न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

किस नियम के तहत किया गया निगम का विस्तार, निगम के अधिकारियों के पास नहीं है इसका जवाब

2,337
  • राज्य सूचना आयोग ने रांची नगर निगम से मांगा स्पष्टीकरण, स्पष्टीकरण नहीं देने पर हो सकता है जुर्माना
  • किस कानून के तहत अवैध मकानों को नियमित किया गया, इसका भी ठोस जवाब नहीं

Pravin kumar/ chhaya

Ranchi: रांची नगर निगम के अफसरों को कानून की भी जानकारी नहीं है. 2016 से सूचना के अधिकार के तहत रांची नगर निगम से पूछा गया कि किस कानून के तहत नगर निगम का विस्तार किया गया. जबकि संविधान के 74वें संशोधन के बाद नगर पंचायतों पर संविधान के अनुच्छेद 243 जेडसी के तहत अनुसूचित क्षेत्रों में नगर पंचायत और निगम के गठन पर संवैधानिक रोक है. कानून के जानकारों का मनना है कि नगरपालिका, नगर निगम और नगर परिषद के कार्य के विस्तार के लिए संसद में किसी प्रकार का कानून नहीं बनाया गया है. इसलिए पांचवीं अनुसूची वाले इलाकों में नगरपालिका, नगर निगम और नगर परिषद का चुनाव करना पूरी तरह असंवैधानिक है. दूसरी ओर पंचायतों के गठन संसद को अनुच्छेद 243 जेडसी के भाग तीन के तहत इसका विस्तार अपवादों और उपांतरणों के तहत करेगा. निगम से यह पूछा गया कि क्या संसद ने इसका विस्तार अनुसूचित क्षेत्र में किया है, इस सवाल का जवाब निगम के अफसरों के पास नहीं है.

इसे भी पढ़ेंः राफेल मामले में पुनर्विचार याचिकाओं के साथ दाखिल दस्तावेज राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये संवेदनशील : केंद्र

रांची नगर निगम को आवासों की संख्या का भी पता नहीं

रांची नगर निगम को शहर में आवासों की संख्या का भी पता नहीं है. निगम ने अब तक मकानों के साथ व्यवसायिक मकानों व रैयतों की सेल डीड अब तक उपलब्ध नहीं करा सका है. निगम अधिकारियों पर भ्रामक सूचना देने का भी आरोप है. अपीलकर्ता की ओर से 7.8.2016 को सूचना मांगी गयी थी. निगम को विभिन्न शाखाओं से 21.12.2016 को सूचना प्राप्त हो गयी थी. लेकिन इसके बावजूद निगम ने छह माह विलंब से  18.5.2017 को अपीलकर्ता को सूचना उपलब्ध करायी. इसमें भी किसी भी सवाल का ठोस जवाब नहीं दिया. इस संबध में राज्य सूचना आयोग ने निगम से स्पष्टीकरण मांगा है.

इसे भी पढ़ेंः वकील खान हत्याकांडः 12 नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी

कौन सी सूचनाएं मांगी गयी थीं

  • संसद की ओर से नगर निगम का विस्तार अनुसूचित क्षेत्रों किया गया है, तो इससे संबंधित कागजात उपलब्ध करारयें?
  • रांची नगर निगम के अंदर कितने आवास हैं, इसकी सूची तथा कितने व्यवसायिक मकान हैं, इसकी सूची रैयतों के साथ और सेल डीड के साथ उपलब्ध करायें?
  • रांची नगर निगम के अंतर्गत कितने गांव हैं, कितनी कॉलोनी हैं. इसका नामकरण राज्य गठन के पूर्व के किया गया या 2000 के बाद किया गया?
  • नगर निगम का मामला उच्च न्यायालय में लंबित है और किस कानून के तहत अवैध मकानों को नगर निगम किस कानून के तहत नियमित कर रहा है?
  • रांची नगर निगम की आबादी साल 2000 में कितनी थी और साल 2017 में कितनी है?
  • रांची नगर निमग क्षेत्र में कितनी एकड़ जमीन आदिवासियों की है. और कितने पर मकान बनें है और मकान बनाने वाले की सूची उपलब्ध करायी जाई?
  • कितनी गैर जनजाति अनुसूचित जनजाति की जमीन पर मकान बनाकर रह रहे हैं, उसकी सूची उपलब्ध करायें?
  • रांची नगर निगम के अंदर कितने तालाब थे, कितनी नदियां थीं, उसकी सूची प्लॉट नंबर के साथ उपलब्ध करायें?
  • रांची नगर निगम संविधान के किस अनुसूची के तहत मास्टर प्लान 2037 में 184 गांव की जमीन को अधिग्रहण करने का प्रस्ताव किया है. क्या जमीन पर नियंत्रण अनुसूचित क्षेत्रों पर नगर निगम का है और संविधान के किस अनुच्छेद के तहत है?

जानिये नगर निगम ने क्या दिया जवाब

जवाब देने के बजाये नगर निगम ने गेंदर नगर विकास विभाग के पाले में डाल दिया. पहले और दूसरे सवाल के जवाब में कहा कि यह सवाल नगर विकास एवं आवास विभाग, झारखंड से संबधित नहीं है. तीसरे सवाल का जवाब दिया कि संविधान की धारा 243 एवं झारखंड नगरपालिका अधिनियम 2011 में निहित प्रावधान के आलोक में नगर निगम का गठन किया गया है. चौथे और पांचवें सवाल के जवाब में कहा कि यह मामला भी नगर विकास और आवास से संबंधित नहीं है. छठे सवाल का जवाब दिया कि इसकी सूची उपलब्ध करायी जा रही है. रांची नगर निगम के अंदर कितने तालाब थे, कितनी नदियां थी, उसका प्लांट नंबर उपलब्ध कराने के जवाब में कहा कि यह मामला भी नगर विकास विभाग से संबंधित नहीं है.

क्या कहते हैं आरटीआई कार्यकर्ता प्रभाकर कजूर

आरटीआई कार्यकर्ता प्रभाकर कुजूर के अनुसार रांची नगर निगम सूचना देने में कोताही बरत रहा है. आदिवासी विषय से जुड़ा मामला होने के कारण निगम के अफसर सूचनाएं उपलब्ध नहीं करा रहे हैं. निगम क्षेत्र में आदिवासियों का विकास नहीं विनाश हो रहा है. अनुसूचित क्षेत्र में आदिवासियों की जमीन को संरक्षण दिया गया है. वहीं नगर निगम आदिवासी जमीन को असंवैधानिक तरीके से हस्तांतरण कर रहा है. श्री कुजूर ने रांची नगर निगम से उपरोक्त सवालों को लेकर 7 अगस्त 2017 को जन सूचना पदाधिकारी से सूचना की मांग की थी. परंतु निगम के द्वारा जवाब के रूप में भ्रमण सूचना दी गयी. आयोग के द्वारा 12 अप्रैल 2019 को मामले पर अगली सुनवाई की बात कही गयी.

इसे भी पढ़ेंः राफेल मामले में पुनर्विचार याचिकाओं के साथ दाखिल दस्तावेज राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये संवेदनशील : केंद्र

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Comments are closed.

%d bloggers like this: