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18 सौ करोड़ खर्च करने के बाद भी शुरू नहीं हो पायी 247 ग्रामीण जलापूर्ति योजना

2020 तक राज्य के 50 फीसदी ग्रामीण इलाकों में हर घर नल, हर घर जल की सुविधा

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Ranchi : झारखंड के ग्रामीण इलाकों में सरकार की ओर से शुरू की गयी 247 ग्रामीण जलापूर्ति योजनाएं अब तक पूरी नहीं हो पायी हैं. इसपर सरकार 18 सौ करोड़ रुपये खर्च कर रही है. यह सभी योजनाएं ऑनगोइंग स्कीम हैं. जिसे जल्द पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. पेयजल और स्वच्छता विभाग की तरफ से राज्य के ग्रामीण इलाकों में रहनेवाली 50 फीसदी आबादी को 2020 तक साफ पीने का पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है. नेपाल हाउस मंत्रालय से इन सभी योजनाओं की लगातार निगरानी की जा रही है.

सरकार ने ली है लघु ग्रामीण जलापूर्ति योजनाएं

राज्य सरकार ने इसी क्रम में लघु ग्रामीण पाइपलाइन जलापूर्ति योजनाएं भी ली हैं. इसमें बोरवेल (ट्यूबवेल) आधारित, नदी, नाला और तालाब आधारित योजनाएं भी शामिल हैं. वहीं विभाग की तरफ से एक टोले के न्यूनतम 25 घरों तक पानी पहुंचाने का कार्यक्रम तय किया गया है. इसके लिए 5394 लघु योजनाएं ली गयी हैं. विश्व बैंक ने देशभर में सतही जल (सरफेस वाटर) आधारित पेयजल योजनाओं से हर घर में पानी पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है, ताकि ट्यूबवेल पर लोगों की निर्भरता कम हो सके. झारखंड में 4 लाख से ज्यादा ट्यूबवेल हैं और 20 हजार नये ट्यूबवेल प्रत्येक वर्ष यहां स्थापित किये जा रहे हैं, जिससे भूगर्भ जल का स्तर गिर रहा है. इसे रोकने के लिए ही सरफेस वाटर पर आधारित योजनाएं तेजी से ली जा रही हैं.

विश्व बैंक संपोषित योजना भी चल रही हैं पांच जिलों में

राज्य के पांच जिले रामगढ़, पश्चिमी सिंहभूम, धनबाद, बोकारो, चतरा और गोड्डा में जलापूर्ति योजनाएं विश्व बैंक के मिले अनुदान से शुरू की गयी हैं. इसके लिए एक अलग यूनिट स्थापित किया गया है. अब तक पश्चिमी सिंहभूम में दो योजनाएं विश्व बैंक की मदद से शुरू की जा सकी हैं. इस योजना में वैसे गांवों का चयन किया गया है, जहां पीने के पानी की सुविधा नहीं है. पर गांव के आसपास सतही जल स्त्रोतों को पाइपलाइन से जोड़कर आबादी तक पहुंचाना है. गांवों में छोटी टंकी लगाकर उस पर मोटर पंप से पानी भरा जाता है. यही पानी निरंतर लोगों के घर तक पहुंचायी जा रही है. मार्च 2015 तक राज्य के 12 फीसदी ग्रामीण आबादी के पास पाइपलाइन जलापूर्ति से पीने का पानी पहुंचाया जा रहा था. यह बढ़कर 30 फीसदी तक हो गया है. राज्य के अति उग्रवाद प्रभावित इलाकों में भी 694 ग्रामीण जलापूर्ति योजनाएं शुरू की गयी हैं. यह अभी भी पूरी नहीं की जा सकी हैं. वहीं आदिम जनजाति के टोलों में 192 स्कीम लिये गये हैं. इनमें मार्च तक पाइपलाइन बिछाया जा सकेगा.

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