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हर बुखार नहीं होता वायरल फीवर, उचित जांच के बाद ही दवा का करें सेवन

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Ranchi: यह बहुत ही आम बात है कि किसी भी बुखार को डॉक्टर प्राय: वायरल फीवर बता कर मेडिसीन लिख देते हैं. मरीजो की सिर्फ डॉक्टर तक पहुंचने की देर होती है, डॉक्टर बिना जांच किये ही किसी भी तरह के बुखार को वायरल फीवर कहने में जरा भी देर नहीं लगाते. भले मरीज किसी डॉक्टर से अपनी बीमारी के बारे में जानने की कोशिश करें, लेकिन डॉक्टर सिर्फ वायरल फीवर के अलावा और कुछ नहीं बताते. सवाल यह उठता है कि यदि वाकई ऐसा है तो फिर डॉक्टर एंटीबायोटिक क्यों लिखते हैं? मेडिकल के जानकार यह बताते हैं कि ज्यादातर वायरल इंफेक्शन अपने आप ही ठीक हो जाते हैं. शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ एस कुमार ने इस विषय पर शोध किया है. उन्‍होंने बताया कि अधिकांश डॉक्टर स्वंय ही कन्फर्म नहीं होते हैं कि मरीज को वायरल फीवर हुआ है या कुछ और?

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वायरल इंफेक्शन कम, बैक्ट्रियल इंफेक्शन ज्यादा

डॉ एस कुमार के अनुसार हिदुस्तान में वायरल इंफेक्शन कम और यहां बैक्ट्रियल इंफेक्शन ज्यादा होती है. ऐसे में यदि बुखार 102 डिग्री से ज्यादा हो रहा है तो कुछ जांच अवश्य करवा लेना चाहिये. सिम्टम्स और साइन के अनुसार जांच जरुरी है. कॉमन जांच में सीबीसी, टाइफाइड, पेशाब, मलेरिया आदि अवश्य कराना चाहिये. ताकि‍ बुखार के कारणों का पता चल सके. बुखार के कारणों का पता चलने से उसका उपचार भी सही तरीके से संभव हो पायेगा. इससे बुखार जड़ से ठीक हो सकेगा और रोगी को बार-बार बुखार आने से भी बचाया जा सकता है.

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एंटीबायोटिक देने से बुखार दोबारा आने की संभावना बनी रहती है

डॉ कुमार ने बताया कि इस संबंध में ध्यान रखने वाली बात यह होती है कि बगैर जांच किये सिर्फ एंटीबायोटिक देने से 5-7 दिन में बुखार ठीक तो हो जाते हैं, लेकिन 2-3 सप्ताह बाद वह दोबारा मरीज को अपने चपेट में ले लेता है, इसे रिलैप्स कहते हैं. डॉ कुमार ने बताया कि यदि टाइफाइड डायग्नोसिस बनता  हैं तो कम से कम 10-14 दिन के लिए उपयुक्त एंटीबायोटिक्स लेनी चाहिये. यदि यूटीआई डायग्नोसिस हुआ है तो 7-10 दिनों तक एंटीबायोटिक्स लेनी चाहिये. पेशाब में मवाद काफी मिला है तो 10 दिनों में एंटीबायोटिक लेने के बाद पेशाब दोबारा जांच करानी  चाहिए, ताकि बचे हुऐ इन्फेक्शन को एंटीबायोटिक की कोर्स बढ़ा कर जड़ से ठीक किया जा सके. इसके बाबजूद भी यूटीआई के खत्म नहीं होने पर 5-7 दिनों तक एंटीबायोटिक इंजेक्शन का कोर्स लेना चाहिये. डॉ एस कुमार के अनुसार किसी भी तरह के बुखार को वायरल फीवर कहकर निश्चिंत नहीं हो जाना चाहिये, बल्कि उपयुक्त जांच कर इसका पक्का इलाज करवाना चाहिए.

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