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साइबर थाने में जल्द दर्ज नहीं होती FIR, चक्कर काटने को लोग विवश

साइबर थाना में पेंडिंग हैं दो लाख मामले

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Ranchi: झारखंड में इन दिनों साइबर क्राइम काफी बढ़ गया है. साइबर अपराधी, पुलिस से ज्यादा हाईटेक होते नजर आते हैं. बड़ी आसानी से किसी अपराध को अंजाम देकर निकल जाते है. और साइबर पुलिस कुछ नहीं कर पाती है. वही साइबर ठगी के शिकार हुए पीड़ित को आजकल दोहरी परेशानी का सामना करना पड़ रहै है.

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दरअसल, साइबर क्राइम के पीड़ित जब मामला दर्ज करवाने साइबर थाना जाते हैं तो उन्हें अपने एरिया से संबंधित थानों में मामले दर्ज करवाने को कहा जाता है. इधर जब वो अपने संबंधित थाना में जाते हैं तो उन्हें साइबर थाने का मामला बताकर वहां मामला दर्ज करवाने को कहा जाता है.

चक्कर लगाने में ही बीत जाता समय

अपने संबंधित थाना और साइबर थाना का काफी चक्कर लगाने के बाद अगर सेवर थाना में मामला दर्ज भी हो जाता है. तब तक काफी देर हो जाती है और साइबर क्रिमनल आसानी से निकल जाते हैं. जबकि साइबर थाना का खुद कहना है कि 24 घंटे तक ही कोई भी कार्रवाई हो सकती है. उसके बाद अपराधी को पकड़ना बहुत मुश्किल हो जाता है. लेकिन ठगी का शिकार हुए व्यक्ति को अपने क्षेत्र के संबंधित थाना और साइबर थाना का चक्कर लगाने में ही 24 घंटे से ज्यादा समय निकल जाता है. जिस कारण अपराधी तक पुलिस नहीं पहुंच पाती है.

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बड़े मामलों में भी जल्द केस नहीं होता दर्ज

नियम के अनुसार, 2 लाख रुपए से ज्यादा की ठगी का मामला साइबर थाना में दर्ज होता है. लेकिन कुछ केसों में देखा गया है कि दो लाख से अधिक की धोखाधड़ी के मामले भी साइबर थाने में जल्दी दर्ज नहीं किये जाते. ऐसे में पीड़ित व्यक्ति के पास थाने के चक्कर लगाने के अलावे कोई विकल्प नहीं बचता है.

12 अगस्त 2018

पंडरा निवासी सुजीत कुमार का अकाउंट से 2.47 लाख रुपए की फर्जी निकासी की गई. जब वह साइबर थाना गए तो, उन्हें पंडरा ओपी में रिपोर्ट दर्ज करवाने को कहा गया और जब वह पंडरा ओपी गये तो बोला गया कि दो लाख से ज्यादा का मामला है. इसलिए साइबर थाना में मामला दर्ज होगा.

9 अगस्त 2018

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भैया पुर निवासी गुड्डू गुप्ता की पत्नी से एटीएम बदलकर मेन रोड स्थित एटीएम से 2.25 लाख रुपये की निकासी कर ली गई. जब वह मामला दर्ज करवाने साइबर थाना गए तो यहां मामला दर्ज नहीं किया गया. बोला गया घटना क्षेत्र से संबंधित थाना में जाकर शिकायत दर्ज करवाए.

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2 लाख से ज्यादा मामले दर्ज

रांची के साइबर थाने में पेंडिंग केस की फेहरिस्त लम्बी है. साइबर थाना, संभवतः रांची का पहला ऐसा थाना है जहां दो लाख से ज्यादा मामले लंबित हैं. और उनकी जांच मात्र दो टेक्नीशियन के भरोसे है.

रेड करने के लिए भी नहीं है टीम

साइबर थाने के पास रेड करने के लिए भी अपनी एक पुलिस की टीम तक नहीं है. रेड करने के लिए साइबर थाना को पहले पुलिस बल लेना पड़ता है फिर कहीं रेड करने के लिए जाते हैं.

क्या कहती हैं साइबर थाना प्रभारी

साइबर थाना प्रभारी अनीता केरकेट्टा कहती है, कि संसाधनों और मेन पावर की कमी है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि साइबर थाना अपना काम नहीं कर रहा. लगातार फ्रॉड मामलों को निपटाया जा रहा है.

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