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मांडर कॉलेज के लेक्चरर हरिशंकर प्रसाद की बर्खास्तगी अधिसूचना से पहले  ही उपनिदेशक ने कुलसचिव  से बर्खास्तगी से संबधित जानकारी मांगी

 यूनिवर्सिटी सिंडिकेट की ओर से बनी दो कमेटियों ने  इनके फर्जी जन्म प्रमाण पत्र होने की बात मानी, 2008 में हुई थी जांच

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Ranchi :  मांडर कालेज के तीन लेक्चरर को बर्खास्त किये जाने का निर्णय रांची यूनिवर्सिटी के सिंडिकेट ने 24 फरवरी को लिया था. इन तीन शिक्षकों में डा सच्चिदानंद, डा मधूप किशोर और डा हरिशंकर प्रसाद  शामिल है. तीनों लेक्चररों की डिग्री संबधी गलतियां पायी गयी थी.  28 मई को उच्च शिक्षा विभाग के उप निदेशक गौरी शंकर तिवारी की ओर से एक पत्र निर्गत किया गया है. जिसमें डा हरिशंकर प्रसाद की बर्खास्तगी से संबधित जानकारी मांगी गयी है.  बता दें कि डा हरिशंकर प्रसाद समेत अन्य दो लेक्चररों को यूनिवर्सिटी के सिंडिकेट की बैठक में बर्खास्त करने का निर्णय लिया गया था.

बता दो कि विभाग की ओर से 28 मई को पत्र लिखा गया, लेकिन उस समय हरिशंकर प्रसाद को यूनिवर्सिटी ने बर्खास्त नहीं किया था. यूनिवर्सिटी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बुधवार को यूनिवसिर्टी ने बर्खास्तगी की अधिसूचना जारी की. जबकि विभाग की ओर से इस संबध में पहले ही पत्र जारी किया गया है. उपनिदेशक गौरी शंकर प्रसाद की ओर से यह पत्र यूनिवर्सिटी के कुलसचिव को लिखा गया था.

पत्र में हरिशंकर को बताया गया बंधन मुक्त

उप निदेशक की ओर से लिखित इस पत्र में कहा गया है कि रांची यूनिवर्सिटी की ओर से हरिशंकर प्रसाद को बर्खास्त किया गया. जिसके लिए वादी हरिशंकर प्रसाद ने वाद दायर किया है. इस पत्र में इन्हें फर्जीवाड़ा करने के कारण बंधन मुक्त बताते हुए लिखा गया है कि एसबी सिन्हा कमीशन की ओर से इन्हें  बंधन मुक्त किया गया है. जबकि कई बार अखबारों के माध्यम से भी इनकी ओर से नियुक्ति के लिए  गलत प्रमाण पत्र देने की बात सामने आयी है. वहीं यूनिवर्सिटी की ओर से गठित दो दो कमेटियों ने इन्हें दोषी पाया है.

तीन माह तक क्लास भी ली और वेतन भी

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फरवरी को यूनिवर्सिटी की ओर से आहूत सिंडिकेट की बैठक में ही तीनों लेक्चररों को बर्खास्त करने का प्रस्ताव स्वीकृत किया गया. इसके बाद भी उक्त तीनों लेक्चररों ने मांडर कालेज में अतिरिक्त तीन माह तक पढ़ाया और वेतन भी लिया,  जिसका विरोध 25 मई को हुई सिंडिकेट की बैठक में किया गया.  इसके बाद मामले ने तूल पकड़ा. यूनिवर्सिटी की ओर से इन तीनों शिक्षकों का वेतन इस बैठक के बाद बंद किया गया. लेकिन इन शिक्षकों की बर्खास्तगी की अधिसूचना जारी नहीं की गयी. हांलाकि यूनिवर्सिटी के सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार बर्खास्तगी की अधिसूचना बन कर तैयार है लेकिन इसे जारी नहीं किया गया है.

2008 में हुई थी जांच, जन्म प्रमाण पत्र गलत था

2008 में रांची यूनिवर्सिटी की ओर से बनायी गयी कमेटी की ओर से इन शिक्षकों की जांच की गयी थी. जिसमें डा हरिशंकर प्रसाद ने  नियुक्ति के लिए गलत प्रमाण पत्र दिया था. डा  सच्चिदानंद ने दो साल बाद इंप्रूवमेंट परीक्षा दी. जो नियम संगत नहीं है. वहीं डा मधुप किशोर ने स्नातक में 449 अंक प्राप्त होने की बात की है. जांच में पाया गया कि इनको 413 अंक मिलें है. इस मामले की जांच हुए दस साल हो गये. वहीं चार बार मामला सिंडिंकेट की बैठक में आया. तब जाकर बर्खास्तगी स्वीकार की गयी. लेकिन फिर भी अधिसूचना नहीं निकाली गयी. इसके लिए दो बार कमेटी का गठन किया गया. जिसमें लेक्चररों पर लगे आरोपों को सही बताया गया.

 इस संबध में उच्च शिक्षा विभाग के उप निदेशक गौरी शंकर तिवारी  ने कहा कि नियमों के अनुसार जानकारी मांगी गयी है.  सिंडीकेट के प्रस्तावों के बाद विभागीय कार्रवाई की गयी. अन्य दो लैक्चरर डा सचिदानंद और डाक्टर मधूप कुमार के लिए भी पत्र यूनिवर्सिटी को भेजा गया होगा, लेकिन अभी इसकी जानकारी नहीं है. 

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