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झारखंड में वित्त रहित शिक्षा नीति होगी समाप्त, शिक्षा विभाग ने भेजा प्रस्ताव

Ranchi : ऱाज्य में वित्तरहित शिक्षा नीति समाप्त करने के लिए नियमावली तैयारी की जाएगी और वित्तरहित शिक्षाकर्मियों को वेतनमान भी मिलेगा. हेमंत सरकार ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है. स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग ने कार्मिक प्रशासनिक सुधार विभाग को इसके लिए प्रस्ताव भेज दिया है.

अब कार्मिक प्रशासनिक सुधार विभाग वित्तरहित शिक्षा नीति पर अंतिम निर्णय लेकर अनुशंसा करेगा. इसके लिए वह नियमावली बनाकर सभी वित्तरहित कर्मचारी की सेवा सरकारी संवर्ग में करते हुए वेतनमान देने संबंधी कार्रवाई करेगा. स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग के सचिव राजेश कुमार शर्मा ने इसके लिए कार्मिक विभाग के प्रधान सचिव को पत्र लिखा है.

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शिक्षा विभाग की ओर से भेजे गए प्रस्ताव में कहा गया है कि मुख्यमंत्री सचिवालय की ओर से विधायक दीपिका पांडेय सिंह का पत्र विभाग को उपलब्ध कराया गया था. इसमें वित्तरहित शिक्षा नीति समाप्त करने और नियमावली बनाकर सभी वित्तरहित कर्मचारी की सेवा सरकारी संवर्ग में करते हुए वेतनमान देने संबंधित मामले पर प्रशासनिक सुधार आयोग द्वारा कार्रवाई किए जाने की अपील की गई थी. इस मामले पर झारखंड विधानसभा में भी एक अल्पसूचित प्रश्न के जवाब में मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक सुधार आयोग द्वारा कार्रवाई किए जाने का जिक्र किया था. इस पर शिक्षा सचिव ने कार्मिक विभाग के प्रधान सचिव से पूरे मामले में समुचित कार्रवाई करने के लिए कहा है.

राज्य में वित्त रहित संस्थान :-

  • 170 इंटर कॉलेज स्थायी प्रस्वीकृति प्राप्त
  • 106 हाई स्कूल स्थायी प्रस्वीकृति प्राप्त
  • 200 स्कूल राज्य सरकार से स्थापना अनुमति प्राप्त
  • 33 संस्कृत विद्यालय स्थायी प्रस्वीकृति प्राप्त
  • 43 मदरसा स्थायी प्रस्वीकृति प्राप्त

वित्तरहित शिक्षा नीति समाप्त होने के बाद इसके करीब सात हजार शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए सरकार के पास कई विकल्प मौजूद हैं. कार्मिक प्रशासनिक सुधार विभाग अपनी अनुशंसा में वित्तरहित संस्थानों और कर्मचारियों का अधिग्रहण कर वेतनमान व भत्ता दे सकती है. इसके अलावा घाटानुदान या वर्तमान में मिल रहे अनुदान को दोगुना किया जा सकता है या फिर शिक्षकों-कर्मियों को एक निश्चित मानदेय दिया जा सकता है. यह सब कुछ कार्मिक प्रशासनिक सुधार विभाग की ओर से तैयार होने वाली नियमावली और उनकी अनुशंसा पर निर्भर करेगा.

राज्य में फिलहाल वित्तरहित स्कूल-कॉलेजों में छात्र-छात्राओं की संख्या और रिजल्ट के आधार पर अनुदान मिलता है. इस बार से इसमें कुल रिजल्ट की बजाए 40 फीसदी रिजल्ट रहने पर भी 100 फीसदी अनुदान देने की तैयारी चल रही है. इसके लिए संस्थानों को 30 नवंबर तक आवेदन करना है. इसके बाद अन्य संस्थानों के लिए स्थायी प्रस्वीकृति का रास्ता खुल जाएगा. अभी संताल परगना जहां छात्रों की संख्या कम है वहां वित्तरहित शिक्षकों व शिक्षकेतर कर्मियों को सात से आठ हजार रुपए मासिक के आधार पर अनुदान मिलता है. वहीं पलामू जहां छात्रों की संख्या अधिक है वहां 12-13 हजार रुपए मासिक के आधार पर अनुदान साल में दिया जाता है.

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