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 फारूक अब्दुल्ला पीएसए के तहत हिरासत में, SC में 8 याचिकाओं पर सुनवाई, #CJI ने कहा, जरूरत पड़ी तो वे खुद श्रीनगर जायेंगे

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबडे और जस्टिस अब्दुल नजीर की पीठ ने केंद्र सरकार को दो सप्ताह  में कश्मीर की पूरी तस्वीर सामने रखने का निर्देश दिया

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NewDelhi : जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला को सोमवार को सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत हिरासत में ले लिया गया.  जिस स्थान पर अब्दुल्ला को रखा जायेगा. उसे एक आदेश के जरिए अस्थायी जेल घोषित कर दिया गया है. पीएसए के तहत किसी भी व्यक्ति को बिना किसी मुकदमे के दो साल तक हिरासत में रखा जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने  फारुक अब्दुल्ला को न्यायालय के समक्ष पेश किये जाने की मांग करने वाली याचिका पर केंद्र और जम्मू-कश्मीर प्रशासन से  जवाब मांगा. अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा रद्द किये जाने के बाद से कथित रूप से हिरासत में हैं.

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राज्य में जल्द से जल्द हालात सामान्य बनाये जायें

जान लें कि जम्मू-कश्मीर  से आर्टिकल 370 के ज्यादातर प्रावधानों को हटाये जाने के बाद पैदा हुए हालात को लेकर दाखिल अलग-अलग कुल 8 याचिकाओं पर  सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई.  चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबडे और जस्टिस अब्दुल नजीर की पीठ ने केंद्र सरकार को दो सप्ताह  में कश्मीर की पूरी तस्वीर सामने रखने का निर्देश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर प्रशासन को निर्देश दिया कि राज्य में जल्द से जल्द हालात सामान्य बनाये जायें.

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सुप्रीम कोर्ट का 30 सितंबर तक जवाब दाखिल करने का आदेश

कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्थिति सामान्य की जाये और स्कूलों व अस्पतालों को फिर से शुरू किया जाये. आर्टिकल 370 के ज्यादातर प्रावधानों को हटाने के सरकार के फैसले और नैशनल कॉन्फ्रेंस के नेता व सांसद फारूक अब्दुल्ला की नजरबंदी के खिलाफ भी याचिकाएं दाखिल की गयी हैं. तमिलनाडु के नेता और एमडीएमके के संस्थापक वाइको की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को 30 सितंबर तक जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से इस आरोप पर रिपोर्ट मांगी है कि लोगों को कोर्ट से संपर्क करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा रहा है . चीफ जस्टिस ने कहा कि यह काफी गंभीर मामला है और अगर जरूरत पड़ी तो वह खुद श्रीनगर जायंगे. हालांकि इस दौरान चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाले दो ऐक्टिविस्टों की तरफ से पेश वकील से यह भी कहा कि अगर जम्मू-कश्मीर के हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की रिपोर्ट इससे उलट बताती है तो परिणाम के लिए तैयार रहें.

मीडिया की आजादी पर जवाब तलब

सुनवाई के क्रम में सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया की आजादी को लेकर अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल से पूछा कि किस कारण से आपने कहा कि कश्मीर में समाचार पत्र प्रकाशित हो रहे हैं? कोर्ट ने एजी से यह भी पूछा कि कश्मीर घाटी में इंटरनेट और फोन अभी तक काम क्यों नहीं कर रहे हैं? घाटी में कम्युनिकेशन को क्यों बंद किया गया है? इस पर केंद्र ने पीठ को बताया कि कश्मीर स्थित सभी समाचार पत्र संचालित हो रहे हैं और सरकार हरसंभव मदद मुहैया करा रही है.

प्रतिबंधित इलाकों में पहुंच के लिए मीडिया को पास दिये गये हैं और पत्रकारों को फोन और इंटरनेट की सुविधा भी मुहैया कराई गयी है.  AG ने कहा कि दूरदर्शन जैसे टीवी चैनल और अन्य निजी चैनल, एफएम नेटवर्क काम कर रहे हैं.  इस पर पीठ ने अटॉर्नी जनरल से कहा कि वह इन हलफनामों का विवरण दें.

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अपने जवाब में अटॉर्नी जनरल ने कहा कि कश्मीर में आतंकियों के लिए बड़े पैमाने पर पाकिस्तान के हाई कमिशन की ओर से फंडिंग हो रही है.  कश्मीर में अशांति फैलाने और पत्थरबाजों को समर्थन देने का काम हो रहा है.  अटॉर्नी जनरल ने कहा कि 2016 में बुरहान वानी की मौत के बाद भी राज्य सरकार ने 3 महीने के लिए इंटरनेट और फोन सुविधाओं को बंद कर दिया था.  एजी ने कहा कि मौजूदा हालात में इंटरनेट और फोन बंद करने का फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर किया गया.

जम्मू-कश्मीर सरकार को नोटिस जारी

MDMK चीफ वाइको की याचिका पर उनके वकील ने कोर्ट में कहा कि फारूक अब्दुल्ला की नजरबंदी पर केंद्र सरकार अलग-अलग तर्क दे रही है.  सरकार की ओर से कहा गया है कि पब्लिक सेफ्टी ऐक्ट के तहत नैशनल कॉन्फ्रेंस के नेता को नजरबंद किया गया है.  इसके तहत 2 साल तक किसी शख्स को बिना सुनवाई के हिरासत में रखा जा सकता है.  फारूक केस में सुप्रीम कोर्ट ने आने-जाने और स्वतंत्रता की बात करते हुए केंद्र और जम्मू-कश्मीर सरकार को नोटिस जारी किया है.  दरअसल, वाइको ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के लिए याचिका (हैबियस कार्पस) दाखिल की है.

गुलाम नबी आजाद को श्रीनगर जाने की अनुमति

सुप्रीम कोर्ट ने गुलाम नबी आजाद को श्रीनगर, जम्मू, अनंतनाग और बारामुला जाने की अनुमति दी जिससे कि वह अपने क्षेत्र के लोगों का हालचाल ले सकें इससे पूर्व कोर्ट में गुलाम नबी आजाद के वकील ने कहा कि हमें अपने लोगों से मिलने श्रीनगर, अनंतनाग और बारामूला जाना है.  आजाद ने कहा कि हम वहां राजनीतिक रैली करने नहीं जा रहे हैं. हमें तीन बार एयरपोर्ट से वापस कर दिया गया. हमें अपने गृह जिले में भी नहीं जाने दिया गया.

सीताराम येचुरी की याचिका पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में सीपीआई नेता सीताराम येचुरी की भी याचिका पर सुनवाई हुई. सीपीएम नेता एमवी तारीगामी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह कश्मीर यात्रा के लिए स्वतंत्र हैं. कोर्ट ने कहा कि इस याचिका पर अलग से कोई आदेश नहीं दिया जायेगा.  जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले आर्टिकल 370 के प्रावधानों को खत्म किये जाने को चुनौती देने समेत इससे जुड़ी करीब 8 याचिकाओं पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई है.  इन याचिकाओं में आर्टिकल 370 खत्म करने, जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन की वैधता और वहां लगाई गई पाबंदियों को चुनौती दी गयी है.

जम्मू और कश्मीर पीपल्स कॉन्फ्रेंस (JKPC) पार्टी के प्रमुख सज्जाद लोन ने आर्टिकल 370 के प्रावधानों को खत्म करने और राज्य के पुनर्गठन की वैधता को चुनौती दी है.  इसके अलावा बाल अधिकार कार्यकर्ता इनाक्षी गांगुली और प्रोफेसर शांता सिन्हा ने भी विशेष दर्जा खत्म करने के बाद जम्मू-कश्मीर में कथित रूप से बच्चों को गैरकानूनी रूप से कैद करने के खिलाफ एक याचिका दायर की है.

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि 5 अगस्त के बाद जम्मू-कश्मीर में एक भी गोली नहीं चली है, एक भी शख्स की जान नहीं गयी है.  कोर्ट को बताया गया कि 1990 से लेकर 5 अगस्त तक यहां 41,866 लोग जान गंवा चुके हैं, 71038 हिंसा की घटनाएं हुई हैं और 15,292 सुरक्षा बलों को जान गवानी पड़ी.

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