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झाड़ियों के बीच स्थित है फूड टेस्टिंग लैब, भवन के आसपास लगा है गंदगी का अंबार

ऐसे में जांच कितना सही हो पाता है. यह खुद ही जांच का विषय है.

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Chandan Choudhary
Ranchi : जिस स्थान पर पर खाद्य पदार्थों की जांच की जाती हो. यदि वही स्थान कचरा और झाड़ियों के बीच स्थित हो तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि वहां होने वाले लैब भी कितने स्वच्छ होंगे. कुछ ऐसा ही है नामकुम में स्थित राज्य खाद्य निदेशलाय एवं औषधि प्रयोगशाला. जिसका साल 2008 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने उद्घाटन किया था. लेकिन वर्तमान में स्थ्ती यह है कि भवन के आसपास गंदगी का अंबार लगा है. साथ ही लंबी-लंबी झाड़ियां भी उग आयी हैं. खाद्य सुरक्षा कार्यालय, जो लोगों को सेफ्टी फुड खाने का संदेश देता है. भोजन मिलावट रहित खाने के लिए प्रेरित करता है. साथ ही मिठाई या खाने की वस्तु में कोई मिलावट तो नहीं इसकी भी जांच करता है. लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि जिस प्रयोगशाला में भोज्य पदार्थ की टेस्टिंग की जाती है, वह खुद ही बीमारी को न्यौता दे रहा है. ऐसे में जांच कितना सही हो पाता है, यह खुद में भी जांच का विषय है.

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राज्यभर के फूड सैंपलों की होती है जांच

राज्य में सिर्फ एक लेबोरेट्री होने की वजह से राज्यभर से फुड के सैंपल जांच के लिए यहां भेजे जाते हैं. जिससे सैंपल की जांच में देरी भी आती है. भारत सरकार की ओर से फूड सैंपल जांच के लिए 14 दिन का समय तय किया गया है. लेकिन सुविधाओं के अभाव में कई बार सैंपल की जांच में देरी हो जाती है. सैंपल जांच होने के बाद भी इसकी रिपोर्ट सौपने में भी कई दिन लग जाते हैं. कार्यालय के कर्मचारी कहते हैं कि जगंलों के बीच में बसे होने की वजह से आसपास झाड़ी उग आते हैं. जिससे देखने से लगता ही नहीं कि यहां कोई प्रयोगशाला भी है. साथ ही जंगल होने की वजह से  मच्छर और मक्खियों का भी प्रकोप कार्यालय में ज्यादा रहता है.

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कमी को दूर करने के हो रहे हैं प्रयास : फूड एनालिस्ट

फूड एनालिस्ट सह कॉर्डिनेटर चतुर्भुज मीणा ने इस बारे में  बताया कि कार्यालय में सुविधाओं की कमी है. लेकिन इस कमी को दूर करने के लगातार प्रयास भी किए जा रहे हैं. कार्यालय में आठ मैन पॉवर है, जिसमें एक फूड एनालिस्ट, चार टेक्निशियन, एक क्वालिफाइड एवं दो अटेंडेंट हैं. साथ ही मीणा ने बताया कि मशीनें भी इस कार्यालय में आधुनिक नहीं हैं, जिससे सैंपल के जांच में परेशानी आती है. साथ ही उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक मशीनें यदि लग जाती हैं तो इससे काम और तेजी से होगा. साथ ही उन्होंने बताया कि लगभग डेढ़ करोड़ रुपए के प्रस्ताव को स्वीकृति मिली है और जल्दी ही मशीनों में बदलाव होगा.

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