Ranchi

लोहरदगा और धनबाद में झोला छाप डॉक्टरों के खिलाफ अबतक नहीं हो पाया है टास्क फोर्स का गठन

जनवरी माह में विभाग ने दिया था आदेश, कुछ जिलों में की जा रही है कार्रवाई

लोहरदगा सदर अस्पताल में 83 स्वीकृत पद, कार्यरत मात्र 23

स्वास्थ्य विभाग की स्वास्थ्य रैंकिंग में लोहरदगा को मिला चुका है पहला स्थान

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Ranchi: जनवरी माह में स्वास्थ्य विभाग की ओर से झोला छाप डॉक्टरों पर कार्रवाई करने के लिये सिविल सर्जन को टास्क फोर्स गठित करने का आदेश दिया गया.

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विभाग की ओर से आदेश जारी किये छह माह हो चुके हैं, इसके बाद भी लोहरदगा और धनबाद में टास्क फोर्स का गठन नहीं किया गया.

इसकी जानकारी लोहरदगा और धनबाद के सिविल सर्जन से हुई. लोहरदगा सिविल सर्जन ने जानकारी दी कि अस्पताल में डॉक्टरों की काफी कमी है.

ऐसे में टास्क फोर्स गठित नहीं हो पा रहा है. बता दें कि विगत दिनों स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्वास्थ्य रैंकिंग जारी की गयी थी. जिसमें लोहरदगा जिला को प्रथम स्थान मिला.

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इस रैंकिंग के विभिन्न मानकों में मैनपावर भी था. जिस समय स्वास्थ्य विभाग की ओर से यह रैंकिंग जारी की गयी थी, उस वक्त लोहरदगा सदर अस्पताल में छह डॉक्टर थे. सिविल सर्जन ने मरीजों के इलाज में परेशानी की बात कहीं.

लोहरदगा के अस्पतालों में 50 डॉक्टरों की कमी

इस संबध में लोहरदगा सिविल सर्जन से बात करने से जानकारी हुई कि लोहरदगा सदर अस्पताल में मात्र 23 डॉक्टर हैं. जबकि इस अस्पताल के लिये डॉक्टरों के स्वीकृत पद 83 है.

सिविल सर्जन डॉक्टर विजय कुमार ने जानकारी दी कि इन अस्पताल में 50 डॉक्टरों के पद खाली है. जबकि यहां कार्यक्रम प्रबंधक भी नहीं है.

ऐसे में टास्क फोर्स का गठन करना बहुत मुश्किल है. जबकि यहां ओपीडी में प्रतिदिन कम से कम दो सौ लोग आते हैं. वहीं एक सौ बेड वाला यह अस्पताल है.

डॉ विजय ने जानकारी दी की मरीजों का इलाज करना अस्पताल में मुश्किल है, ऐसे में टास्क फोर्स कैसे गठित करें. उन्होंने कहा कि सावन के कारण कुछ डॉक्टरों की नियुक्ति देवघर में की गयी है, जिसके बाद टास्क फोर्स गठित किया जायेगा.

धनबाद में अब हो रही बैठकें

धनबाद सिविल सर्जन डॉ गोपाल दास से जानकारी हुई कि विगत दिनों अस्पताल में टास्क फोर्स गठित करने के लिये बैठक की गयी. उन्होंने जानकारी दी कि पहले धनबाद में दूसरे डॉक्टर सिविल सर्जन पद में थे. उन्होंने क्यों टास्क फोर्स का गठन नहीं किया इस संबध में जानकारी नहीं है.

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लेकिन अब कोशिश की जा रही है कि जल्द-से-जल्द टास्क फोर्स का गठन कर, झोला छाप डॉक्टरों पर कार्रवाई की जायें.

इन जिलों में झोला छाप डॉक्टरों पर की जा रही कार्रवाई

गढ़वा के सिविल सर्जन डॉ एनके रजक ने जानकारी दी कि टास्क फोर्स गठित है. अब तक पांच झोला छाप डॉक्टरों पर कार्रवाई की गयी.

जिसमें से एक जेल में है और एक पर पांच हजार फाइन लगाया गया है. खूंटी के भी विभिन्न ब्लॉक मेडिकल ऑफिसरों से जानकारी हुई कि ब्लॉक वार छापेमारी जारी है.

सिर्फ खूंटी ब्लॉक में तीन डॉक्टरों पर कार्रवाई की गयी. वहीं रांची, चतरा, पाकुड़ में टास्क फोर्स का गठन पूर्व में ही किया जा चुका है. वहीं पलामू सिविल सर्जन ने जानकारी दी कि जिला में टास्क फोर्स का गठन किया जा चुका है लेकिन एक भी छापेमारी नहीं की गयी.

अन्य सिविल सर्जनों से बात नहीं हो पायी. जिला वेबसाइटों में सिविल सर्जन के नाम और नंबर अपडेट नहीं होने के कारण. वहीं तबादला के कारण भी जानकारी नहीं मिल पायी.

विभाग की ओर से जारी पत्र में सिविल सर्जन को आदेश दिया गया था कि जिलों में खुलेआम झोला छाप डॉक्टर प्रैक्टिस कर रहे है. ऐसे में इन डॉक्टरों के प्रैक्टिस में रोक लगाने के लिये सिविल सर्जन डॉक्टर्स की टीम के साथ टास्क फोर्स का गठन किया जाना है.

टास्क फोर्स की ओर से इन झोला छाप डॉक्टरों पर कार्रवाई कर रिर्पोट स्वास्थ्य विभाग को देनी थी. लेकिन दोनों जिलों में टास्क फोर्स का गठन नहीं किया गया.

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