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पर्यावरण संरक्षण अखड़ों तक सीमित न रहे, हर किसी की भागीदारी हो: द्रौपदी मुर्मू

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  • वर्तमान में पर्यावरण को लेकर हर कोई चिंतित है, पर आदिवासी समाज से सदियों से ऐसा कर रहा
  • जनजातीय और क्षेत्रीय भाषा विभाग में सरहुल का आयोजन

Ranchi: पर्यावरण सरंक्षण वर्तमान में वैश्विक मुद्दा है. लोग इसके सरंक्षण को लेकर चिंतित हैं. लेकिन आदिवासी समाज ऐसा है जो सदियों से इसके संरक्षण के लिए प्रयासरत है. न सिर्फ त्योहारों में बल्कि इनका जीवन ही जंगल पर आधारित होता है. उक्त बातें राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने कहीं. वह रांची विश्वविद्यालय के जनजातीय और क्षेत्रीय भाषा विभाग की ओर से आयोजित सरहुल महोत्सव कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं. कार्यक्रम का आयोजन जनजातीय और क्षेत्रीय भाषा विभाग परिसर में किया गया. इस दौरान राज्यपाल ने कहा कि जनसंख्या वृद्धि के साथ-साथ पर्यावरण की समस्या बढ़ती जा रही है. इसके लिए सेमिनार आयोजित किए जा रहे हैं. लेकिन आदिवासी समाज को किसी सेमिनार की जरूरत नहीं. क्योंकि पर्यावरण को लेकर वे पहले से जागरूक हैं. उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश सिर्फ अखड़ों तक सीमित नहीं रहना चाहिए. बल्कि इससे ऊपर उठ कर लेागों को काम करना चाहिए.

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मनुष्य और प्रकृति के स्नेह का पर्व

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उन्होंने कहा कि सरहुल पर्व मनुष्य और प्रकृति के स्नेह का पर्व है. धार्मिक ग्रंथों से जानकारी होती है कि लोग पशु पक्षियों और वृक्षों में भगवान को देखते थे. यहीं से सरहुल की शुरुआत हुई. विभाग के बारे में उन्होंने कहा कि पहले राज्य में मात्र रांची विश्वविद्यालय था. यह एकमात्र स्थान था जहां सरहुल का आयोजन किया जाता था. अन्य विश्वविद्यालय यहीं से जन्म लिये. ऐसे में आनेवाले समय में जरूरी है कि विभाग के परिसर को और बड़ा बनाया जाये. जिसमें लगभग पांच हजार लोग एक साथ बैठ सकें और अधिक से अधिक विद्यार्थी सरहुल जैसे आयोजनों का आनंद ले सकें.

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नौ क्षेत्रीय नृत्य पेश किये गये

कार्यक्रम की शुरुआत विधि विधान से साल वृक्ष की पूजा कर हुई. पाहन सोहन मुंडा और वंदे खलखो ने पूजा करायी. जिसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किया गया. राज्य के नौ क्षेत्रीय नृत्य पेश किया गया. जिसमें खोरठा, नागपुरी, कुड़ूख, पंचपरगनिया, मुंडारी, हो, खड़िया, संताली और कुरमाली भाषा पर आधारित नृत्य शामिल थे. मौके पर वीसी डॉ रमेश कुमार पांडेय, प्रो वीसी डॉ कामिनी कुमार, डॉ अशोक कुमार बड़ाईक, किशोर सुरीन, डॉ दमयंती सिंकू समेत अन्य लोग उपस्थित थे.

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