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शराब पर पहले सिंडिकेट का अधिकार और अब सरेआम लूट का कारोबार, अफसर कह रहे-ऑल इज वेल

Akshay Kumar Jha

Ranchi: झारखंड में शराब कारोबार अब नये तर्ज-तरीकों से चल रहा है. खुदरा व्यापार सिंडिकेट के हाथों में जाने के बाद अब थोक व्यापार भी सिंडिकेट के हाथों में चला गया है. खुद उत्पाद विभाग के कागजात बता रहे हैं कि कैसे संथाल परगना के एक व्यापारी के हाथों में थोक व्यापार का सारा काम चला गया है. राज्य में शराब कारोबर की नीति बदलने के लिए नियम और कायदों की भी परवाह नहीं की गयी. बिना राजस्व पर्षद की सहमति के इस पॉलिसी को कैबिनेट से पास करा लिया गया.

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शराब थोक व्यापारी काम किसी भी जिला में करें, लेकिन कंट्रोल संथाल परगना के सिंडिकेट का ही है. राज्य के सभी जिलों में थोक व्यापार का काम करने वालों के बैंक डिटेल मिहिजाम और जामताड़ा के हैं. इससे समझा जा सकता है कि शराब व्यापार पर किसका एकाधिकार हो चुका है. बात यहीं तक नहीं है. कारोबार पर एकाधिकार है तो अब मनमानी भी शुरू हो गयी है. दुकानों में शराब की बिक्री में मनमानी वसूली की शिकायतें आम हैं. लाखों रुपए की लूट शराब व्यापार में रोजाना हो रही है.

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10 से 50 रुपए हर बोतल पर हो रही है वसूली,  नहीं है कोई रेट चार्ट

शराब पीने वालों ने गौर किया होगा कि अब हर ब्रांड के विदेशी शराब पर पहले से ज्यादा कीमत वसूली जा रही है. जिस 180 एमएल शराब का कीमत पहले 180 रुपए थी, अब वो बढ़ कर 190 हो गयी है. यह रकम सीधे शराब व्यापारियों की जेब में जा रही है. इस तरह का इजाफा 375 एमएल (हाफ) और 750 एमएल (फुल) बॉटल पर देखने को मिल रहा है. फुल बॉटल शराब कारोबारी 50 रुपए तक की वसूली कर रहे हैं. पूरी वसूली का हिसाब किया जाए तो नतीजे चौंकाने वाले हैं. रोजाना करीब 75 लाख रुपए की वसूली पूरे झारखंड में हो रही है और विभाग चुप है. विभाग की तरफ से कोई सख्ती नहीं बरती जा रही है. उत्पाद विभाग के कायदों की बात करें तो हर शराब दुकान पर रेट लिस्ट टंगी होनी चाहिए. लेकिन पूरे झारखंड के किसी भी शराब दुकान में रेट लिस्ट नहीं टंगी हुई है. पूछे जाने पर उत्पाद विभाग के अधिकारी माकूल जवाब तक नहीं दे पा रहे हैं.

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कमिश्नर साहब ना ही अपडेट है आपका बेवसाइट और ना ही दुकान पर लगी है लिस्ट

इस मामले को लेकर न्यूज विंग के विशेष संवाददाता ने झारखंड के उत्पाद आयुक्त से बात की. उन्होंने बताया कि “पिछले हफ्ते कुछ ब्रांड की कीमतों में इजाफा हुआ है. जेएसबीसीएल के वेबसाइट पर सारी कीमतों को अपडेट किया गया है. उसपर जाकर कोई भी कीमत को देख सकता है. जिस किसी ब्रांड की कीमतों में इजाफा किया गया है, उसे वेबसाइट पर जरूर अपडेट किया जाता है. कई बार पुराने स्टॉक होने की वजह से प्रिंट रेट सही नहीं रहते. रेट लिस्ट हर दुकान पर टंगना अनिवार्य है. अगर कहीं से रेट लिस्ट नहीं टंगने की सूचना आएगी तो निश्चित तौर पर कार्रवाई होगी.”

 

जबकि ऐसा नहीं है. उत्पाद विभाग की बेवसाइट पर खबर लिखे जाने तक 2018-19 का ही रेट चार्ट अपडेट है. जिस रॉयल स्टैग 180 एमएल की कीमत दुकान में 190 वसूली जा रही है, उस शराब की कीमत बेवसाइट पर सिर्फ 142 रुपए है. अगर उत्पाद आयुक्त की बात सही है तो दुकानदार इस शराब पर 48 रुपए ज्यादा वसूल रहे हैं. ऐसा अन्य ब्रांड के शराब के साथ हो रहा है. कहा जा रहा है कि सत्ता सीर्ष के कुछ करीबी पूरे काम को खुद देख रहे हैं. ऐसा करने के पीछे उनकी मौन सहमति समझी जा सकती है.

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