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सामाजिक सुरक्षा योजना से जुड़ेंगे ग्रामीण क्षेत्रों के परिवार, मानव तस्करी पर लगेगा अंकुश

प्रशासन लड़कियों की रेस्क्यू से आगे बढ़कर काम करेगा

Ranchi : मानव तस्करी के मामले में झारखंड सोर्स राज्यों में आता हैं. हर साल यहां से बड़ी संख्या में लड़कियों को मानव तस्कर दिल्ली, पंजाब, हरियाणा सहित अन्य राज्यों में ले जाते हैं. मानव तस्करी के क्षेत्र में काम करनेवाली संस्थाओं (बाल कल्याण संघ, एटसेक) का अनुमान है कि 12 प्रतिशत लड़कियां कभी घर नहीं लौट पाती. अभी तक सरकार और स्थानीय प्रशासन का ध्यान मानव तस्करों को पकड़ने और लड़कियों की रेस्क्यू पर होता था. अब एक नयी पहल की जा रही है. जिसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में ही परिवारों को सामाजिक सुरक्षा और रोजगार स्कीमों से जोड़ा जायेगा. इससे क्षेत्र में ही रोजगार मिलेगा. परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरेगी तो लड़कियों को बाहर काम पर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

परिवारों का होगा सर्वे, योजनाओं से जोड़ा जायेगा

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के निर्देश पर झारखंड के दो जिलों खूंटी और दुमका को गत 15 अक्तूबर को एक पायलट प्रोजेक्ट से जोड़ा गया है. इसके तहत खूंटी के मुरहू तोरपा और दुमका के काठीकुंड सहित एक अन्य क्षेत्र में ग्रामीणों को सरकार की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ा जायेगा. बाल कल्याण संघ के सचिव संजय मिश्रा ने कहा कि इन क्षेत्रों में परिवारों का सर्वे कर उनकी आर्थिक और सामाजिक हालात क जानकारी ही जायेगी. इसके बाद यह देखा जायेगा कि उस परिवार को सरकार की किस तरह की स्कीम से जोड़ा जा सकता है. इसके बाद उस परिवार को उन स्कीमों से जोड़कर उनका आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण पर ध्यान दिया जायेगा.

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राज्य में 35 तरह की योजनाएं चल रही हैं

संजय मिक्षा ने कहा कि राज्य मं 35 तरह की सामाजिक सुरक्षा स्कीम चल रही हैं. इनमें सुकन्या समृद्धि योजना, कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय योजना, तेजस्विनी योजना, नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिनियम, नि:शुल्क मध्याह्न योजना, स्पांसरशिप एंड फोस्टर केयर योजना, छात्रवृति योजना, झारखंड असंगठित सामाजिक सुरक्षा कर्मकार योजना, मनरेगा, मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना, उज्जवला योजना, राशन कार्ड, प्रधानमत्री वन धन योजना आदि शामिल है. इसके अलावा रोजगार से संबंधित कई और योजनाएं भी है. इनसे ग्रामीण परिवारों को जोड़ने पर उनकी आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों में सुधार लाया जा सकता है.

असम में भी चल रही है योजना

संजय मिश्रा ने कहा कि अगर यह पायलट प्रोजेक्ट झारखंड के अलावा असम में भी चलाया जा रहा है. अगर यह सफह रहता है तो पूरे देश में इसे लागू किया जायेगा. उन्होंने कहा कि पिछले दिनों राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की बैठक में मानव तस्करी की घटनाओं पर काफी चिंता प्रकट की गयी थी. बैठक में कहा गया था कि कोरोना काल में भी मानव तस्करी की घटनाएं हो रही है. कहा गया कि मानव तस्करी पर अंकुश तभी लगेगी जब परिवारों को उनके क्षेत्र में ही रोजगार मिले और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध हो.

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