस्य बनने वाले नागमणि मूलतः जहानाबाद जिले के निवासी हैं. वर्ष 2004 में एक बार फिर धीरेन्द्र अग्रवाल को यह सौभाग्य प्राप्त हुआ. वर्ष 2009 के संसदीय आम चुनाव में चतरा के मतदाताओं ने इहितास रचते हुए झारखंड विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष इंदर सिंह नामधारी को मौका दिया. श्री नामधारी ने यह चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लड़ा था. श्री नामधारी का संबंध पलामू के डालटनगंज से है. इसके बाद पिछले चुनाव 2014 में बक्सर एवं राची से ताल्लुक रखने वाले सुनील कुमार सिंह ने चतरा के मार्फत लोकसभा में प्रवेश किया.

क्या 2019 में दिखेगा बदलाव?

इस प्रकार चतरा संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले सांसद चतरा के मतदाता नहीं रहे. बाहरी उम्मीदवारों का दबदबा रहा और चतरा के निवासी यह बर्दाश्त करते रहे. अब इंतजार है 2019 के संसदीय चुनाव का. देखना है, चतरा के मतदाता इस बार क्या फैसला देते हैं. हालांकि विभिन्न पार्टियों के उम्मीदवारों ने चतरा का दौरा शुरू कर दिया है. वर्तमान सांसद की गतिविधियां भी अचानक तेज हो गई हैं.

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नामधारी रहे सबसे ज्यादा चर्चित

वैसे चतरा के अधिकांश मतदाता वर्ष 2009 में चतरा संसदीय क्षेत्र से निर्वाचित निर्दलीय प्रत्याशी इंदर सिंह नामधारी को चतरा संसदीय क्षेत्र का ही मतदाता मानते हैं. उनका कहना है कि पलामू और लातेहार का बहुत बड़ा हिस्सा चतरा संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है और नामधारी पलामू से ताल्लुक रखते हैं. लेकिन यह भी याद रखना होगा कि नामधारी पलामू के डालटनगंज विधानसभा क्षेत्र के मतदाता हैं.

वर्तमान सांसद की सक्रियता बढ़ी

इधर जीत के बाद करीब तीन साल तक अपने क्षेत्र से विमुख बने रहे वर्तमान सांसद सुनील सिंह की सक्रियता अचानक बढ़ गई है. अब देखना है कि चतरा के मतदाताओ की क्या मंशा है? चतरा के एक पत्रकार का मानना है कि चतरा हमेशा परायों पर मेहरबान रहा है.

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