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सीएस आवास में विस्फोटक बरामदगी मामला : निजी क्लीनिक का संचालक निकला मास्टरमाइंड

 डॉक्टर ने सीएस को बदनाम करने की रची थी साजिश

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Giridih : गिरिडीह सिविल सर्जन डॉ रामरेखा प्रसाद के निजी आवास में पिछले दिनों विस्फोटक की बरामदगी मामले का उद्भेदन गिरिडीह पुलिस ने कर लिया है. गिरिडीह एसपी सुरेन्द्र कुमार झा ने रविवार को प्रेस वार्ता में इसकी जानकारी दी. इस पूरे मामले में मुख्य साजिशकर्ता के रूप में शहर के एक स्थानीय क्लीनिक के संचालक डॉ बर्नवास हेम्ब्रम का नाम सामने आया है. इस साजिश को अमलीजामा पहनाने में सहयोग करने वाले दो दोषियों जितेन्द्र तांती और ऋषभ जैन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है.

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डॉक्टर ने 60 हजार रुपये में की थी डील

एसपी सुरेन्द्र कुमार झा ने बताया कि सीएस डॉ रामरेखा प्रसाद ने अपने आवास में विस्फोटक मिलने के बाद इसे फंसाने की साजिश बताते हुए थाने में शिकायत दर्ज की थी. उसी आधार पर पुलिस ने अनुसंधान को आगे बढ़ाते हुए छानबीन की और जांच के बाद इस मामले का उद्भेन किया गया. उन्होंने बताया कि पिछले 9 अगस्त को जिस दो मोबाइल नंबर से एसडीएम के पास सीएस आवास में विस्फोटक होने की सूचना आई थी, उसे ट्रेस करने पर मालूम चला कि उक्त नंबर स्थानीय दर्जी मुहल्ला के अरमान अंसारी और महेशलुंडी के राजेश रजक के नाम से दर्ज है.

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उनसे पूछताछ पर उन्होंने बताया कि उक्त नंबर का सिम उनके पास नहीं है. लेकिन वे सिम खरीदने बस स्टेण्ड में सिम बेचने वाले ऋषभ जैन और राजा के पास गए थे. अनुसंधान से पता चला कि उक्त सिम कार्ड ऋषभ जैन ने ही निर्गत किए थे. ऋषभ ने पुलिस को बताया कि उसने धोखे से अरमान और राजेश के आईडी पर दो सिम ले लिया और उसे 200 रुपये में जितेन्द्र तांती को बेच दिया. ऋषभ के बयान पर जितेन्द्र तांती को पकड़ा गया.

जितेन्द्र ने अपना गुनाह स्वीकार करते हुए पुलिस को बताया कि उसने ऋषभ से सिम लिया और डॉ बर्नवास हेम्ब्रम के कहने पर अपने दोस्त हमीद उर्फ छोटू और एक साथी के साथ मिलकर सिविल सर्जन के निजी आवास में डेटोनेटर रख दिया. जितेन्द्र ने पुलिस को यह भी बताया कि इस काम के लिए डॉ बर्नवास हेम्ब्रम ने उसे अलग-अलग किश्तों में कुल 60 हजार रुपये दिए हैं. उसने पुलिस को बताया कि पूछने पर डॉ हेम्ब्रम ने बताया कि सिविल सर्जन उन्हें क्लीनिक नहीं चलाने देते हैं. हमेशा तंग करते हैं और हर माह एक लाख रुपए रिश्वत की मांग करते हैं. इसी कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ रहा है, ताकि सीएस केस में फंसकर गिरिडीह छोड़कर भाग जाए.

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