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कोरोना त्रासदी में भी देवघर, पलामू सहित 5 जिलों में DMFT का एक पाई भी खर्च नहीं कर सकी राज्य सरकार

Ranchi : जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) के पैसे खर्च करने में सरकार फिसड्डी साबित हुई है. मार्च 2020 से दुनियाभर में शुरू हुई कोरोना महामारी जैसी आपदा के बावजूद इससे एक रुपया का भी उपयोग नहीं हो सका. यह बात विधानसभा के शीतकालीन सत्र में राज्य सरकार ने मानी है. खान एवं भूतत्व विभाग (झारखंड) के अनुसार राज्य के 5 जिलों में DMFT से स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने को फूटी कौड़ी तक नहीं निकाली जा सकी है.

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कोरोना संकट को देखते देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं, अस्पतालों को दुरुस्त किए जाने को केंद्र, राज्य सरकारों के स्तर से DMFT का खूब उपयोग किया गया.

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केंद्र (खान मंत्रालय) की ओर से पिछले ही साल (28 मार्च 2020) आदेश जारी करते हुए कहा था कि DMFT में उपलब्ध राशि से अधिकतम 30 फीसदी राशि स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च की जा सकती है (One Time relaxation). इस आदेश के बावजूद देवघर, पाकुड़, पलामू, लोहरदगा और साहेबगंज में स्वास्थ्य पर राशि खर्च नहीं की जा सकी.

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DMFT में पड़े हैं 7676.65 करोड़

विधायक बिरंची नारायण ने सदन में सरकार से DMFT की राशि का उपयोग, इससे 30 फीसदी राशि हेल्थ पर तथा बाकी 70 फीसदी राशि के लिए एनओसी लिए जाने संबंधी मसले पर सवाल पूछा था.

इस पर खान एवं भूतत्व विभाग की ओर से लिखित जवाब देते हुए बताया गया है कि DMFT में अब तक कुल 7676.65 करोड़ रुपये जमा हो चुके हैं. इसमें से अब तक 77.79 करोड़ रुपये 19 जिलों में स्वास्थ्य क्षेत्र पर खर्च किए गये हैं.

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NOC लेने की आवश्यकता नहीं

खान विभाग के अनुसार DMFT की राशि का उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्र के विकास एवं कल्याण हेतु पीएम खनिज क्षेत्र कल्याण स्कीम के गाइडलाइन के मुताबिक किया जाता है.

साथ ही इसमें जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट, 2016 के तहत जिला स्तरीय प्रबंधकीय समिति की अनुशंसा पर शासी परिषद से परमिशन ली जाती है.

DMFT के कोविड-19 की रोकथाम के लिये 30 फीसदी राशि का उपयोग करने की परमिशन केंद्र से मिली थी, DMFT की राशि के उपयोग के क्रम में योजनाओं के चयन और क्रियान्वयन के लिये राज्य सरकार से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) की जरूरत नहीं है.

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