JamshedpurJharkhandLead News

8 सालों में भी मोहरदा पेयजल परियोजना से लोगों की पूरी नहीं हुई आस, मानसून में भी नहीं बुझ रही प्यास

विधायक सरयू राय ने सरकार से की पहल करने की अपील

Ranchi. जमशेदपुर के मोहरदा पेयजल परियोजना का लाभ लोगों को अब भी नहीं मिल पा रहा है. 2005 में विश्व बैंक पोषित इस प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए तत्कालीन झारखंड सरकार ने जुस्को को अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं दिया था.

28 करोड़ रूपये की लागत पर इसका निर्माण स्वयं करने का निर्णय लिया. तत्कालीन सीएम अर्जुन मुंडा ने 2006 में इसका शिलान्यास किया. अंततः परियोजना 2013 में अंशतः पूरी हुई. जनता के बीच पानी का कनेक्शन लेने के लिए फार्म बंटे, जलापूर्ति आरंभ हुई.

पर परियोजना सुचारू रूप से परिचालित नहीं हो सकी. इसका नतीजा है कि जमशेदपुर में जिन क्षेत्रों में लोगों के घरों में इसका कनेक्शन है, वे त्राहिमाम कर रहे हैं. मॉनसून में भी पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है. विधायक सरयू राय ने इसके लिए नगर विकास विभाग के सचिव को लेटर लिखकर निजात दिलाने की गुहार लगायी है.

इसे भी पढ़ें :8 महीनों में भी धान का नहीं किया गया भुगतान, न हुई 2 लाख की ऋण माफी और न मिली मुफ्त में बिजलीः दीपक प्रकाश

advt

जुस्को संचालित कर रही योजना

सरयू राय के अनुसार राज्य सरकार ने मोहरदा प्रोजेक्ट के लिए 2017 में परिचालन, उन्नयन एवं रख-रखाव के लिए जुस्को के साथ समझौता किया था. पूर्व में इस योजना का जिम्मा पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के पास था.

परिचालन एवं रख-रखाव तथा जलापूर्ति के संबंध में आम जनता के असंतुष्ट होने के कारण यह परियोजना जुस्को के हवाले की गई थी. 2017 के जून महीने में इसके लिए जुस्को और जमशेदपुर अक्षेस के बीच एक समझौता हुआ.

जुस्को ने उस दौरान कहा था कि परियोजना की अधोसंरचना को उन्नत किया जाएगा. पेयजल गुणवत्ता में 2 महीने के भीतर सुधार किया जाएगा.

इसके बाद जुस्को ने तथा सरकार ने समझौता शर्तों के अनुरूप इस परियोजना पर कितना व्यय किया, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है. अपुष्ट सूचना के अनुसार इस पर कुल 35 से 40 करोड़ रुपए से अधिक का व्यय हुआ है.

परियोजना के संचालन, उन्नयन, रख-रखाव के बारे में हुए समझौते का 5 वर्ष पूरा हो चुका है. पर अब भी पेयजल आपूर्ति के बारे में संतोषजनक प्रगति नहीं हुई है.

हर दिन परियोजना क्षेत्र के लोग पेयजल गुणवत्ता, आपूर्ति आदि के बारे में तथा समय पर आपूर्ति नहीं होने के कारण कोई न कोई शिकायत करते हैं. यह परियोजना के बारे में एक गंभीर शिकायत है. सरकार द्वारा इसे संज्ञान में लेना आवश्यक है.

इसे भी पढ़ें :शिल्पा शेट्टी के पति राजा कुंद्रा का चौंकानेवाला खुलासा, कहा, मेरे जीजा से था पहली पत्नी का अवैध संबंध

वैकल्पिक योजना बनाने की वकालत

जुस्को के अधिकारियों द्वारा यह तर्क दिया जाता है कि नदी में जल प्रवाह बढ़ने के साथ ही पूरे जमशेदपुर एवं मानगो से प्लास्टिक युक्त कुड़ा-कचरा का अंबार नदी से बहकर परियोजना के पम्प हाउस तक आता है.

इसके कारण इंटेक वेल से पानी खींचने वाली पंप मशीन में कचरा फँस जाता है और मशीन बन्द हो जाती है. इसके कारण जलापूर्ति ठप हो जाती है. मशीन को ठीक करने के लिए उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ती है.

जुस्को के अधिकारियों के मुताबिक इस परियोजना की डिजाईन सही नहीं है. उनके अनुसार एक वैकल्पिक योजना बनाना जरूरी हो गया है ताकि इस परियोजना के डिजाईन एवं स्थल की कमियों से होने वाले नुकसान की भरपाई हो सके. ऐसे में जुस्को, जमशेदपुर अक्षेस और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के तकनीकी अधिकारियों की एक संयुक्त बैठक बुलायी जाये.

इसे भी पढ़ें :पूर्व आइजी अरुण उरांव ने खड़ा किया रात्रि पाठशाला का आंदोलन, पढ़ रहे 25,000 बच्चे

Related Articles

Back to top button
%d bloggers like this: