न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

विलय के बाद भी राज्य के सरकारी स्कूलों में 14 हजार शिक्षकों की कमी, RTE के आठ साल बाद ये हाल

झारखंड में 11 मई 2019 को राइट टू एजुकेशन लागू होने के तीन वर्ष पूरे हो चुके हैं.

1,172

Ranhi : झारखंड में 11 मई 2019 को राइट टू एजुकेशन लागू होने के आठ वर्ष पूरे हो चुके हैं. इसके बाद भी इस अधिनियम को अब तक पूरी तरह से लागू नहीं किया गया है.

राज्य में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए सरकार ने स्कूलों का विलय कर दिया. राज्य में आठ हजार तीन सौ बतीस विद्यालयों का नजदीकी विद्यालयों में विलय कर दिया गया. इसके बाद भी राज्य के विद्यालयों में शिक्षको की कमी दूर नही हो सकी है.

राज्य के प्रथामिक स्कूलो में शिक्षको के स्वीकृत पद 64,187 हैं जबकि 50,190 शिक्षक ही कार्यरत हैं. शिक्षा अधिकार कानून के तहत सभी सकूलो में पूर्णकालिक प्रधानाध्यापक होना चाहिए जबकि राज्य के कई स्कूल पारा शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं.

इसे भी पढ़ें : गढ़वा : लाभुकों से अंगूठा लगवाकर मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना में फर्जी निकासी

सरकारी विद्याालयों में शिक्षण समाग्री की कमी कमी

अभी भी सभी विद्यालयों में चहारदीवारी, रसोईघर, शौचालय, प्रधानाध्यापक कक्ष, खेल का मैदान आदि उपलब्ध नहीं है. आरटीई के तहत सभी विद्यालयों में शिक्षक-अधिगम सामग्री, खेल, विज्ञान एवं संगीत के उपस्कर उपलब्ध होने चाहिए जो केवल मध्य व उत्क्रमित मध्य विद्यालयों को ही उपलब्ध कराया गया है. अभी भी अधिकांश विद्यालयों में बेंच व डेस्क उपलब्ध नहीं है. इस कारण बच्चों को जमीन पर बैठने पड़ रहा है.

शिक्षा अधिकार कानून के तहत क्या होना चाहिए

मध्य विद्यालयों में कम से कम प्रति कक्षा एक शिक्षक होना चाहिए. विज्ञान और गणित के लिए एक, सामाजिक अध्ययन के लिए एक, भाषा के लिए एक, 35 छात्रों के लिए कम से कम एक शिक्षक होना चाहिए.

वहीं कला के लिए एक, स्वास्थ्य व शारीरिक शिक्षा के लिए एक, कार्य शिक्षा के लिए एक अंशकालीन शिक्षक होना चाहिए.

आरटीई के प्रावधानों के अनुरूप कक्षा एक से पांच तक 30 बच्चों पर एक शिक्षक होना चाहिए, जबकि कक्षा छह से आठ तक में 35 बच्चों में एक शिक्षक होना चाहिए.

इन शर्तों के अनुसार,राज्य में शिक्षा का अधिकार अधिनियम का लागू होने का उद्देश्य पूरा नहीं हो रहा.

इसे भी पढ़ें : धनबाद : सीमा पर तैनात जवानों के लिए कार्मेल की छात्राओं ने बनायी राखी

30 बच्चों पर होना चाहिए एक शिक्षक

भारत सरकार ने पूरे देश में एक अप्रैल 2010 से छह वर्ष से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का उपबंध करने के लिए इसे लागू किया. इसके एक वर्ष के बाद झारखंड सरकार ने 11 मई 2011 को राज्य में शिक्षा का अधिकार कानून को लागू किया.

देश स्तर पर है शिक्षकों के 10 लाख पद रिक्त

शिक्षा अधिकार कानून लागू होने के बाद 2015-16 तक देश के अधिकांश राज्यों में शिक्षको की कामी को दूर करने का प्रयास किया गया है. इसका असर राज्यों की साक्षरता दर पर दिखता है.

एचआरडी के आकड़ों के अनुसार हिंदी भाषी राज्यों- उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में 33.3 करोड़ लोग रहते हैं, जहां प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में शिक्षकों हजारो पद रिक्त हैं. गोवा, ओडिशा और सिक्किम के प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों का कोई पद खाली नहीं है.

इसे भी पढ़ें : ABVP ने VBU के कुलपति को नक्सली समर्थक बताया, राज्यपाल से की हटाने की मांग

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like
क्या आपको लगता है हम स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता कर रहे हैं. अगर हां, तो इसे बचाने के लिए हमें आर्थिक मदद करें.
आप अखबारों को हर दिन 5 रूपये देते हैं. टीवी न्यूज के पैसे देते हैं. हमें हर दिन 1 रूपये और महीने में 30 रूपये देकर हमारी मदद करें.
मदद करने के लिए यहां क्लिक करें.-

you're currently offline

%d bloggers like this: