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गढ़वा के एक ही प्रखंड के 93 गांवों के किसानों ने आधे दाम पर बिचौलियों को बेच दिया धान

धान क्रय केंद्र नहीं खुलने के कारण अन्नदाता हैं लाचार, बिचैलियों की हो रही मोटी कमाई

Anuj Tiwary

Ranchi:  सूबे के किसानों को अपनी मेहनत से उपजाई गयी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है. उन्हें धान बेचना महंगा पड़ रहा है. सरकार ने एक ओर सभी धान क्रय केंद्र 15 दिसंबर से खोलने का फरमान जारी कर दिया है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ अलग ही है. अधिकतर जिलों में किसान बिचौलियों को ही धान बेचने पर मजबूर हैं.

सबसे चौकाने वाला मामला मंत्री मिथिलेश ठाकुर के क्षेत्र गढ़वा जिले के कांडी प्रखंड  से आया है. इस प्रखंड में 93 गांव हैं जहां के किसानों ने अभी तक 70 प्रतिशत धान बिचौलियों को बेच दिया है. यही बिचौलिये दोगुने दर से एमएसपी के माध्यम से धान की बिक्री कर मेहनत करने वाले किसानों से भी अधिक कमाई करेंगे.

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चतरा, पलामू और प. सिंहभूम में भी नहीं हो रही सरकारी खरीदारी

गढ़वा के अलावा चतरा, पलामू और प. सिंहभूम से एक भी किसान से सरकारी धान विक्रय केंद्रों के माध्यम से धान नहीं खरीदा गया है. किसान अगर एमएसपी पर धान बिक्री करते तो उन्हें 20.50 रुपये प्रति किलो की दर से पैसा मिलता लेकिन बिचैलियों ने इन लाचार किसानों से 10 से 11 रुपये की दर से धान की खरीदारी की है. यहां के किसानों का कहना है कि धान खरीद के लिए सरकार ने एसएमएस भेज दिया, लेकिन कहीं भी धान क्रय केंद्र खुले ही नहीं. पिछले एक सप्ताह से किसान धान बेचने के लिए क्रय केंद्र ढूंढ़ रहे हैं लेकिन उन्हें नहीं मिल रहा है.

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इस मामले को लेकर खाद्य-आपूर्ति विभाग ने वहां के जिला आपूर्ति पदाधिकारी को किसानों से धान खरीदारी की व्यवस्था की मॉनिटरिंग करने को कहा है. साथ ही किसानों की जो समस्या है उसे दूर करने की दिशा में काम करने पर जोर देने को कहा गया है. जबकि सबसे विकट स्थिति यह है कि इन जिलों में धान अधिप्राप्ति केंद्र खुले ही नहीं है.

दूसरी ओर भाजपा पार्टी की ओर से भी  इस मामले पर राजनीति शुरू हो गई है. पार्टी की ओर से लगातार सरकार पर धान नहीं खरीदने को लेकर आरोप लगाये जा रहे हैं. गढ़वा जिले के भाजपा किसान मोर्चा के नेताओं ने किसानों को लूटने जैसे आरोप लगाए हैं.

इन चार जिलों से 14.5 लाख क्विंटल धान खरीदारी का है लक्ष्य

इस बार धान की अच्छी फसल होने के बाद कुल 4.5 लाख क्विंटल धान खरीदारी के लक्ष्य में से इन चार जिलों से ही 14.5 लाख क्विंटल धान खरीदारी का लक्ष्य रखा गया है. सरकार ने पिछले वर्ष की तुलना में करीब 1.5 लाख क्विंटल धान अधिक खरीदने का मन बनाया है. लेकिन अभी तक केंद्र खुले ही नहीं है जिससे किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है. साथ ही सरकार को भी लक्ष्य पूरा करना एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है.

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एफसीआई को नहीं मिल पाया है गोदाम

प्रखंड में एफसीआई को गोदाम नहीं मिल पाने की वजह से भी क्रय केंद्र नहीं खुल पाये हैं. इस संबंध में बताया गया कि प्रखंड विकास पदाधिकारी के अनुसार गोदामों को जल्द एफसीआई के सौंप दिया जायेगा ताकि वे जल्द धान खरीदारी का काम कर सकें. हालांकि यह जांच का विषय बना हुआ है कि आखिर बिना गोदाम की व्यवस्था किए या क्रय केंद्र को खोले कैसे किसानों को मैसेज भेज धान बेचने के लिए आमंत्रित किया गया.

मालूम हो कि ये मैसेज एफसीआई के ओर से किसानों को भेजा गया था. जिसमें उन्हें धान बेचने के लिए और कितना धान वे बेच सकते हैं के बारे में जानकारी दी गई थी. लेकिन केंद्र नहीं खुलने के बाद किसानों के बीच आक्रोश बना हुआ है.

कुछ जिलों में शुरू हुई धान खरीदारी, मात्र 1.20 लाख क्विंटल धान खरीदा

धान खरीदारी कुछ जिलों में जरूर शुरू हुई है लेकिन इसकी गति काफी धीमी है. अभी तक मात्र 1.20 लाख क्विंटल धान की खरीदारी हो सकी है. कई जगहों पर केंद्र खुले होने के बाद भी किसान अपने धान बिचैलियों के माध्यम से बेच रहे हैं.

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