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पांच सालों में तीन सांसद बने रहे बैक बेंचर- नहीं पूछा एक भी सवाल, सात एमपी बहस में हिस्सा लेने में पीछे

  • जयंत, सुदर्शन और शिबू का अटेंडेंस पुअर, पांच साल में जयंत की उपस्थिति रही सिर्फ 11 फीसदी
  • झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरन की 36 फीसद और सुदर्शन भगत की उपस्थिति रही 45 फीसदी
  • सवाल पूछने का राष्ट्रीय औसत है 250 सवाल और उपस्थिति का राष्ट्रीय औसत है 68.49 फीसदी

Ranchi: झारखंड के वर्तमान सांसदों का परफॉरमेंस किसी न किसी मामले में राष्ट्रीय औसत से कम ही रहा. कोई एमपी फंड के खर्च में पीछे रहे तो किसी का अटेंडस काफी खराब रहा. कई सांसदों ने बहस में हिस्सा लेने से भी कन्नी काटी.

पांच साल में तीन सांसद बैक बेंचर की भूमिका में रहे. इन्होंने पांच साल के दौरान एक भी सवाल नहीं पूछा. इसमें दुमका के सांसद सह झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन, खूंटी के सांसद कड़िया मुंडा और लोहरदगा सांसद सह केंद्रीय मंत्री सुदर्शन भगत का नाम शुमार है.

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वहीं हजारीबाग के सांसद सह केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा ने सिर्फ 10 सवाल ही पूछे. जबकि सवाल पूछने का राष्ट्रीय औसत 250 है.

बहस में हिस्सा लेने भी कतराये झारखंड के सात सांसद

संसद में होने वाली बहस में हिस्सा लेने से भी झारखंड के सांसद कतराये. सात सांसदों ने बहस में राष्ट्रीय औसत से भी कम बार हिस्सा लिया.

इसमें दुमका के सांसद शिबू सोरेन, खूंटी सांसद कड़िया मुंडा, सिंहभूम से सांसद लक्ष्मण गिलुआ, राजमहल के सांसद विजय हांसदा, लोहरदगा सांसद सुदर्शन भगत, कोडरमा सांसद रवींद्र राय और धनबाद से सांसद पीएन सिंह का नाम शामिल है.

पांच साल के दौरान शिबू सोरेन ने सिर्फ एक बार ही बहस में हिस्सा लिया. इसी तरह सांसद कड़िया मुंडा ने दो बार, सांसद लक्ष्मण गिलुआ ने 32 बार, राजमहल के सांसद विजय हांसदा ने 35 बार, लोहरदगा सांसद सुदर्शन भगत ने 28 बार, कोडरमा सांसद रवींद्र राय ने 58 बार और धनबाद के सांसद पीएन सिंह ने 45 बार ही बहस में हिस्सा लिया. जबकि बहस में हिस्सा लेने का राष्ट्रीय औसत 65 बार रखा गया है.

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नौ सांसदों का अटेंडेंस बढ़िया, तीन का काफी पुअर

संसद में उपस्थिति के मामले में 9 सांसदों का अटेंडेंस बमबम है. जिसमें कड़िया मुंडा, लक्ष्मण गिलुआ, रामटहल चौधरी, रवींद्र राय, विद्युत वरण महतो, निशिकांत दूबे, रवींद्र पांडेय, पीएन सिंह और सुनील सिंह का अटेंडेंस 81 से 96 फीसदी तक है.

राजमहल के सांसद विजय हांसदा का अटेंडेंस 69 फीसदी है. जबकि शिबू सोरेन का 36 फीसदी, जयंत सिन्हा का 11 फीसदी और सुदर्शन भगत का अटेंडेंस 45 फीसदी ही रहा. हालांकि, अटेंडेंस का राष्ट्रीय औसत 68.49 फीसदी है.

सात सांसद खर्च करने में भी पीछे रहे

झारखंड के सात सांसद एमपी फंड खर्च करने में भी पीछे रहे. शिबू सोरेन ने 16.36 करोड़, कड़िया मुंडा ने 16.87 करोड़, रामटहल चौधरी ने 13.47 करोड़, विद्युत वरण महतो ने 17.25 करोड़. निशिकांत दूबे ने 4.32 करोड़, पीएन सिंह ने 17,79 करोड़ और सुनील सिंह ने 15.29 करोड़ ही खर्च किया.

जबकि फंड खर्च करने का राष्ट्रीय औसत 18.02 करोड़ है. सांसद को सालाना छह करोड़ रुपये का फंड मिलता है. इस हिसाब से पांच साल में 30 करोड़ रुपये हर सांसद को एमपी फंड के रूप में उपलब्ध कराये जाते हैं.

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जानिये झारखंड के सांसदों का रिपोर्ट कार्ड

नाम अटेंडेंस(प्रतिशत में) सवालों की संख्या बहस में हिस्सा लेने की संख्या खर्च(करोड़ में)
शिबू सोरेन 36 00 01 16.36
कड़िया मुंडा 96 00 02 16.87
लक्ष्मण गिलुआ 92 513 32 27.48

 

रामटहल चौधरी 96 624 82 13.47
विजय हांसदा 69 458 35 18.17
सुदर्शन भगत 45 00 28 18.28
रवींद्र राय 81 391 58 18.66

 

विद्युत वरण 93 896 107 17.25

 

जयंत सिन्हा 11 10 91 21.08

 

निशिकांत दूबे 98 676 382 4.32

 

रवींद्र पांडेय 91 498 158 18.14
पीएन सिंह 92 184 45 17.79
सुनील सिंह 90 608 143 15.29

 

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