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लंबे समय से महसूस कर रहे थकान…कहीं आप बर्नआउट के शिकार तो नहीं

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NW Desk: अगर आप लंबे समय से खुद की एनर्जी को लो फिल कर रहे हैं. थकान और निराशा और उलझन भरी सी लाइफ महसूस हो रही है. तो आपको समझना होगा कि आप बर्नआउट के शिकार हो गये हैं.

बर्नआउट एक तरह का सिंड्रोम है और इसका संबंध हार्ट रिद्म से भी होता है.
हाल ही हुए एक अध्ययन में यह बात सामने आयी है कि बर्नआउट के शिकार लोग हर समय एनर्जी की कमी महसूस करते हैं.

लंबे समय का स्ट्रेस बर्नआउट का कारण

जरूरत से ज्यादा थकान, या जिसे हम वाइटल एग्जॉशन कहते हैं. इसे ही बर्नआउट सिंड्रोम के रूप में जाना जाता है.

लंबे समय से तनाव में रहना घातक (सांकेतिक फोटो)

ये परेशानी काफी लंबे समय तक स्ट्रेस में रहने के कारण होती है. जो लोग पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में किसी ना किसी कारण लंबे समय तक तनाव का सामना करते हैं, उन्हें इस तरह की दिक्कत हो जाती है.

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बर्नआउट और डिप्रेशन दो अलग चीजें

बर्नआउट और डिप्रेशन को एक समझने की भूल ना करें. इन दोनों में अंतर होता है. डिप्रेशन में जो लोग होते हैं, उनका मूड हर समय लो रहता है. उनमें सेल्फ कॉनफिडेंस की कमी होती है और ये किसी-ना-किसी तरह के गिल्ट से भरे होते हैं. जबकि बर्नआउट के शिकार लोगों में ऐसा नहीं होता. उनमें चिड़चिड़ापन और थकान अधिक देखने को मिलता है.

11 हजार लोगों पर किया गया शोध

यूएस की साउथर्न कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी द्वारा किये गये इस रिसर्च के ऑर्थर परवीन के गर्ग का कहना है कि बर्नआउट की यह स्थिति ज्यादातर उन लोगों में देखने को मिलती है, जो एग्जॉशन का लंबे समय तक शिकार रहते हैं.

सांकेतिक फोटो

बर्नआउट और हार्ट डिजीज के बीच संबंध की कड़ी पर आधारित इस शोध को हाल ही यूरोपिनयन जर्नल ऑफ प्रिवेंटिव कार्डियॉलजी में पब्लिश किया गया है. यह स्टडी 25 सालों तक चली और इसमें 11 हजार लोगों को शामिल किया गया. इसमें उन लोगों को शामिल किया गया, जिनमें बहुत अधिक थकान, गुस्सा, ऐंटीडिप्रेशन डोज लेनेवाले और जिनके पास सोशल सपॉर्ट की कमी थी.

दिल पर पड़ता है बुरा असर

शोध में यह बात सामने आयी है कि बहुत अधिक थकान, शरीर में सूजन और सायकॉलजिकल तनाव का बढ़ना एक दूसरे से जुड़ा हुआ है. और जब यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो ये हार्ट टिश्यूज को डैमेज करने का काम करती है. और ऐसे में अरिद्मिया की स्थिति बनने लगती है, जिसमें दिल की धड़कने कभी कम और कभी ज्यादा होती रहती हैं.

बर्नआउट हार्ट के लिए नुकसानदेह (सांकेतिक फोटो)

एट्रियल फिब्रिलेशन यानी एएफ को अरिद्मिया के नाम से भी जाना जाता है. एट्रियल फिब्रिलेशन में हार्ट बीट्स रेग्युलर तरीके से काम नहीं पाती हैं और ब्लड क्लॉट्स, हार्ट फेल्यॉर और दिल संबंधी दूसरी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. हालांकि फिलहाल इस खतरे की दर को अभी मापा नहीं जा सका है.

बता दें कि पहले की भी कई स्टडीज में ये बात साफ हो चुकी है कि जरूरत से अधिक थकान और एग्जॉशन के कारण कार्डियॉवस्कुलर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. इसमें हार्ट अटैक और स्ट्रोक होने के चांसेस होते हैं. गर्ग का कहना है कि अगर एग्जॉशन से बचने और तनाव को डील करने का तरीका जान लिया जाए तो दिल से जुड़ी कई बीमारियों से बचा जा सकता है.

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