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नई शिक्षा नीति में समाज के सभी वर्गों के बच्चों को दी जाएगी समान शिक्षा : सिंह

नई शिक्षा नीति एवं वॉश इन स्कूल को लेकर राज्य स्तरीय सम्मेलन

Ranchi : नई शिक्षा नीति एवं वॉश इन स्कूल को विद्यालय स्तर पर लागू करने को लेकर राज्य स्तरीय सम्मेलन का आयोजन लीड्स के तत्वावधान में यूनिसेफ, ब्रॉट और झारखंड राइट टू एजुकेशन फोरम के सहयोग से रांची स्थित लि-लैक होटल में किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन लीड्स के निदेशक एके सिंह, मधुकर, महादेव हांसदा, सपना सूरीन और गुरजीत सिंह ने दीप प्रज्जवलित कर किया.

इस मौके पर लीड्स के निदेशक एके सिंह ने नई शिक्षा नीति पर विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि समाज के सभी वर्गों से आने वाले बच्चों को समान शिक्षा दी जाएगी. उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति को लागू करने के पूर्व इस नीति के क्रियान्वयन को लेकर देशभर के शिक्षाविदों के साथ चर्चा कर उनकी सोच को समायोजित करने का प्रयास किया गया है.

नई शिक्षा नीति में सरकारी और गैर सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को आपस में समन्वय बनाकर पढ़ाई करने की बात कही. उन्होंने कहा कि आज की जरूरत के अनुसार सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा,भारतीय मूल्यों पर शैक्षणिक ढांचा,पिछड़े लोगों को विद्यालय से जोड़ने समुदाय के लोगों को भागीदारी सुनिश्चित कराने के लिए नई शिक्षा नीति एक नए रूप में हम लोगों के बीच आई है. जिसके क्रियान्वयन के लिए एवं सभी को एकजुट होकर काम करना होगा.

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शिक्षा के क्षेत्र की खामियों को दूर करने की जरूरत

झारखंड सरकार के सोशल ऑडिट यूनिट के गुरजीत सिंह ने कहा कि विद्यालय स्तर पर ऑडिट के बाद शिक्षा के क्षेत्र में भी कई खामियां पाई गई हैं. इन्हें दूर करने की आवश्यकता है. नई शिक्षा नीति पर चर्चा करते हुए बलराम ने कहा विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्रों में सरकार के द्वारा संचालित किए जा रहे मिड डे मील की चर्चा करते हुए बच्चों को पोषण युक्त भोजन उपलब्ध कराने को लेकर चर्चा की. उन्होंने कहा कि भोजन बनाने वाले रसोईया एवं सहायिका को पोषण युक्त खाना के लिए प्रशिक्षण दिए जाने की आवश्यकता है. कृष्णकांत ने कहा कि व्यवहारिक शिक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. पढ़ाई के साथ साथ बच्चों मे कौशल विकास के लिए काम किए जाने की जरूरत है.

वाश इन स्कूल पर चर्चा करते हुए यूनिसेफ के राज्य सलाहकार गौरव वर्मा ने कहा कि विद्यालय मे शैक्षणिक वातावरण कायम करने के लिए स्वच्छता पर चर्चा की जानी चाहिए. स्वच्छ तन में ही स्वस्थ मन का वास होता है. इन्होंने मुख्यमंत्री स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार की चर्चा की. विद्यालय स्तर पर स्वच्छता के रूप में मॉडल रूप से विकसित करने के लिए स्वच्छता की 39 मांगों पर चर्चा की.

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ड्रॉपआउट की संख्या को घटाने के लिए हो रही कोशिश

माहवारी स्वच्छता प्रबंधन पर चर्चा करते हुए विश्वा की प्रतिनिधि श्रेया त्रिपाठी ने कहा कि विद्यालयों में छात्राओं के ड्रॉपआउट की संख्या को घटाने के लिए यूनिसेफ एवं लीड्स के द्वारा कई जिलों में माहवारी स्वच्छता प्रबंधन लैब का निर्माण किया जा रहा है. सेमिनार में महामारी स्वच्छता प्रबंधन लैब की विस्तृत जानकारी दी गई.राज्य स्तरीय सेमिनार में झारखंड राइट टू एजुकेशन फॉर्म के 24 जिले के प्रतिनिधियों ने शिरकत की.

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