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पलामूः बाघों के पदचिह्न व स्कैट के 400 सैंपल वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट को भेजे गये

कम के कम आठ बाघ होने का दावा, 1129.93 वर्ग किलोमीटर में फैला है पलामू टाइगर रिजर्व, एक बाघ 25 किलोमीटर तक करता है भ्रमण

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  • 17 बाघों के लिए उपयुक्त है पलामू टाइगर रिजर्व

Ranchi: झारखंड में बाघों की संख्या लेकर अब तक असमंजस की स्थिति बनी हुई. इसका सही आंकड़ा वन विभाग के पास भी नहीं है. अब तक बाघों के पदचिह्न और स्कैट (मल) के 400 सैंपल वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट को जांच के लिए भेजे गये, जिसके आधार पर पीटीआर (पलामू टाइगर रिजर्व) में कम के कम आठ बाघ होने का दावा किया गया है. इसके अलावा 18 चीता और पांच वाइल्ड डॉग के मौजूद होने की भी बात कही गयी है.

बाघों की संख्या को लेकर वन विभाग असमंजस में

वन विभाग बाघों की संख्या को लेकर अब तक असमंजस में है. कोई भी अफसर इसका सही आंकड़ा बताने की स्थिति में नहीं है. पिछले दो साल में दो बार ही बाघ दिखा. पिछले साल 18 फरवरी को बाघ कैमरा ट्रैप में आया था और इस साल 17 फरवरी को कैमरा ट्रैप में बाघ दिखाई दिया था. लेकिन रिपोर्ट के अनुसार आठ बाघ होने का दावा किया गया है.

सभी बाघों के डीएनए अलग-अलग

वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार सभी बाघों के डीएनए अलग-अलग बताये गये हैं. अब तक जो भी बाघ देखे गये हैं उनके साथ बाघ का बच्चा नहीं दिखा है. इस लिए वन विभाग यह मान रहा है कि सभी बाघ मेल हैं. इस कारण बीडिंग (प्रजनन) नहीं हो पायी है. पीटीआर में बाघों की बीडिंग की तैयारी भी है. पीटीआर में एक से दो जोड़ा बाघ लाने की योजना है. इसके लिए ओडिशा के सतकोफिया बीडिंग सेंटर का अध्ययन भी किया गया है. वहां मध्यप्रदेश से बाघों को ले जाकर बीडिंग कराया जा चुका है.

कोर एरिया से गांवों को हटाने का भी है आदेश

पीटीआर के कोर एरिया से आठ गांवों को हटाने का भी आदेश है. विस्थापित परिवार को नेशनल टाइगर कंजरवेशन ऑथिरिटी की ओर से प्रति परिवार 10 लाख रुपये मुआवजा देने का भी प्रावधान किया गया है. वहीं पूरे देश में टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में बसे गांवों को चिन्हित किया जा रहा है.

वाइल्ड लाइफ के लिए 21 करोड़ रुपये का है प्रावधान

जंगली जानवरों के संरक्षण के लिए वाइल्ड लाइफ एरिया में 21 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. पीटीआर के लिए बजट बढ़ाकर लगभग आठ करोड़ रुपये किया गया है. बाघों के संरक्षण के लिए विशेषज्ञ राजेश गोपाल और प्रो रघुराम से भी संपर्क किया गया था और सलाह भी ली गयी थी.

क्या है बाघों की जनगणना का फॉर्मूला

बाघों के पंजों के निशान का अध्ययन किया जाता है. कैमर ट्रैप की जद में आये बाघों का विश्लेषण किया जाता हैं. बाघों के मल की जांच की जाती है. यह भी पता लगाया जाता है कि बाघ कितने बड़े क्षेत्र में भ्रमण करते हैं.

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