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2018 तक 24 घंटे बिजली देने के वादे की निकल चुकी हवा, अब किसानों को निर्बाध बिजली देने की घोषणा

सीएम ने कहा था- 2018 तक 24 घंटे बिजली नहीं दे पाया, तो वोट मांगने नहीं आऊंगा 

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Ranchi: राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने दावा किया है कि एक अप्रैल से सरकार किसानों को निर्बाध बिजली देगी. इससे पहले भी सीएम रघुवर दास पूरे राज्य को 24 घंटे निर्बाध बिजली देने की बात कर चुके हैं. उन्होंने कहा था कि दिसंबर 2018 तक पूरे राज्य में निर्बाध बिजली मयस्सर होने लगेगी.

30 अगस्त 2017 को मुख्यमंत्री रघुवर दास ने गढ़वा जिले में 178 करोड़ की विद्युत ग्रिड सब स्टेशन का शिलान्यास किया था. तब मुख्यमंत्री ने एलान किया था कि 2018 तक राज्य के सभी 32 हजार गांवों के हर घर तक न सिर्फ बिजली पहुंचायी जायेगी, बल्कि सातों दिन 24 घंटे बिजली आपूर्ति भी की जायेगी. रघुवर दास ने दावा किया कि यदि ऐसा नहीं कर पाये, तो वे 2019 के चुनाव में जनता से वोट मांगने नहीं जायेंगे.

केंद्र के लक्ष्य से पहले बिजली पहुंचाने का दावा 

मुख्यमंत्री के इस दावे की भी हवा निकल गयी है. अब किसानों को निर्बाध बिजली देने का वादा भी कुछ ऐसा ही लगता है. इसके लिए किसानों को अलग कृषि फीडर बनाकर छह घंटे निर्बाध बिजली देने की बात कही गयी है. जबकि केंद्र सरकार ने दिसंबर 2019 तक किसानों को बिजली पहुंचाने का लक्ष्य रखा है. लेकिन, रघुवर सरकार केंद्र से एक कदम आगे चलते हुए अप्रैल में ही किसानों तक बिजली पहुंचाने का दावा कर रही है.

उत्पादन में सुधार नहीं 

एक ओर राज्य सरकार किसानों को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने की बात करती है. लेकिन, राजधानी रांची में ही मुश्किल से 6 से 8 घंटे ही बिजली मिल पाती है. झारखंड के बाकी जिलों का हाल तो इससे भी बुरी है. साथ ही हाल के दिनों में यहां बिजली उत्पादन में भारी गिरावट आयी है. रघुवर शासन में 2014 से ही सरकार बिजली की स्थिति को सुधारने के बड़े-बड़े दावे किये गये. लेकिन इस दिशा में सुधार होने की बजाय स्थिति और बिगड़ती ही गयी है. इसकी मुख्य वजह राज्य की बिजली उत्पादक इकाई टीटीपीएस की एक यूनिट का पूरी तरह ठप्प होना है. इससे झारखंड को लगभग 200 मेगावाट प्रतिदिन बिजली की कमी हो रही है. टीवीएनएल की दोनों यूनिट की भी हालत ठीक नहीं है. टीवीएनएल के अलावा पतरातू थर्मल पावर स्टेशन से महज 80 मेगावाट बिजली मिलती है. झारखंड को प्रतिदिन लगभग 900-950 मेगावाट बिजली चाहिये. लेकिन फिलहाल कुल मिलाकर 550 मेगावाट ही बिजली उत्पादित हो रहा है. इससे पूरे राज्य में बिजली की लचर व्यवस्था बनी हुई है.

कृषि फीडर की रफ्तार धीमी

किसानों की जिंदगी में खुशहाली लाने के लिए केंद्र सरकार ने कृषि फीडर स्थापित करने का कार्य आरंभ किया है. लेकिन झारखंड में इसकी रफ्तार धीमी है. अबतक धनबाद, हजारीबाग, रामगढ़, रांची सहित अन्य जिलों में इसकी शुरुआत हुई है. लेकिन यहां भी इसकी स्थिति ठीक नहीं है.

केंद्र सरकार द्वारा किसानों को डीजल पंप सेट से मुक्ति दिलाने के लिए यह पहल की गयी है. केंद्र सरकार ने इसे पूरा करने के लिए दिसबंर 2019 तक का लक्ष्य निर्धारित किया है. लेकिन, रघुवर दास अप्रैल माह में ही किसानों तक निर्बाध बिजली पहुंचाने का दावा कर रही है. मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी हाल ही में घोषणा की थी कि एग्रीकल्चर फीडर से राज्य के किसानों को औसतन छह घंटे बिजली प्रति दिन उपलब्ध करायी जायेगी.

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