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रांची का ऐसा परिवार जिसके हर सदस्य को वाजपेयी ने दिया है नाम

अटल जी करेंगे परिवार के लोगों का नामकरण यह बनी परंपरा

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Ranchi : शहर के निवारणपुर स्थित अमरावती कॉलोनी में रहने वाले स्वर्गीय प्रह्लाद राय का परिवार एक ऐसा परिवार है जिसके हर सदस्य का नाम और किसी ने नहीं बल्कि दिवंगत भारत रत्न से सम्मानित अटल बिहारी वाजपेयी ने रखा है. जब भी इस परिवार में किसी भी व्यक्ति का जन्म हुआ, स्वर्गीय प्रह्लाद राय ने तुरंत ही इसकी जानकारी वाजपेयी को पत्र के माध्यम से दी. बाद में वाजपेयी ने अपने जवाब में परिवार के उस सदस्य का नामकरण किया. ऐसे में अटल जी के निधन की खबर से पूरा परिवार काफी मर्माहत और शोकाकुल है. यह बात किसी और ने नहीं बल्कि खुद स्वर्गीय प्रह्लाद राय के पुत्र रवि भट्ट ने न्यूज विंग को बतायी. उन्होंने अपने पिताजी और वाजपेयी के हुए मुलाकात के कुछ लम्हों को न्यूज विंग के संवाददाता से साझा किया. उन्होंने बताया कि उनके परिवार के सभी सदस्यों का नामकरण स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी ने ही किया था.

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कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं फिर भी था लगाव

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बातचीत में रवि भट्ट ने बताया कि उनके पिताजी भारतीय रेलवे में काम करते थे. इसके बावजूद उनका अटल जी के साथ एक बेहद करीब लगाव रहा था. दरअसल इसके पीछे पिताजी की कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं, बल्कि एक आत्मीय लगाव था. चूंकि पिताजी भारतीय मजदूर संघ से जुड़े हुए थे, साथ ही संघ के नेशनल एग्जीक्यूटिव कमिटी के सदस्य रहे थे. इस कारण अटल जी के साथ पिताजी की मुलाकात कई बार होती रही. प्रधानमंत्री बनने के पहले जब भी अटल जी रांची आते, पिताजी से उनकी मुलाकात जरूर होती थी. उन्होंने कहा कि स्वर्गीय वाजपेयी और मेरे पिताजी के बीच की दोस्ती काफी घनिष्ट थी. पत्रों के जरिये ही दोनों के बीच भावनाओं का आदान-प्रदान होता रहता था. त्योहार हो या फिर परिवार का कोई खास आयोजन, अटल जी का बधाई संदेश पिताजी को जरूर प्राप्त होता था.

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अटल जी  करेंगे परिवार के लोगों का नामकरण यह बनी परंपरा

उन्होंने कहा कि उनके घर में जब भी किसी बच्चे का जन्म हुआ, उसका नामकरण अटल जी ने ही किया. बच्चे के जन्म होने के तुरंत बाद पिताजी अटल जी को एक पत्र लिख कर जानकारी देते, और कहते कि संबंधित तारीख को उनके घर पर पोता या पोती हुई है, तो कृपया कर आप ही नामकरण करें. बाद में अटल जी पिताजी को पत्र के माध्यम से नाम बताते थे. जिसके बाद पिताजी परिवार के बच्चों का नाम रखा करते थे. बाद में यही हमारे परिवार की एक परंपरा बन गयी. उन्होंने बताया कि परिवार के लिए इससे बड़ी बात और क्या हो सकती थी कि खुद अपने हाथों से अटल जी पिताजी को पत्र लिखते थे.

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अटल जी के व्यक्तित्व से प्रभावित थे पिताजी

रवि भट्ट ने बताया कि अटल जी के व्यक्तित्व से उनके पिताजी काफी प्रभावित थे. वे हमेशा कहा करते थे कि “अगर भविष्य में कभी भी राजनीति या सामाजिक क्षेत्र में जाना हो, तो अटल जी का ही अनुसरण करना. अटल जी जैसे हैं वैसा ही बनने का प्रयास करना”. हालांकि पिताजी यह भी कहते थे कि अटल जी जैसा बनना तो काफी मुश्किल है, लेकिन अगर अटल जी के बताये नक्शे-कदम पर ही चला जाए वही  काफी है.

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अटल जी के राजनीति विरासत से सीखे लोग

अटल जी के निधन से काफी विचलित हुए रवि भट्ट ने कहा कि जो भी राजनीतिक विरासत वाजपेयी जी देश के समक्ष छोड़कर गये हैं, उससे हमें काफी कुछ सीखना चाहिए. उनका व्यक्तित्व ऐसा था कि सत्ता पक्ष या विपक्ष, देशी नागरिक हो या विदेशी, सभी उनका सम्मान करते थे. रवि भट्ट के मुताबिक उनके पिता कहा करते थे कि राजनीतिक और सामाजिक जीवन में अटल बिहारी वाजपेयी के आदर्शों पर चलना और उनकी किताबें जरूर पढ़ना. स्वयं वे अपने पिता को अंतिम दिनों में अटल जी की कविताएं और किताबें पढ़कर सुनाया करते थे. इससे उनके पिता को बड़ी शांति मिलती थी.

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अस्वस्थ्य होने के बाद भी अटल जी ने किया इशारा

अटल जी के साथ हुए मुलाकात का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड भाजपा की प्रभारी रही अटल जी की भतीजी करुणा शुक्ला के साथ वे करीब तीन साल पहले दिल्ली गये थे. इस दौरान उनका वाजपेयी के घर जाना हुआ. हालांकि वाजपेयी जी उस वक्त अस्वस्थ थे. यहां तक की डॉक्टर ने उनके साथ फोटो लेने से भी मना कर दिया था. जब उन्होंने अटल जी को प्रणाम किया, तो अटल जी ने आंखो से हल्का इशारा कर उन्हें आशीर्वाद दिया. अटल जी के साथ उनकी यह अंतिम मुलाकात थी.

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