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स्वामी विवेकानंद को भी नहीं बख्शा ‘सिस्टम’ ने, ‘स्मृति’ के बहाने कर दिया करोड़ों का खेल

Ranchi  : स्वामी विवेकानंद की स्मृतियों को जीवंत करने के नाम पर रांची में करोड़ों की राशि का दुरुपयोग हुआ है. विवेकानंद स्मृति पार्क से लेकर विवेकानंद सरोवर विकसित करने के नाम पर जिस तरह का खेल हुआ है, वह सरकारी राशि की बर्बादी का जीवंत उदाहरण बन गया है.

रांची के डिस्टिलरी तालाब का अस्तित्व मिटाकर जिस विवेकानंद स्मृति पार्क का निर्माण कराया गया था, वहां विवेकानंद की स्मृति पट्टिका तक उखड़ चुकी है. पार्क में कूड़े का अंबार है. दूसरी तरफ, रांची झील (बड़ा तालाब) को स्वामी विवेकानंद सरोवर के रूप में विकसित करने के नाम पर करोड़ों रुपये उड़ा दिये गये, लेकिन आज भी यह काम अधूरा है.

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दरअसल, आज (12 जनवरी) स्वामी विवेकानंद की जयंती है. इस दिन को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है. आज उनकी स्मृति में कोई उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा होगा, तो कहीं कोई कार्यक्रम आयोजित कर रहा होगा. ऐसे में न्यूज विंग उन कामों को भी लोगों और सिस्टम की स्मृति में लाने का प्रयास कर रहा है, जो स्वामी विवेकानंद की स्मृति के नाम पर रांची में शुरू तो किये गये, लेकिन वे काम करोड़ों रुपये उड़ा दिये जाने के बाद भी या तो आज भी अधूरे पड़े हैं या उनकी दुर्गति हो चुकी है. विवेकानंद सरोवर और विवेकानंद स्मृति पार्क उन्हीं स्थलों में से हैं.

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बड़ा तालाब में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा तो लगी, लेकिन नहीं बना टीओपी

गौरतलब है कि स्वामी विवेकानंद के नाम पर पूर्ववर्ती रघुवर सरकार के समय रांची के बड़ा तालाब (इसे अब विवेकानंद सरोवर के नाम से जाना जाता है) में करोड़ों रुपये की लागत से स्वामी विवेकानंद की एक विशालकाय प्रतिमा लगायी गयी. लेकिन, प्रतिमा के आस-पास सौंदर्यीकरण का काम आज तक अधूरा है. बड़ा तालाब के बीच टापू में लगे स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा और उसके पास जाने के लिए पुल तो ठीक-ठाक हालत में हैं. लेकिन इसके सौंदर्यीकरण और सुरक्षा इंतजाम का काम आज भी अधूरा ही है. मंगलवार को स्वामी विवेकानंद की जयंती को लेकर यहां विशेष तैयारी भी की गयी है, लेकिन पिछले 10 माह से विवेकानंद की प्रतिमा के पास आम लोगों के जाने पर रोक लगी है. इसका कारण कोरोना संक्रमण को बताया गया है.

स्वामी विवेकानंद को भी नहीं बख्शा ‘सिस्टम’ ने, ‘स्मृति’ के बहाने कर दिया करोड़ों का खेल
रांची झील (बड़ा तालाब) में टापू पर लगायी गयी स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा.

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दरअसल अपने निर्माण से लेकर उद्घाटन होने तक पूरा परिसर विवादों में ही रहा है. आखिरकार थक-हार कर इस प्रतिमा के दर्शन तो शुरू करा दिये गये,  लाइटिंग से पूरा परिसर काफी खूबसूरत दिखता भी है, लेकिन इसके बावजूद लोग अपने परिवार के साथ यहां जाने से परहेज करते हैं. इसका कारण है बड़ा तालाब के आस-पास के इलाके का आये दिन असामाजिक तत्वों से भरा होना. रांची के सांसद संजय सेठ ने देर शाम आनेवाले लोगों के साथ कोई अप्रिय घटना नहीं हो, इसके लिए एक टीओपी बनाने का निर्देश रांची प्रशासन को दिया था. लेकिन, आज तक ऐसा नहीं हो सका है.

स्मृति में यहां बना था पार्क, आज है बदहाल, नाम से अक्षर भी गायब

इसी तरह रांची नगर निगम ने लालपुर-कोकर मार्ग पर डिस्टिलरी तालाब का अस्तित्व खत्म कर करीब दो करोड़ रुपये की लागत से स्वामी विवेकानंद स्मृति पार्क बनाया था. यह पार्क भी काफी विवाद में रहा. एक बार तो भारी बारिश में इस पार्क की पिछली दीवार भी ढह गयी थी. वर्तमान स्थिति यह है कि अब इस पार्क को देखनेवाला कोई नहीं है. मुख्य गेट के ऊपर लिखे गये ‘स्वामी विवेकानंद स्मृति पार्क’ में से कई अक्षर ही गायब हो गये हैं. पार्क के अंदर जहां-तहां कूड़ा फेंका हुआ है. सफाई व्यवस्था नहीं होने से पार्क आज बदहाल है.

स्वामी विवेकानंद को भी नहीं बख्शा ‘सिस्टम’ ने, ‘स्मृति’ के बहाने कर दिया करोड़ों का खेल
स्वामी विवेकानंद स्मृति पार्क में लगा कूड़े का ढेर.
स्वामी विवेकानंद को भी नहीं बख्शा ‘सिस्टम’ ने, ‘स्मृति’ के बहाने कर दिया करोड़ों का खेल
स्वामी विवेकानंद स्मृति पार्क में फैली गंदगी.

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