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मिसालः कोयलांचल के किसानों ने मेहनत की और बिछा दी आग पर हरियाली

Dhanbad:  देश की कोयला राजधानी झरिया, जहां की धरती पिछले कई वर्षों से आग उगल रही है. जिस धरती के नीचे कोयला जल रहा है, उस कोयला को बचाने और आग पर काबू पाने के लिए देश ही नहीं विदेश के कई वैज्ञानिकों ने काम किया पर सफल नहीं हो पाये. अब उसी आग पर झरिया के मेहनतकश किसानों ने हरयाली ला दी है.

लगभग 40 किसानो ने आग पर सिर्फ काबू ही नहीं पाया बल्कि उसे ठंडा रखने के लिए देशज तरीके भी इस्तेमाल किये. खेतों के चारों और गड्ढ़े खोदकर उसमें पानी बहाये जाने का तरीका निकाला.

खेतों को खोदकर उसमें बालू की भराई की और मिट्टी और खाद डाले गये. और फिर यहां सब्जियां उगायी जाने लगीं. आज यहां से उगायी गयी सब्जी धनबाद, बोकारो और गिरिडीह तक जाती है.

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 आग पर खेती का कैसे आया विचार

आज बुधन जिस आग की धरती पर खेती कर अपना और अपने घर वालों का पालन पोषण कर रहें हैं दरअसल उनके पूर्वज छपरा से यहां आये थे. नौकरी नहीं मिली तो वे निराश नहीं हुए. उन्हें पूरी झरिया को घूमकर देखा.

और पाया कि कई एकड़ जमीन जिसके नीचे आग है, खाली पड़ी हुई है. तब उनके मन में इस पर खेती करने का विचार आया. लोगों को जमा किया और जिस हद तक आग बुझा सकते थे, उसे बुझाया. उसे समतल किया और उसमें बालू और मिट्टी के लेयर भरे. कुछ महीनों में वे और उनकी टीम ने इस आग पर काबू पा लिया सबसे पहले यहां कद्दू की खेती की.

धीरे-धीरे उनकी तकनीक पर लोगों ने यकीन करना शुरू किया. फिर तो लोग आते गये और कारवां बनता गया वाली बात यहां चरितार्थ होने लगी. 40 एकड़ भूमिगत आग पर आज लोग खेती कर रहे हैं.

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