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पर्यावरण दिवस विशेष: झारखंड के मैन ऑन मिशन केके जायसवाल- 52 वर्षों में निजी खर्च पर लगाये 37 लाख पौधे

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पर्यावरण धर्म व वनराखी मूवमेंट में 42 साल के भीतर 5 लाख वृक्षों पर बांधी राखी.

पर्यावरण को बचाने के श्री जायसवाल के प्रयास सीबीएसई के कक्षा आठ व आईसीएसई बोर्ड की कक्षा 6 के पाठ्यक्रम में 10 वर्षों से शामिल.

Aqua Spa Salon 5/02/2020

Palamu: 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस के तौर पर मनाया जाता है. पर्यावरण में प्रदूषण के बढ़ते खतरे को देखते हुए प्रकृति को बचाना आज जरूरी हो गया है.

पर्यावरण संरक्षण लोगों के सहयोग से ही संभव है. और इस पर्यावरण संरक्षण को पलामू के कौशल किशोर जायसवाल ने एक मिशन की तरह लिया है.

पौधा वितरण करते कौशल किशोर जायसवाल

पर्यावरण पर लगातार बढ़ रहे खतरे को देखते हुए पलामू निवासी और पर्यावरणविद् कौशल किशोर जायसवाल लगातार पर्यावरण संरक्षण को लेकर कार्यक्रम चला रहे हैं. निःशुल्क पौधा वितरण, पौधा रोपण और पर्यावरण सुरक्षा के संकल्प में श्री जायसवाल लगातार लगे हुए है.

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बचपन से ही पर्यावरण के लिए सजग

विश्वव्यापी पर्यावरण संरक्षण अभियान के केंद्रीय अध्यक्ष सह पर्यावरण धर्म व वन राखी मूवमेंट के प्रणेता पर्यावरणविद् कौशल किशोर जायसवाल पर्यावरण की रक्षा और उसके प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए बाल्यावस्था से ही सजग हैं.

1957 ई. में जन्मे स्व. मोहनलाल खुर्जा के पुत्र कौशल किशोर जायसवाल (ग्राम-पोस्ट डाली बाजार, कौशल नगर) ने 1966 के महा आकाल को झेलने के बाद महसूस किया कि वनों के कटने से ऐसी भयावह स्थिति बनी है.

अकाल के दौरान पत्ते खाकर लोगों को अपनी जान बचानी पड़ी थी. यह स्थिति दोबारा नही बने, इसलिये 1967 में पहली बार अपने पूर्वजों की 7.72 हेक्टेयर भूमि पर पौधे लगाये, जो आज जंगल का रूप ले चुका है और वहीं से निजी खर्च पर पौधा रोपण और वितरण का अभियान उन्होंने शुरू किया.

विदेशों में भी किया पौधा रोपण और वितरण

आज नेपाल-भूटान समेत देश के 20 राज्यों के 70 जिलों के लोग इन्हें जानते ही नहीं, बल्कि पहचानते भी हैं. 52 वर्षो में देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में अभियान चलाकर 37 लाख निःशुल्क पौधा वितरण सह रोपण कर चुके हैं.

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कौशल को पहले सनकी कहने वाले किसान और ग्रामीण आज उनके कंधे से कंधा मिलाकर पौधारोपण कर रहे हैं और उसे बचाने के अभियान में जुड़ गए हैं.

वनों की सुरक्षा के लिए आंदोलन

पर्यावरणविद कौशल द्वारा लगाए गए पौधे, वृक्ष के रूप में कटने लगे. इसे देखते हुए वृक्षों को बचाने के लिए 1977 ई. में पर्यावरण धर्म अपनाया. इसी के तहत वनों की सुरक्षा के लिए वन राखी मूवमेंट चलाया, जिसमें करीब पांच लाख वन वृक्षों पर राखियां बांधी.

पेड़ों को राखी बांधते कौशल किशोर जायसवाल

वही रक्षा बन्धन में शामिल सभी महिला-पुरुष को कंबल, धोती, साड़ी, शॉल देकर सम्मानित किया गया. लोगों के बीच पौधा लगाने की बढ़ती जागरूकता को देखते हुये 2000 ई. से शिविर लगाकर साप्ताहिक बाजार समेत अन्य स्थानों पर 15 से 20 हजार पौधे निःशुल्क वितरण सह रोपण अभियान प्रारंभ किया.

इतना ही नहीं पर्यावरण धर्म के 8 मूल-मंत्रों को अमल में लाने के लिए शपथ दिलाने लगे, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति के जन्म दिन पर पौधा लगाना, जन, जल, जंगल, जमीन, जानवर, पशु-पक्षियों और प्रकृति को बचाने का उद्देश्य शामिल है.

प्रदूषण की आग को शुद्ध हवा से बुझाने के लिए आकाश बाग, किचन प्लांट एवं गांव में वृक्ष खेती करने के लिए लोगों को प्रेरित करते आ रहे हैं.

पर्यावरणविद् कौशल ने प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी 2019 में दो लाख निःशुल्क पौधा वितरण सह रोपण, वनों पर रक्षा बंधन एवं पर्यावरण धर्म पर गोष्टी के आयोजन का अभियान शुरू किया है.

गुजरात के अहमदाबाद से राजस्थान, दिल्ली, यूपी, बिहार, झारखंड, बंगाल, असम, मेघालय, मिजोरम होते हुए भूटान में समापन करने का निर्णय लिया है. शुभारंभ झारखंड के पलामू के छतरपुर प्रखंड अंतर्गत डाली पंचायत के डाली बाजार स्थित कौशल नगर से हुआ है.

34 अवॉर्ड्स से हो चुके सम्मानित

पर्यावरणविद् कौशल किशोर जायसवाल को अबतक देश-विदेश से 34 अवार्ड मिल चुके हैं. जिसमें यूएसए के जॉर्ज.ए.जेम्स, जर्मनी के प्रो. पेट्रा एवं प्रो. हैकी, नेपाल के सरोज शर्मा, उत्तराखंड के पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा, पंजाब के इंद्रजीत कौर, कर्नाटक के पांडुरंग हेगड़े के साथ बंगाल व झारखंड के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, वन मंत्री समेत दर्जनों सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थाओं से सम्मानित किए जा चुके हैं.

झारखंड के मैन ऑन मिशन

पर्यावरणविद् कौशल किशोर जायसवाल के कार्यों की पढ़ाई सीबीएसई बोर्ड की कक्षा आठ एवं आईसीएसई बोर्ड की कक्षा 6 में 10 वर्षों से कराई जा रही है. जिसका उल्लेख गूगल में भी है.

पर्यावरण विद ने देश-दुनिया को संदेश दिया है-‘सोचो साथ क्या ले जाएंगे? एक पौधा लगाएंगे, सात पीढ़ी तर जाएंगे. वनों की सुरक्षा केवल लाठी से नहीं, वन राखी से होगी.’

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