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पांचजन्य का आकलन : मोदी ब्रांड की चमक बरकरार, हार की वजह दूसरी, भाजपा अपने जनाधार को समझे

 NewDelhi आरएसएस के मुखपत्र पांचजन्य में हिंदी बेल्ट में भाजपा की हार पर विमर्श किया गया है. भाजपा की हार के बाद  मीडिया, सोशल मीडिया आदि भाजपा पर जिस प्रकार से हमलावर हैं, उस पर चर्चा की गयी है. पांचजन्य के अनुसार जैसे चुनाव परिणाम आये हैं, उसके उलट भाजपा पर आक्रोश कहीं अधिक नजर आ रहा है. मुखपत्र के अनुसार ऐसा होना ही था. कहा गया कि लोकसभा चुनाव के एक-एक दिन जैसे-जैसे नजदीक आयेंगे,  भाजपा के खिलाफ राजनीतिक माहौल में और ज्यादा तीखा हमला होगा.  मुखपत्र में लिखा गया है कि घोटालों और हेराफेरी को यथासंभव थामे भाजपा सरकारें जिस तरह से काम कर रही हैं, उस कारण भाजपा विरोधी पार्टियों को चुभने लगी.  इन पार्टियों का मकसद लाभ है. पांचजन्य ने अपने लेख में मिशेल-माल्या और नेशनल हेराल्ड का जिक्र करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा है. साथ ही यूपी गेस्ट हाउस कांड के बाद सपा-बसपा के साथ आने पर बात कही गयी है. पीएम मोदी के विकास की बात करते हुए लेख में कहा गया है, विकास अच्छी बात है. मगर हर समय विकास की बात करना देश की सबसे बड़ी पार्टी के संवेदनशील जनाधार को कहीं ना कहीं खलने लगा.  भाजपा सरकार में विकास दिखा भी, मगर इससे बात नहीं बनती.

तर्कशीलता नहीं, भावनात्मकता भाजपा के जनाधार का स्वभाव है

पांचजन्य ने सीख देते हुए लिखा है कि तर्कशीलता के बजाय भावनात्मकता भाजपा के जनाधार का स्वभाव है, क्योंकि उसके मतदाता वह हैं, जिनकी आस्था और श्रद्धा का बिंदु स्पष्ट हैं. भाजपा को यह समझना होगा. मुखपत्र में भाजपा के घोषणा पत्र पर बात करते हुए लिखा गया है कि राम मंदिर, गोवंश, धारा 370 और 35A विकास के मुद्दे भले ना हों मगर यह भाजपा के घोषणापत्र के अभिन्न हिस्से हैं. इनसे भाजपा समर्थकों की गहरी भावनाएं जुड़ी हुई हैं और इनकी उपेक्षा करते हुए हाल में आये चुनाव परिणाम का विश्लेषण नहीं किया जा सकता. मुखपत्र में मोदी ब्रांड पर लिखा गया है कि मोदी ब्रांड की चमक फीकी नहीं पड़ी है. लिखा गया है कि चुनाव बाद कहा जा रहा है कि किसानों का वोट कांग्रेस जुड़ गया. यह भी कहा जा रहा है कि चुनाव में कांग्रेस का हर दांव सफल रहा. मुखपत्र में कहा गया कि यह कोरा झूठ है.

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