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खाद्य संकट से जूझ रहा परिवार, पांच वर्षीया बच्ची निमानी की मौत की मुख्य वजह भूख- जांच दल

 

Ranchi :  झारखंड में कथित भूख से  मौत की खबरें आये दिन सामने आती हैं. कोरोना संकट के इस दैर में कामगार काम नहीं मिलने के कारण खाद्य संकट से जूझ रहे हैं. ऐसे लोगो की बड़ी संख्या गांव से लेकर शहर तक में है. जिन्हें  सरकार ने किसी तरह की कोई सहयता उपल्बध नहीं करायी है.

ऐसा ही एक मामाला लातेहार जिला में 16 मई को समाने आया.  दोनकी पंचायत के हेसातु गांव में 16 मई को 5 वर्षीया लड़की की मौत का कारण ग्रामीणों ने कथित भूख बताया. अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज एवं उनके सहयोगियों ने पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट जारी की है.

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 क्या है जांच रिपोर्ट में

लगभग 5 वर्ष की निमानी जगलाल भुइयां और कलावती देवी की बेटी थी. 10 सदस्यीय परिवार है. पति, पत्नी और चार महीने से लेकर 13 वर्ष तक के 8 बच्चे. इनके पास जमीन नहीं है. और न ही राशन कार्ड है. दो कमरों के घर में छपर टूटी है. कुछ बर्तन, बिस्तर और एक फटा मछरदानी को छोड़कर अन्य चीजें नहीं हैं.

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 पिता दो माह से घर से दूर रह इट भट्टे में करता है मजदूरी

 पिछले कुछ महीनो से जगलाल भुइयां अपने दो बच्चों के साथ लातेहार जिले के सुकुलहूट में ईंट भट्टे में माटी थोपने का काम कर रहे थे. जगलाल आखिरी बार होली में अपने घर आये थे. फिर वापस भट्टे पर काम करने चले गये थे. और अभी 17 मई तक वहीं है.

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भट्टे पर इन्हें और दो बच्चों को खाना मिलता है. लेकिन मानसून के अंत तक मजदूरी नहीं मिल पायी है. जून माह में मिलने की सम्भावना है. इसलिए वे पिछले दो महीनों के दौरान परिवार को पैसे भेजने में असमर्थ था.  

परिवार को नहीं मिल पाता था भोजन

गत दो माह के दैरान कलावती देवी के घर में ज्यादातर समय खाना नहीं होता था. इसलिए बच्चों को खाना खिलाने के लिए संघर्ष का रही थी. जन धन योजना के माध्यम से बैंक खाते में 500 रुपये व स्कूल और आंगनबाड़ी से नगद पैसे और कभी कभार खाना छोड़कर सरकार के तरफ से उन्हें कोई सहायता नहीं मिली थी.

परिवार का गुजारा यहां-वहां से उधार लेकर चलता था. और कुछ पड़ोसियों ने सहयोग किया था. जब हमने कलावती से पूछा कि आप और आपके बच्चे पिछले कुछ दिनों से क्या खा रहे हैं, तो उन्होंने दर्द भरी आवाज से कहा कि  हम क्या खाते जब हमारे पास कुछ खाने को नहीं है.  

निमानी किसी बिमारी से पीड़ित नहीं थी

आसपास के लोगो और कलावती ने बताया कि निमानी किसी भी बिमारी से पीडि़त नहीं थी. लेकिन 16 मई को शाम में वह अचानक बीमार बड़ी औऱ कुछ देर बाद ही निमानी की मौत हो गयी. कलावती ने बताया कि पहले भी दिन में उल्टी हुई थी.  

लू लगने की संभावना

स्थानीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता आशा देवी ने बताया कि निमानी दोपहर में नदी में नहाई थी. शायद इसी कारण से उसे लू लग गया होगा. कई लोगों (निमानी के माता-पिता और पड़ोसियों) के बयान के अनुसार इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि मुख्य कारण भूख था.  

मुखिया ने माना, नहीं मिला था परिवार को राशन

डोंकी पंचायत के मुखिया पति गोपाल उरांव (मुखिया- पार्वती देवी) 17 मई को 12 बजे दिन में जगलाल और कलावती के घर आये थे. उन्होंने बताया कि दस हजार रुपये के मुखिया कोष से उन्हें राशन नहीं दिया गया.

उन्होंने कहा की कोष में पैसा खत्म हो गया था. दूसरी किस्त की मांग के लिए मुखिया ने प्रखंड विकास पदाधिकारी को लिखित रूप में आवेदन दिया था.  

डीलर ने कहा, जिनका कार्ड नही मिला उसे राशन देने का प्रवधान नहीं

 स्थानीय राशन डीलर ईश्वरी प्रसाद गुप्ता ने बताया कि गैर राशन कार्डधारी परिवारों को राशन देने का कोई प्रावधान नहीं है. जबतक कि ऑनलाइन राशनकार्ड के लिए आवेदन नहीं किया गया हो. डीलर को 7 परिवारों की  सूची मिली थी. जिसे वे 10 किलो प्रति माह राशन देते हैं.

डीलर ने बताया कि हेसातु और नईहारा के 64 गैर राशन कार्डधारी परिवारों की लिस्ट प्रखंड विकास पदाधिकारी को सौंपी थी, लेकिन अभी तक उनके लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है.

 जांच टीम को सहिया ने कहा- भूखे रहने की वजह से निमानी अचानक गिर पड़ी

 आंगनबाड़ी सहिया ने विस्तार से इसकी पुष्टि की. उन्होंने कहा कि 16 मई को दोपहर में सूबेदार भुइयां उनके घर आये थे. और बताया कि निमानी भूखे रहने की वजह से अचानक से गिर पड़ी थी. उसने कहा कि निमानी ने तीन दिनों से खाना नहीं खाया था.

सेविका ने उनलोगों को स्वास्थ्य केंद्र जाने का सुझाव दिया था. जब तक उनसे मिलने पहुंची, निमानी जीवित नहीं थी. जांच दल में पचाठी सिंह, दिलीप रजक और ज्यां द्रेज थे.

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