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उपनिवेशवाद की मानसिकता से बाहर निकलें, गुड मॉर्निंग नहीं, नमस्कार बोलिए : उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा कि भारत को उपनिवेशवाद की मानसिकता से बाहर निकलना चाहिए और गुड मॉर्निंग, गुड आफ्टरनून और गुड इवनिंग के स्थान पर नमस्कार कहना चाहिए.

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 NewDelhi :  उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा कि भारत को उपनिवेशवाद की मानसिकता से बाहर निकलना चाहिए और गुड मॉर्निंग, गुड आफ्टरनून और गुड इवनिंग के स्थान पर नमस्कार कहना चाहिए. उपराष्ट्रपति शुक्रवार को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) के दीक्षांत समारोह में बोल रहे थे. इस क्रम में श्री नायडू ने देशभक्ति, धर्म, अंग्रेजी भाषा पर अपनी बात रखी. खुद को देशभक्त घोषित करने वालों को नसीहत देते हुए वेंकैया नायडू  ने कहा कि यदि कोई धर्म, क्षेत्र या भाषा के आधार पर भेदभाव करता है,  तो केवल भारतमाता की तस्वीरें लेकर वह देशभक्त नहीं बन सकता. देशभक्ति का मतलब केवल यह नहीं है कि भारतमाता की  तस्वीर ले लें और दूसरों के साथ दुर्व्यवहार करें.

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 अलग-अलग जाति, संप्रदाय, धर्म और क्षेत्र के बावजूद भारत एक है

नायडू ने कहा कि यह भारत की विशेषता है. अलग-अलग जाति, संप्रदाय, लिंग, धर्म और क्षेत्र के बावजूद भारत एक है. एक राष्ट्र, एक लोग, एक देश.. यह सोच आप सभी की होना चाहिए. यही देशभक्ति है. साथ ही कहा कि वह अंग्रेजी भाषा के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन भारत को अंग्रेजी उपनिवेशवादी शासन की मानसिकता से बाहर निकलना चाहिए. उन्होंने कहा कि नमस्कार भारत में हमारा संस्कार है. यह सुबह, शाम और रात में भी उचित है. उपराष्ट्रपति ने इस बात की जिक्र किया कि हाल ही में अंग्रेजी को एक बीमारी कहने के बाद मीडिया के एक वर्ग ने उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया था, जबकि वे मातृभाषा की रक्षा और प्रसार के बारे में समझा रहे थे

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अंग्रेज चले गये, उनकी मानसिकता रह गयी 

इस क्रम में उपराष्ट्रपति ने कहा कि मैंने ऐसा नहीं कहा था. अंग्रेजी एक बीमारी नहीं है. अंग्रेजी का स्वागत है. आप इससे सीखते हैं, लेकिन अंग्रेजी दिमाग जो हमें ब्रिटिश शासन द्वारा  परंपरागत रूप से मिला है, वह बीमारी है. अंग्रेज चले गये, उनकी मानसिकता बनी हुई है.   

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