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राज्य के पांच जिले थंडरिंग जोन में, ठनका गिरे, तो आफत में पड़ सकती है जान

थंडरिंग के कारण राज्य के 10 जिलों में औसतन 88 बार बिजली ट्रिप करती है, रांची में हो चुका है हादसा, तार पर गिरा था ठनका, 6000 वोल्ट आंका गया था वोल्टेज

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Ranchi : राज्य के पांच जिले थंडरिंग जोन में हैं. इन जिलों में ठनका गिरे, तो जान आफत में आ सकती है. कारण यह है कि इन जिलों में ट्रांसमिशन लाइन बिछायी जा रही है. इस पर ठनका से बचाव के कोई उपाय नहीं किये गये हैं. खुले तार पर बिजली गिरने से बड़ा हादसा हो सकता है. इसका कारण एक तार से दूसरे तार का जुड़ाव ठीक से नहीं होना बताया जाता है. अर्थिंग सही नहीं होने पर इसका असर फीडर और पावर सब-स्टेशन पर पड़ता है. लाइटनिंग में इंसुलेटर पंक्चर हो जाता है और शॉर्ट सर्किट का भी डर बना रहता है. रांची में तीन साल पहले यह हादसा हो चुका है. राजभवन के पास बिजली के तार पर ठनका गिरने से लाखों का नुकसान हुआ था. इसका वोल्टेज 6000 वोल्ट आंका गया था.

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राज्य में दो तरह के हैं थंडरिंग जोन

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राज्य में दो तरह के थंडरिंग जोन हैं. इसमें लो क्लाउड (कम ऊंचाई के बादल) और माइक्रोस्पेरिक थंडरिंग शामिल है. लो क्लाउड थंडरिंग धरातल से 80 किलोमीटर तक की ऊंचाई पर होती है, जबकि माइक्रोस्पेरिक थंडरिंग की गतिविधि धरातल से 80 किलोमीटर से अधिक ऊंचाई पर होती है. थंडरिंग जोन की पहली श्रेणी में हजारीबाग है. इसके अलावा रांची, सरायकेला-खरसांवा, सिमडेगा, खूंटी और पश्चिमी सिंहभूम के इलाके शामिल हैं.

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बरसात में शॉर्ट सर्किट का डर

बरसात में शॉर्ट सर्किट का डर रहता है. ट्रांसमिशन लाइन और पावर सब-स्टेशन में अर्थिंग की व्यवस्था नहीं है. वहीं, राज्य में ट्रांसमिशन लाइन की लंबाई अधिक है. इस पर अधिक लोड होने के कारण कम वोल्टेज की समस्या बनी रहती है. इसके बीच में ट्रांसफॉर्मर भी नहीं लगाये गये हैं.

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बिजली मारती है हिचकोले

बरसात में बिजली लगातार हिचकोले भी मार रही है. राज्य के 10 जिलों में औसतन 88 ट्रिपिंग होती है. रांची में प्रतिमाह 104 से 169, गुमला में 88 से 185, गिरिडीह में 153-158, दुमका में 142 से 201, देवघर में 171- 182, गोड्डा में 122- 139, जमशेदपुर में 114-138, बोकारो में 74 से 177, डालटनगंज में 22 से 149 और गढ़वा में 149 से 222 बार प्रतिमाह ट्रिपिंग होती है.

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