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भयादोहन बंद करे उत्पाद विभाग, नहीं तो होंगी और आत्महत्यायें : शराब विक्रेता संघ

Ranchi: किरीबुरू में शराब दुकान के लाइसेंसधारी की आत्महत्या के बाद झारखंड खुदरा शराब विक्रेता संघ ने उत्पाद आयुक्त को पत्र लिखा है.

पत्र में कहा है कि लाइसेंसधारी शराब विक्रेताओं की समस्याओं का निराकरण नहीं किया जा रहा है, उन पर ध्यान ही नहीं दिया जा रहा है.

आलम यह है कि अब लाइसेंसधारी शराब विक्रेता आर्थिक मंदी से जुझने लगे हैं. यही वजह है कि अब लाइसेंसधारी आत्महत्या तक करने को मजबूर हो रहे हैं.

झारखंड खुदरा शराब विक्रेता संघ ने कहा है कि विभाग की ओर से झारखंड उत्पाद खुदरा बिक्री 2018 नियमावली को सही तरीके से लागू नहीं किया जा रहा है.

संघ की ओर से उत्पाद आयुक्त को कई बिंदुओं से अवगत कराया गया है. ये हैं मुख्य बिंदु :

  • लॉटरी के समय विभाग के द्वारा यह बताया गया था कि लॉटरी के पश्चात एक सप्ताह के अंदर और सफल आवेदक के द्वारा जमा की गयी राशि उनके खाते में लौटा दी जायेगी परंतु प्रथम लॉटरी के 10 महीनों के बाद भी आज तक बहुत सारे अनुज्ञा धारियों को लॉटरी की राशि नहीं लौटायी गयी है. विभाग को बताना होगा कि किस मंशा के तहत आज तक लॉटरी की राशि लाइसेंस धारियों के खाते में नहीं लौटायी गयी है.

 

  • दूसरी तिमाही तक विभाग के नियमानुसार बहुत सारे 6% स्कंध का उठाव किया परंतु उसके वॉलेट से 8 दशमलव 33% की राशि काटी गयी जो आज तक वापस नहीं की गयी. विभाग को बताना होगा कि किस मंशा के तहत आज तक राशि लाइसेंस धारी के वॉलेट में नहीं लौटायी गयी है.

 

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  • सितंबर माह से झारखंड राज्य में सभी देसी निर्माण सरकार के आदेश से बंद कर दिये गये. उत्पाद विभाग की सफलता के कारण राज्य में अभी तक कोई भी निर्माण शाला चालू नहीं हो पायी जिस कारण विभाग पश्चिम बंगाल से आयात कर रही है. इसके कारण विगत 3 महीने से लाइसेंस धारियों को देसी शराब की आपूर्ति विभाग सुचारू रूप से नहीं कर पा रहा है. परंतु विभाग फिर भी पूरी राशिधारियों के वॉलेट से काट रहा है. यह राशि लाखों में है जिसके फलस्वरूप ज्यादातर लाइसेंसधारी आर्थिक बदहाली से गुजर रहे हैं.

 

  • देवघर जिले में श्रावणी मेले के क्षेत्र में पड़ने वाले सभी दुकानों को एक महीने के लिए बंद कर दिया गया और उसकी ड्यूटी कर को भी वॉलेट से काट लिया गया जो आज तक वापस नहीं किया गया. उत्पाद विभाग को बताना चाहिए कि अगर विभाग एक महीने के लिए बंद कर देता है तो लाखों की राशि अतिरिक्त भुगतान कैसे होगा. यह कहां तक न्याय संगत है.

 

  • एक भी दिन जमा करने में विलंब होता है तो विभाग 5% दर से आर्थिक दंड लगाता है. दुनिया के किसी भी समाज में किसी प्रकार की गलती के लिए इतना आर्थिक दंड नहीं है. अगर कोई लाइसेंस धारी किसी भी समस्या के कारण समय पर राशि जमा नहीं कर पा रहा है तो विभाग उसकी समस्या के निराकरण के बजाय 5% आर्थिक दंड देने को कहता है. विभाग की नीति व विभाग के द्वारा आर्थिक शोषण के कारण लाइसेंसधारी आत्महत्या कर सकते हैं.

 

  • लॉटरी निर्धारित नहीं थी. विभाग की नियमावली में संशोधन किया जा रहा है जिससे कोई भी काम करना नुकसान का व्यापार हो गया है. आज विभाग को भी पूरी जानकारी है कि देसी शराब को लागत मूल्य से बहुत कम दामों में विभाग के दबाव के कारण बेचने को विवश हैं. परंतु विभाग कोई भी सकारात्मक कदम नहीं उठा रहा है.

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