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55.51 करोड़ खर्च करने के बाद भी कई पंचायत भवनों का निर्माण नहीं, तो कुछ पड़े हैं अधूरे

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Pravin kumar
Ranchi: झारखंड में पंचायती राज संस्थानों को परिपक्व और मजबूत करने के उद्देश्य से बी.आर.जी.एफ. 13वीं वित्त आयोग के द्वारा धनराशि पंचायत भवनों के निर्माण के लिए केन्द्र से आवंटित की गई थी. 13वें वित्त आयोग से मिली राशि का उपयोग राज्य के उन पंचायतों में करना था, जहां पंचायत भवन का निर्माण नहीं हुआ था. लेकिन 13वें वित आयोग, बी.आर.जी.एफ. की राशि खर्च हो जाने के बाद भी राज्य के 200 से ज्यादा पंचायतों का अपना कोई भवन नहीं है. जिससे मुखिया के बैठने के लिये कोई स्थान तय ही नहीं है.

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घरों से ही पंचायतों का कार्य करते हैं मुखिया

इन पंचायतों में हालात ऐसे हैं कि ग्रामीणों को अपने कार्यों के लिए मुखिया के पीछे दौड़ना पड़ता है. इसपर मुखिया का कहना है कि हम क्या करें, जब हमारे बैठने का ही कोई तय स्थान नहीं है, तो ऐसे में हम घर से ही पंचायत से जुड़े हुए सभी कार्य करने की कोशिश करते हैं. वहीं खूंटी जिला के डडीगूटू और मरंगहादा पंचायत का अपना भवन नहीं था, जिसका निर्माण कार्य हाल के दिनों में शुरू तो हुआ, लेकिन निर्माण कार्य भी महज लिंटन तक ही हो पाया. जबकि धनबाद के नेरो और तोपचांची पंचायत का भी अपना भवन नहीं है.

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55.51 करोड़ कर दिए खर्च, कई योजनाएं अधूरे

13वें वित्त आयोग और राज्य योजना अनुदान और डिपोजिट कार्यो के तहत प्राप्त राशि में से पंचायत भवनों, आंगनबाड़ी केन्द्र, सड़क, पुलिया, चबूतरों का निर्माण कराया जाना था. जिसमें कुल 15,313 योजनाओं के लिए 439.69 करोड़ राशि खर्च की जानी थी. इस कार्य को 2011 से 2016 तक पूरा किया जाना था. जबकि 1952 योजनाओं को मार्च 2017 तक भी पूरा नहीं किया जा सका. जबकि योजनाओं को पूरा करने के लिए 190.72 करोड़ की राशि जिलों को दे दिया गया था.
पंचायती राज संस्थान के लिये 13वें वित्त आयोग के द्वारा मिले अनुदान से शुरू की गयी कई योजनाएं अधूरी हैं. वहीं देवघर में कुल 3214 योजनाओं पर कार्य शुरू किया गया था, जिसमें 82 योजनाओं का कार्य पूरा नहीं किया जा सका. धनबाद में भी 2262 योजनाओं पर कार्य तो शुरू किया गया था, लेकिन 350 योजनाओं का काम पूरा नहीं किया जा सका. जबकि गढ़वा में 1928 योजनाओं पर कार्य शुरू किया गया था. जिसमें 417 योजनाएं अधूरे हैं. गोड्डा में भी 1409 योजनाओं पर कार्य शुरू किया गया था, जिसमें 105 योजनाओं को अधूरा छोड़ दिया गया. वहीं पलामू में 4205 योजनाओं पर कार्य शुरू किया गया था, जिसमें 505 योजनाएं अधूरे हैं. वहीं रांची में 2295 योजनाओं पर कार्य शुरू किया गया था, जिसमें 493 योजनाएं अधूरे रह गए.

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पंचायत से मिलने वाली सुविधाओं से वंचित हैं ग्रामीण

कार्य तय समय पर पूरा नहीं होने की वजह से पंचायत से मिलने वाली सुविधाओं से ग्रामीणों को वंचित होना पड़ रहा है. वहीं कार्यों के अधूरा रहने पर विभाग का कहना है कि भूमि विवाद के कारण 23 योजनाओं को रोक दिया गया है. साथ ही कहा गया कि राशि की कमी की वजह से भी 127 योजनाओं को अधूरा छोड़ दिया गया है. जबकि संवेदकों की ढिलाई की वजह से 1802 योजनाओं का कार्य पूरा नहीं किया जा सका है.
वहीं 1952 योजनाओं में से 616 योजनाओं का कार्य तीन वर्ष से अधिक समय से अधूरा पड़ा हुआ है. इन अधूरे योजनाओं पर 55.51 करोड़ की राशि खर्च की जा चुकी है. पलामू जिला को चार पंचायत भवन, गोड्डा का दो पंचायत भवन, देवघर के तीन पंचायत भवन और गढ़वा के तीन आंगनबाड़ी केन्द्रों का काम बंद हो चुका है.

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