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किसानों का धान रोजाना जा रहा बंगाल, विभाग पड़ा है सुस्त

  • जिले में अभी तक शुरू नही हुई धान की खरीददारी, किसान कम मूल्य में उपज बेचने को मजबूर
  • पीएम किसान सम्मान योजना में एक लाख से ज्यादा किसान निबंधित
  • धान खरीददारी के समय मात्र 3251 किसानों का हुआ निबंधन

Anwar Hussain
Jamtara: सरकारी दिशा-निर्देश प्राप्त होते-होते किसानों के 90 फीसदी धान की बिक्री स्थानीय बाजारों में हो जाती है. किसानों को रबी फसल के लिए पैसों की जरूरत व सरकारी धान अधिप्राप्ति केंद्रों मे विलंब से भुगतान के कारण किसानों का धान खेतों से उठते ही स्थानीय व्यापारियों की गाड़ियों गांव में मंडरानी शुरू हो जाती है.

सरकारी व्यवस्था की लचर स्थिति के कारण ही किसानों को अपनी उपज का मूल्य नहीं मिल पाता है. अभीतक जिले में धान खरीददारी शुरू नही की जा सकी है. आपूर्ति कार्यालयों से मिली जानकारी के अनुसार अभी तक लैम्प्सों को मिल के साथ टैग किया जा रहा है जबकि गांव में किसानों का धान बिकना प्रारंभ हो चुका है.
प्रतिदिन गांव से छोटी से बड़ी गाड़ियों तक में धान बंगाल जा रहा है. प्रतिदिन बंगाल की गाड़ियों से जिले के किसानों का धान जा रहा है. इस पर कोई रोक तक नहीं लग रही है.

जिले में एक लाख से ज्यादा किसान निबंधित

जिले में एक लाख से ज्यादा किसानों का निबंधन पीएम किसान सम्मान के तहत किया गया है, जबकि किसानों के धान खरीददारी की बात आती है तो किसानों का निबंधन नही हो पाता है. अभी तक 3251 किसानों का ही निबंधन जिला आपूर्ति विभाग कर पायी है.
सवाल है कि सरकारी दुकानों में किसान धान की बिक्री व निबंधन क्यों नही कराना चाहते हैं, जबकि सरकारी दुकानों में दर भी ज्यादा है. किसान कम मूल्य में अपनी उपज को बेचने को तैयार हैं लेकिन लेकिन सरकारी धान अधिप्राप्ति केंद्रों में नहीं देना चाहते हैं.

भुगतान में विलंब के कारण किसान नहीं देना चाहते धान

किसानों को धान की खेती के बाद तुरंत रबी की फसल लगाने की चिंता होती है, लेकिन उनके पास पैसे नहीं होते. इसी कारण किसान धान कटनी के बाद तुरंत पिटाई कर ओने-पौने दामों में धान बेच कर रबी फसलों की खेती में लग जाते हैं.
वहीं यदि सरकारी केंद्रों में धान की बिक्री करते हैं तो भुगतान में महीनों लग जाते हैं. ऊपर से सरकारी केंद्रों में देर से खरीददारी होने की वजह से भी किसान रुचि नही लेते हैं.

इस बार 1 लाख 5 हजार कुंटल धान खरीददारी का लक्ष्य

जिला प्रशासन ने इस बार एक लाख 5 हजार कुंटल धान खरीददारी का लक्ष्य रखा है. लेकिन अभी तक खरीदारी शुरू नहीं की गयी है. जबकि रोजाना किसानों का धान गांव से बंगाल जाना शुरू हो गया है.
बंगाल की गाड़ी से रोजाना धान की गाड़ियां लोड होकर बंगाल जाने लगी है. लेकिन विभाग अभी तक दिशा-निर्देश के अनुसार प्रक्रिया में जुटा हुआ है.

जिले के 6 लैम्प्सों में की जानी है धान खरीददारी

बता दें कि 8 जिलों के 6 लैम्प्सों में धान की खरीददारी की जानी है. 15 नवंबर को दुकानों के उद्घाटन के बाद से खरीददारी नहीं की गयी है.

प्रखंड वार लैम्प्सों के नाम

जामताड़ा प्रखंड के जामताड़ा लैम्प्स, नारायणपुर में सबनपुर, प्रखंड में सिकरपोषणी, नाला प्रखंड में कुलडंगाल, कुंडहित प्रखंड में बाबूपुर व फतेहपुर प्रखंड में डुमरिया लैम्प्सों में धान खरीददारी की जानी है.

क्या कहते हैं अधिकारी

जिला आपूर्ति पदाधिकारी प्रधान माजी ने कहा कि धान की खरीददारी शुरू हो गयी है. किसान अपनी मर्जी से कहीं भी बेच सकते हैं. इसमें कोई रोक नही है. उन्होंने देर से भुगतान होने की भी बात स्वीकारी. कहा कि भुगतान दुमका एफसीआइ से होता हैd

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