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खुलने से पहले ही ‘जियो इंस्टीट्यूट’ को मिला ‘उत्कृष्ट संस्थान’ का दर्जा, फैसले पर उठे सवाल

यशवंत सिन्हा ने ट्वीट कर कसा तंज

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NewDelhi: मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सोमवार को देश के 6 शिक्षण संस्थानों को उत्कृष्ट संस्थानों का दर्जा दिया. इनमें 3 सरकारी और 3 निजी संस्थान शामिल हैं. लेकिन इन तीन निजी संस्थानों में एक ऐसा नाम भी है, जिसका ना तो नाम प्रचलित है, ना ही इसका नाम भी पहले नहीं सुना गया और इंटरनेट पर भी इसका अस्तित्व नहीं दिख रहा है. बड़ी बात ये है कि इसकी शुरुआत तक नहीं हुई है. लेकिन उसे उत्कृष्ट संस्थानों में शामिल किया है. इस संस्थान का नाम है जियो इंस्टीट्यूट.

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फैसले पर उठ रहे सवाल

सरकार की ओर एक ‘बिना अस्तित्व’ वाले कॉलेज या यूनिवर्सिटी को उत्कृष्ट संस्थान में शामिल करने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं.
IIT दिल्ली, IIT बॉम्बे, IIsc बेंगलुरु जैसे संस्थानों की कैटेगरी में शामिल रिलायंस फाउंडेशन का ‘जियो इंस्टीट्यूट’ अभी शुरु भी नहीं हुआ लेकिन मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने देश के 6 उत्कृष्ठ संस्थानों Institute of Eminence (IoEs) लिस्ट में इसे शामिल किया है. ‘जियो इंस्टीट्यूट’ में अभी पढ़ाई नहीं होती और अगले तीन साल में यहां पढ़ाई शुरू होने की उम्मीद है. यहां तक की इंटरनेट पर सर्च करने पर भी इस यूनिवर्सिटी के बारे में कोई खास जानकारी नहीं मिल पा रही है. सिर्फ हमें ही नहीं मंत्रालय को भी इसकी कोई तस्वीर न मिल सकी, इसलिए IOE की जारी लिस्ट में तस्वीर में रिलायंस फाउंडेशन के पोस्टर से काम चलाना पड़ा.

यशवंत सिन्हा ने ट्वीट कर कसा तंज

जियो इंस्टीट्यूट को आईओई का दर्जा मिलने पर जहां सरकार के फैसले पर सवाल उठ रहे हैं. वही पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने भी ट्वीट कर इस फैसले पर मोदी सरकार को घेरा और तंज कसा. उन्होंने ट्विटर हैंडल पर लिखा कि, ‘ ‘जियो इंस्टीट्यूट’अभी शुरु भी नहीं हुआ, यहां तक कि इसका कोई अस्तित्व नहीं है, लेकिन सरकार ने इसे एमनंस का टैग दिया, एम अंबानी होने का ये महत्व है.’

क्या है इंस्टीट्यूट ऑफ एमनंस

इस लिस्ट में शामिल होने से संस्थानों के स्तर और गुणवत्ता को तेजी से बेहतर बनाने में मदद मिलेगी और पाठ्यक्रमों को भी जोड़ा जा सकेगा. देश के बेहतरीन संस्थानों के ऐलान के इस मौके पर मंत्रालय ने कहा, देश के लिए ये IoEs काफी अहम हैं. देश में 800 यूनिवर्सिटी हैं, लेकिन एक भी यूनिवर्सिटी 100 या 200 वर्ल्ड रैंकिंग में शामिल नहीं है. इस फैसले से इसे हासिल करने में मदद मिलेगी. इसके अलावा विश्व स्तरीय संस्थान बनाने की दिशा में जो कुछ भी जरूरी होगा, किया जा सकेगा.

NIRF रैंकिंग में इन इंस्टीट्यूट की क्या स्थिति है?

बता दें कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय देशभर के इंस्टीट्यूट की रैंकिंग भी कराता है. इसे राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग ढांचा (NIRF) कहा जाता है. इस साल 2018 की रैंकिंग में IIsc बेंगलुरु पहले, IIT बॉम्बे तीसरे और IIT दिल्ली चौथे स्थान पर था. जबकि मणिपाल 18वें और BITS 26वें स्थान पर था. लेकिन जिस ‘जियो इंस्टीट्यूट’ को इंस्टीट्यूट ऑफ एमनंस में शामिल किया गया है वो तो NIRF-2018 का हिस्सा भी नहीं था.

HRD मिनिस्ट्री ने दी सफाई

इधर सरकार के फैसले पर उठते सवालों के बीच एचआरडी मिनिस्ट्री ने सफाई दी है. ‘इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस’ की लिस्ट में Jio इंस्टीट्यूट को शामिल किए जाने को लेकर एचआरडी मिनिस्ट्री ने कहा है कि यूजीसी रेगुलेशन 2017, के क्लॉज 6.1 में लिखा है कि इस प्रोजेक्ट में बिल्कुल नए या हालिया स्थापित संस्थानों को भी शामिल किया जा सकता है. इसका उद्देश्य निजी संस्थानों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के एजुकेशन इंफास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए बढ़ावा देना है, ताकि देश को इसका लाभ मिल सके.
अपनी सफाई में मंत्रालय ने कहा कि जियो इंस्टीट्यूट को ग्रीनफील्ड कैटेगरी के तहत चुना है, जो कि नए संस्थानों के लिए होती है और उनका कोई इतिहास नहीं होता है. हमनें प्रपोजल देखा और इसके लिए चुना. उनके पास स्थान स्थान के लिए प्लान है, उन्होंने फंडिंग की है और उनके पास कैंपस है और इस कैटेगरी के लिए आवश्यक सबकुछ है. बताया गया कि इस श्रेणी में कुल 11 आवेदन आए थे. ग्रीनफील्ड इंस्टीट्यूशन स्थापित करने के लिए आए 11 आवेदनों का चार मानकों के आधार पर मूल्यांकन किया गया. सरकार की मानें तो, 11 आवेदनों में सिर्फ Jio इंस्टीट्यूट ही सभी चारों मानकों पर खरा उतरा है. इसी वजह से Jio इंस्टीट्यूट को ‘इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस’ की लिस्ट में शामिल किया गया.

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