Opinion

नफरत के खिलाफ अमेरिकियों के गुस्से को महसूस कीजिये, अपनी गर्दन पर जकड़न का एहसास होगा

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Ruchika Garg

‘थोड़ा ही सही अमेरिका में तो लोगों को एहसास हो रहा है कि एक दक्षिणपंथी सरकार के पैदा किये हालात ने फ़िज़ां में कितनी नफरत घोल दी है. हिंदुस्तान अभी इस एहसास से दूर किचन में नयी रेसिपी तैयार करने में व्यस्त है.

अभी दम केवल मजदूरों का घुट रहा है. अभी लिंचिंग केवल दलितों और अल्पसंख्यकों की हो रही है. अभी केवल वो जेलों में ठूसें जा रहे हैं, जो असहमत हैं. अभी आपको लोकतंत्र का गला घोंटे जाने की साजिशों का एहसास नहीं हो रहा है.

दिल्ली में पिंजरा तोड़ बच्चियों के खिलाफ और देशभर में अलग-अलग इलाकों में हुई ऐसी साजिशों की आंच अभी आपके दरवाजे तक नहीं पहुंची है.

अभी मजदूरों का खून और पसीना आपको केवल किसी टीवी चैनल की एक खबर बस लग रही है.

अभी लॉकडाउन-जनित बेरोजगारी से त्रस्त लोगों में आपका कोई अपना शामिल नहीं है और होना भी नहीं चाहिए. लेकिन आप तो अभी अपनी सेहत को लेकर फिक्रमंद हैं.

अभी ना तो ये चीखें आपके कानों तक पहुंच रही हैं, ना इनका गुस्सा आपको ये बतला रहा है कि आपकी हालत अमरीका से ज़्यादा बदतर है. कि आपकी गर्दन भी घोटी जा रही है. लेकिन ताली, थाली और मोमबत्तियों ने अभी आपकी चेतना का गला घोंट रखा है.

अभी आपने भी अपनी तर्कशक्ति को, अपनी इंसानी संवेदनाओं को, अपने सवालों को एक ऐसी चेतना-शून्य जकड़न के हवाले कर रखा है, जिससे आज़ादी आसान नहीं है.

अभी आपको एहसास नहीं है कि उस अमेरिकी पुलिस अफसर के बूटों की धमक आपकी गलियों तक सुनाई दे रही हैं.

अभी आप दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की गौरव गाथाओं को ही पढ़ रहे हैं.

अभी आपने अपने लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमलों से आंखें मूंद रखी हैं.

अभी आपको अपने देश की न्याय व्यवस्था के पतन का अंदाज़ नहीं है.

अभी आपको शायद इस बात का अनुमान भी नहीं है कि आपकी अपनी स्वतंत्रता किस पूंजी की जकड़न में कराह रही है.

अभी आपको यह याद नहीं है कि आज आप जिस स्वतंत्रता के गीत गा रहे हैं वो किन कुर्बानियों से हासिल हुई थी.

अभी तो आपको अपने ही संविधान की प्रस्तावना एक कागज का टुकड़ा भर लगने लगी है.

अभी तो आप ये भी भूल गए हैं कि इस संविधान का इस देश की आकांक्षाओं से क्या रिश्ता है.

आपको भी ये लगने लगा है कि संविधान की प्रस्तावना में ‘समाजवादी’ और ‘पंथ निरपेक्ष’ शब्द किसी 42वें संशोधन के जरिये घुसा दिए गए हैं. और इसका ना तो हमारे महान स्वतंत्रता आंदोलन के मूल्यों से कोई लेना-देना था, ना ही इस देश के निर्माण में इन मूल्यों का कोई योगदान था!

आप जितना संविधान को रद्दी की टोकरी में डालना चाह रहे हैं, उतना आप अपनी स्वतंत्रता का गला घोंट रहे हैं अभी तो आपको इस बात का भी एहसास नहीं है.

ज़रा अपनी संवेदनाओं को कुरेद कर देखिए! ज़रा अपनी चेतना को झकझोरिये, ज़रा अपने विवेक को काम पर लगाइए,  स्वतन्त्रता की अपनी आकांक्षाओं को थोड़ा महसूस कीजिये और सोचिए कि ये स्वतंत्रता किस कीमत पर हासिल हुई और आप कितनी आसानी से, बिना कोई सवाल किए खुद को अविवेकी भीड़ का हिस्सा बनाते जा रहे हैं.

सोचिए कि दुनिया के सबसे विकसित राष्ट्र होने का दम भरने वाले अमेरिका में अश्वेतों के खिलाफ नफरत किस अमानवीय हद तक है और सोचिए कि आपको किस आसानी से इस तरह की नफरत की आग में झोंक दिया जा रहा है!

आपकी अपनी स्वतन्त्रता की मॉब लिंचिंग हो रही है.

सोचिए कि विज्ञान,तर्क, सदभाव, प्रेम, आस्था के गंगा जमुनी रंग इन सबको कुचल कर आप कैसे अपनी आज़ादी को बचा सकेंगे?

अक्सर अमेरिका से आप बहुत कुछ पाने को व्याकुल नज़र आते हैं. थोड़ा इस नफरत के अनुभव और इसके खिलाफ सभ्य अमेरिकी समाज के गुस्से को भी महसूस कीजिये. शायद आपको अपनी गर्दन पर भी जकड़न का एहसास हो!’

डिस्क्लेमर : ये लेखिका के निजी विचार हैं.

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