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हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी सरकार ने नहीं किया हज कमिटी का पुनर्गठन, अभी भी काम कर रही पुरानी कमिटी

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Ranchi : बीते एक माह से झारखंड राज्य हज कमिटी हाई कोर्ट के आदेश को ताक पर रखकर निर्णय ले रही है. गौरतलब है कि कोर्ट ने 13 दिसंबर 2018 को दिये अपने एक आदेश में झारखंड राज्य हज कमिटी के पुनर्गठन का आदेश दिया था. लेकिन, अब तक न सरकार ने कमिटी के पुनर्गठन को लेकर कोई पत्र जारी किया है और न ही हज कमिटी कोर्ट के आदेश को मान रही है. इतना ही नहीं, यह हज कमिटी यथावत स्थिति में अभी भी कार्य कर रही है.

कमिटी के गठन को असंवैधानिक बता एस अली ने दायर की थी रिट याचिका

दरअसल, याचिकाकर्ता एस अली ने हज कमिटी के गठन को गलत बताते हुए एक रिट याचिका दायर की थी. इसमें झारखंड राज्य हज कमिटी के गठन को असंवैधानिक बताया गया था. याचिकाकर्ता ने कमिटी के गठन को लेकर की गयी अनियमितता के बिंदुओं को भी दर्शाया था. इसके बाद कोर्ट ने सुनवाई करते हुए सरकार से जवाब मांगा था, जिसके बाद सरकार की तरफ से महाधिवक्ता अजीत कुमार ने हज कमिटी के गठन में बरती गयी अनियमितता को स्वीकारा था और सरकार की तरफ से हज कमिटी का पुनर्गठन करने की बात कही थी. लेकिन, एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी हज कमिटी का पुनर्गठन नहीं हो पाया है.

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16 जनवरी को कमिटी ने बैठक कर किया हज सेवक का चयन, याचिकाकर्ता ने जतायी आपत्ति

इधर, 16 जनवरी 2019 को रिजवान खान ने खुद को हज कमिटी का अध्यक्ष मानते हुए आड्रे हाउस स्थित हज कमिटी के कार्यालय में बैठक की, जिसमें हज सेवक का चयन किया गया. इस बैठक में हज कमिटी के सचिव भी शामिल थे. इसी पर याचिकाकर्ता एस अली ने अपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि यह पूरी तरह से हाई कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है. सरकार को इस पर संज्ञान लेते हुए कार्रवाई करनी चाहिए और जल्द से जल्द कोर्ट के आदेश के अनुसार कमिटी का पुनर्गठन करना चाहिए.

जब तक पत्र नहीं मिल जाता, तब तक मान्य है कमिटी : रिजवान खान

इस पूरे मामले पर रिजवान खान का कहना है, “विभागीय नोटिफिकेशन के बाद मैं कमिटी का अध्यक्ष बना हूं. जब तक पुनर्गठन को लेकर कमिटी को पत्र प्राप्त नहीं हो जाता है, तब तक मैं अध्यक्ष बना रहूंगा. कोर्ट ने आदेश सरकार को दिया है, हज कमिटी को नहीं.”

इन बिंदुओं पर था एतराज

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि हज अधिनियम 2002 के भाग 03 की धारा 18  के अनुसार कमिटी का पुनर्गठन किया जाये. हज अधिनियम 2002 के भाग 03 की धारा 18 में स्पष्ट रूप से वर्णित है कि राज्य हज कमिटी 16 सदस्यीय होगी, जिसमें एक सांसद और दो स्थानीय विधायक होंगे. तीन वैसे मुस्लिम सदस्य होंगे, जो लोकल बॉडी के सदस्य हों. जैसे नगर निगम, नगर परिषद् आदि के सदस्य. वहीं, तीन सदस्य मुस्लिम मामलों के जानकार होंगे. पांच सदस्य वैसे होंगे, जो पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, एजुकेशन या सोशल वर्क के क्षेत्र से जुड़े हों. जबकि, झारखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष और हज कमिटी के कार्यपालक पदाधिकारी भी सदस्य होंगे. लेकिन, सरकार ने इन सभी बिंदुओं को नजरअंदाज कर झारखंड राज्य हज कमिटी का गठन किया है.

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