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20 मई के बाद झेलना पड़ सकता है खाद्यान्न संकट, 7 राज्यों से कारोबार प्रभावित

Ranchi: चैंबर के आह्वान पर मंडी शुल्क का विरोध राज्य भर में जारी है. ऐसे में राज्य में 20-21 मई के बाद से खाद्यान्न संकट शुरू होने की आशंका है. पंडरा बाजार, रांची के कारोबारियों ने 16 मई से नया ऑर्डर देना बंद कर दिया है. सात प्रमुख राज्यों से यहां के व्यापारी माल मंगाते रहे हैं. महाराष्ट्र, यूपी, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बंगाल, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों से यहां माल आता रहा है. चावल, दाल, खाद्य तेल, आलू-प्याज, आटा और अन्य खाद्यान्नों का नया ऑर्डर यहां के कारोबारी अब नहीं दे रहे. वैसे चावल और हरी सब्जियों को छोड़ कर लगभग सभी खाद्य पदार्थ बाहर से ही आते हैं. अभी 15 मई तक बिल हुए सामान की आपूर्ति जारी है. पर अब मंडी शुल्क पर आपत्ति और नया ऑर्डर नहीं दिये जाने तथा राज्य सरकार से स्तर से इस पर कोई कदम नहीं उठाये जाने के चलते खाद्यान्न संकट का असर इस सप्ताह के अंत तक दिखना तय माना जा रहा है.

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माल की आपूर्ति पर नजर रखने को कमिटी
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पंडरा बाजार में उतरने वाले माल के मामले की जांच और नजर रखने को व्यापारियों ने पहल की है. बाजार समिति में हरि कनोडिया की अगुवाई में एक कमेटी बनायी गयी है. बाहर से आने वाले माल और उसके बिल की यह समिति जांच करेगी. अगर माल का आर्डर और बिल 15 मई तक का होगा, तभी उसे पंडरा बाजार में उतरने दिया जायेगा.

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क्या कहता है चैंबर

चैंबर के पूर्व अध्यक्ष अंचल किंगर (2008-09) कहते हैं कि पहले मंडी शुल्क का मतलब था कि कहीं एक जगह बाजार में किसानों द्वारा माल उतारे जाने पर चार्ज किया जाना. उसे सुविधाएं और जगह मुहैया कराया जाना. पर अब यह सब खत्म हो चुका है. अब सिर्फ ट्रेडिंग होती है. मंडी शुल्क पूर्व में एक फीसदी तक लिया जाता था. फिर इसके लगातार विरोध के बाद 2015 में हटा लिया गया था. अब फिर से इस सरकार में दो फीसदी तक शुल्क लिये जाने की बात है. इससे राज्य का जो विकास कोरोना और अन्य कारणों से रूका पड़ा था, वह भी ठप हो जायेगा. चोरी का रास्ता खुलेगा. भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा. छत्तीसगढ़ सहित दूसरे राज्यों में भी इस शुल्क को हटा दिया गया है. अब देश भर में जीएसटी शुल्क का प्रावधान है तो ऐसे शुल्क का तुक नहीं.

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राजनेताओं का भी सपोर्ट

पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी कहते हैं कि झारखंड के खाद्यान्न व्यापारी विगत कई दिनों से मंडी शुल्क के विरोध में आंदोलनरत हैं. इसके विरोध में 16 मई को चावल समेत अन्य खाद्यानों का उठाव नहीं हुआ. अगर इस विधेयक को वापस नहीं लिया गया तो राज्य में खाद्यान का संकट बढ़ सकता है. इस संदर्भ में उन्होंने पहले भी राज्य सरकार को अवगत कराया था. इस पर सरकार को विचार करने की जरूरत है.

 

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