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फेक न्यूज रोकने की कवायद, सोशल नेटवर्किंग कंपनियों की बढ़ सकती है जवाबदेही

यूजर्स से ज्यादा कंपनियों की जिम्मेदारी

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NW Desk: WhatsApp, Facebook जैसे सोशल मीडिया की जवाबदेही आने वाले दिनों में बढ़ सकती है. दरअसल, सोशल नेटवर्किंग साइट के जरिये फैलने वाली फर्जी खबरों से निपटने के लिए सरकार जल्द ही इन कंपनियों की जवाबदेही बढ़ा सकती है. सरकार की दलील है कि सोशल मीडिया पर फैलने वाली फर्जी खबरों पर व्हाट्सएप, फेसबुक कंपनियों की जवाबदेही यूजर्स से ज्यादा है.

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इकनॉमिक्स टाइम्स से बात करते हुए टेलिकॉम सेक्रेटरी अरुणा सुंदराजन ने बताया कि वो जिस कमिटी का हिस्सा है. वो कुछ मुख्य पहलुओं पर ध्यान दे रही है. जिनमें से एक है, सोशल मीडिया पर फैलने वाली फेक न्यूज के लिए जवाबदेही को उपभोक्ता से कंपनी की ओर शिफ्ट करना.

यह कदम सरकार के उन प्रयासों का हिस्सा है जिनसे सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स को और अधिक विश्वसनीय बनाया जा सके. कई बार होता है कि यूजर्स अनजानें में फर्जी खबर को रीट्वीट या फॉरवर्ड कर देते हैं. भारत में मौजूद हर बड़े सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म की भारत सरकार के प्रति जवाबदेही बनती है.

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Whatsapp पर बढ़ेगा दबाव !

खबर है कि सरकार एक बार फिर व्हाट्सएप से उस तकनीक को विकसित करने की मांग कर सकती है, जिससे फेक न्यूज के सोर्स का पता लगाया जा सके. हालांकि पिछली बार व्हाट्सएप ने प्रिवेसी पॉलिसी का हवाला देकर इस मांग को ठुकरा दिया था. मिली जानकारी के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय व्हाट्सएप को एक और आधिकारिक पत्र भेजने की तैयारी में है.

टेलिकॉम सेक्रेटरी ने कहा कि यह कंपनियों की जिम्मेदारी है कि अपने माध्यम पर फैलने वाली फेक खबरों, चाइल्ड पॉर्नोग्रफी और साइबर बुलिंग को रोकने के लिए उचित कदम उठाए.

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उल्लेखनीय है कि सोशल साइट्स के जरिए फैलने वाले फर्जी खबरों को लेकर सरकार ने पहले भी सख्ती दिखाई है. वही सरकार की सख्ती को देखते हुए व्हाट्सएप ने अपनी पॉलिसी में कई बदलाव भी किए थे.

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