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पिछले 5 वर्षों में राजस्व जुटाने में फेल रहा उत्पाद विभाग

Ranchi: झारखंड का उत्पाद विभाग राजस्व संग्रहण में पिछले पांच वर्षों में तय टारगेट को भी पूरा नहीं कर पाया है. इसके कई कारण रहे हैं. एजी के मुताबिक उत्पाद विभाग ने कई बिंदुओं का अनुपालन ठीक से नहीं कराया. वर्ष 2014 से 2019 के बीच विभाग ने कई स्तरों पर लापरवाही बरती. खुदरा उत्पाद दुकानों का बंदोबस्ती नहीं होना, खुदरा विक्रेताओं द्वारा शराब का कम उठाव किया जाना, लाइसेंस धारकों को अनुचित वित्तीय लाभ और दूसरे कारणों के चलते विभाग को सैकड़ों करोड़ों का घाटा उठाना पड़ा है. एजी ने 1065 मामलों की जांच की जिसमें 104.44 करोड़ का घाटा सामने आया है.

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लगातार होते रहे हैं घाटे

एजी की रिपोर्ट के अनुसार खुदरा उत्पाद दुकानों की बंदोबस्ती से संबंधित 66 मामलों की जांच की गयी. इनमें से 61.30 करोड़ का घाटा सामने आया है. वहीं, खुदरा विक्रेताओं द्वारा शराब का कम उठाव के 521 मामलों की जांच एजी ने की, इसमें 23.62 करोड़, लाइसेंसधारकों को अनुचित वित्तीय लाभ दे दिया गया जिससे 6.32 करोड़ का घाटा हुआ. इसके अलावा 196 अन्य मामलों में 12.70 करोड़ घाटे का आंकड़ा पकड़ा.
सदन में सरकार ने कहा- 2013-14 के बाद विदेशी शराब और बीयर की खपत की औसत वार्षिक वृद्धि दर में कमी आयी है.

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उत्पाद विभाग में कम राजस्व उगाही को लेकर विधायक सरयू राय द्वारा पूछे गये सवाल पर विभाग ने कहा कि वर्ष 2009-10 में 927.87 करोड़ राजस्व उगाही हुई थी जो बढ़कर वर्ष 2019-20 में 2009.19 करोड़ हो गयी है. मदिरा की खपत वृद्धि ही वास्तविक वृद्धि मानी जाती है. हालांकि, विभाग ने भी माना है कि वित्तीय वर्ष 2013-14 के बाद देशी शराब, भारत निर्मित विदेशी शराब और बीयर की खपत की औसत वार्षिक वृद्धि दर में कमी आयी है. विभाग का कहना है कि जेएसबीसीएल द्वारा थोक व्यापार शुरू किये जाने के बाद बाजार आधारित सामान्य वृद्धि दर पर प्रतिकुल असर पड़ा है.

विभाग का कहना है कि वित्तीय वर्ष 2017-18 में जेएसबीसीएल द्वारा खुदरा व्यापार में प्रवेश किया गया. इसके बाद दो वर्षों में जेएसबीसीएल के जरिये खुदरा उत्पाद की दुकानें चलायी गयी. उन दो वर्षों में थोक और खुदरा व्यापार में आने से दोनों ही स्थिति में Sale By Volume में काफी हानि हुई है.

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