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पांच छह कंपनियां कर रही सीमेंट और स्टील के मूल्य पर नियंत्रण, केंद्र सरकार बनाये रेगुलेटरी अथॉरिटी : चैंबर

  • सीमेंट और स्टील के दामों में सरकार का नियंत्रण नहीं
  • 80 प्रतिशत मार्केट दो चार दिन पहले तय कर ले रही
  • कोविड 19 के बाद से रियल एस्टेट सेक्टर परेशान

Ranchi: पिछले कुछ महीनों में सीमेंट और स्टील के दामों में बेतहाशा वृद्धि हुई है. ऐसा लग रहा है जैसे कुछ गिनी चुनी कंपनियों इसे मॉनिटर कर रही हैं.

ऐसे में बहुत जरूरी है कि केंद्र सरकार सीमेंट और स्टील के दामों के लिए रेगुलेटरी अथॉरिटी बनाये ताकि कीमतों में बेतहाशा वृद्धि पर रोक लग सकें. साथ में दाम नियंत्रण हो सके. ये बातें फेडरेशन ऑफ झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंस्ट्रीज के अध्यक्ष प्रवीण जैन छाबड़ा ने कहीं.

शुक्रवार को चैंबर में प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया. इसमें सीमेंट और स्टील के बढ़ते दामों में विरोध दर्ज किया गया. चैंबर अध्यक्ष ने कहा कि हर सेक्टर के लिये अलग अलग रेगुलेटरी अथॉरिटी है. बिल्डरों पर लगाम लगाने के लिये भी रेरा कानून है, लेकिन स्टील और सीमेंट जैसे कच्चे माल के मूल्य नियंत्रण के लिये कोई अथॉरिटी नहीं है.

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गिनी चुनी कंपनियां कर रही नियंत्रण

वहीं बिल्डर एसोसिएशन झारखंड के अध्यक्ष रोहित अग्रवाल ने कहा कि ऐसा लग रहा है जैसे देश की कुछ गिनी चुनी कंपनियां स्टील और सीमेंट के दाम नियंत्रण कर रही है. इसमें पांच छह प्रमुख कंपनियां है. जो 80 प्रतिशत मार्केट दो चार दिन पहले तय कर ले रही है.

जिससे आये दिन सीमेंट और स्टील के दाम बढ़ने से बिल्डर परेशान है. ऐसा भी नहीं है कि लॉकडाउन के बाद बिल्डरों ने काम रोका, देशभर में काम चालू है. लेकिन कच्चे माल में हो रही बेताहाशा वृद्धि परेशानी का कारण है.

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लगभग छह करोड़ रोजगार देता है रियल एस्टेट

बिजनेस एसोसिएशन ऑफ इंडिया के नेशनल वाइस प्रेसिडेंट चंद्रकांत रायपत ने कहा कि देश के आर्थिक गतिविधि में रियल एस्टेट का अहम योगदान है. लगभग 50 फीसदी हिस्सेदारी रियल एस्टेट सेक्टर की है. वहीं इससे देश भर में छह करोड़ लोगों को रोजगार मिलता है. इसके बाद भी सरकार ने कच्चा माल के मूल्य पर नियंत्रण के लिये कोई अथॉरिटी नहीं बनायी है.

हर सेक्टर सीमेंट और छड़ के बढ़ते दाम से प्रभावित है. फिर चाहे वो कोई भी उद्योग है. कोरोना लॉकडाउन की मार से रियल एस्टेट सेक्टर अभी उभरा भी नहीं है. लॉकडाउन के बाद से कच्चा माल की कीमतों में वृ़द्धि हो रही है. पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दाम से इस क्षेत्र को अधिक प्रभाव नहीं पड़ता.

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