JharkhandMain SliderRanchi

ग्राम न्यायालयों की स्थापना राज्य सरकार की जिम्मेदारी, केवल 9 राज्यों में 210 ग्राम न्यायालय ही कार्यरत

Ranchi: देश के नागरिकों को उनके निकट ही तुरंत न्याय मिले, कम पैसे में न्याय हो, इस उद्देश्य से भारत सरकार ने ग्राम न्यायालय अधिनियम 2008 के माध्यम से ग्राम न्यायालयों की स्थापना का प्रावधान किया है. लेकिन आपमे से ऐसे कितने हैं जिन्हे ग्राम न्यायालय से इंसाफ मिला है. गलती आपकी नहीं, देश में 9 राज्यों में महज 210 ग्राम न्यायालय ही काम कर रहे हैं.

इसे भी पढ़ें- रेलवे की वजह से बाधित रही टीवीएनएल की कोयला आपूर्ति, चार दिनों से बिजली उत्पादन है ठप्प

ग्राम न्यायालयों की स्थापना राज्य सरकार की जिम्मेदारी

ram janam hospital
Catalyst IAS

अगर आपके आसपास ग्राम न्यायालय की स्थापना नहीं हुई है तो इसके लिए राज्य सरकार दोषी है. क्योंकि ग्राम न्यायालय की स्थापना की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है. हाईकोर्ट से परामर्श लेकर राज्य सरकार ग्राम न्यायालय की स्थापना करती है. ये बातें विधि एवं न्याय राज्यमंत्री पीपी चौधरी ने राज्यसभा में कही.

The Royal’s
Sanjeevani
Pushpanjali
Pitambara

इसे भी पढ़ें-आंदोलन के नाम शिक्षकों ने मनाया वीकेंड, कई विभागों से प्रोफेसर नदारद

महेश पोद्दार ने राज्यसभा में उठाया ग्राम न्यायालय के गठन का मुद्दा

दरअसल, झारखंड से राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने पूछा था कि देश में ग्राम न्यायालय की स्थापना की क्या स्थिति है. ग्राम न्यायालय अधिनियम 2008 का कितना पालन हुआ और राज्यों में कितने ग्राम न्यायालय कार्यरत हैं ?

इसे भी पढ़ें-इग्नू के तकनीकी कोर्स में एआईसीटीई मान्यता जरूरी नहीं : सुप्रीम कोर्ट

राज्य सरकारों एवं उच्च न्यायालयों द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर मंत्री पीपी चौधरी ने बताया कि अभी तक 11 राज्यों द्वारा 343 ग्राम न्यायालय अधिसूचित किए जा चुके हैं. इनमे से वर्तमान में 9 राज्यों में 210 ग्राम न्यायालय कार्यरत हैं.

झारखंड जैसे राज्यों में कारगर साबित हो सकते हैं ग्राम न्यायालय
झारखंड जैसे राज्यों में कारगर साबित हो सकते हैं ग्राम न्यायालय

इसे भी पढ़ें-बंद नहीं होगी, बदलेगी एचईसी की तस्वीरः एटॉमिक एनर्जी डिपार्टमेंट करेगा टेकओवर !

केस के बोझ से कराह रही अदालतें

देश के हाईकोर्ट पर कुल 43 लाख 57 हजार 574 केसों का बोझ है. वहीं निचली अदालतों में दो करोड़ 75 लाख 56 हजार 231 मामले चल रहे हैं. सांसद महेश पोद्दार ने राज्यसभा में उच्च न्यायालयों और जिला न्यायालयों के समक्ष लंबित मुकदमों का मामला उठाया था. उन्होंने सरकार से यह जानना भी चाहा था कि क्या ग्राम न्यायालयों को स्थापित और सक्रिय कर उच्चतर अदालतों का बोझ कम करने पर विचार किया जा रहा है ?

इसे भी पढ़ेंःमीडिया पर संपूर्ण नियंत्रण का इरादा अभिव्यक्ति की आजादी पर पहरा

सांसद महेश पोद्दार के प्रश्न के जवाब में विधि एवं न्याय राज्यमंत्री पीपी चौधरी ने बताया कि आज की तारीख तक देश में 17 लाख 44 हजार 961 सिविल मामले, 11 लाख 46 हजार 577 आपराधिक मामले और 14 लाख 66 हजार 036 रिट (कुल 43 लाख 57 हजार 574 मामले) विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित हैं. इसके अलावा 83 लाख 27 हजार 923 सिविल मामले और 1 करोड़ 92 लाख 28 हाजर 308 आपराधिक मामले (कुल 2 करोड़ 75 लाख 56 हजार 231 मामले) विभिन्न जिला और अधीनस्थ न्यायालयों (अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, लक्षदीप, पुडुचेरी राज्य /संघ राज्यक्षेत्रों के अलावा) में लंबित हैं. पीपी चौधरी ने ये जानकारी राष्ट्रीय न्यायिक डाटा ग्रिड(एनजेडीजी) के वेब पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ो के आधार पर बताया.

इसे भी पढ़ें-नगर विकास विभाग की बैठक में मंत्री ने कहा, शहर को एजेंसियों ने नर्क बना दिया है

उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों और मुख्यमंत्रियों के सम्मलेन में हुई थी चर्चा

ग्राम न्यायालयों के मुद्दों पर 7 अप्रैल, 2013 को उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायमूर्तियों और राज्यों के मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में चर्चा की गई थी. सम्मेलन में यह निश्चित किया गया था कि राज्य सरकारों और उच्च न्यायालयों को जहां कहीं संभव हो, स्थानीय मुद्दों और स्थिति को ध्यान में रखते हुए ग्राम न्यायालयों की स्थापना पर विचार करना चाहिए.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं

Related Articles

Back to top button