न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

पूरा रेलवे स्टेशन हुआ चोरी, कहीं रेलवे ट्रैक पर लोग कर रहे खेती, तो कहीं कमरे में बांध रहे मवेशी

1,576

Dhanbad : आपने चोरी की कई घटनाएं सुनी होगी, शायद देखा भी हो, लेकिन क्या आपने कभी सुना है की चोरों ने पूरा का पूरा रेलवे स्टेशन ही चुरा लिया हो ? चौंकिये मत, ये बात सोलह आने सच है. झारखंड के धनबाद में धनबाद-झरिया-सिंदरी रेल मार्ग पर आने वाले कई स्टेशनों का अस्तित्व ही चोरों ने समाप्त कर दिया है. इतना ही नहीं इन रेलवे स्टेशनों के कमरों में मवेशी बांधे जाते हैं.

इसे भी पढ़ें- नेतरहाट एवं इंदिरा गांधी आवासीय विद्यालय होगा सीबीएसई, राज्य के हर पंचायत में प्लस टू स्कूल खोलेगी सरकार

अग्नि प्रभावित क्षेत्र घोषित कर बंद किए गए स्टेशन

धनबाद का झरिया, जो कभी राज-रजवाड़ों का शहर हुआ करता था. आज झरिया कोयलांचल के नाम से प्रसिद्ध है. दरअसल इस धरती के गर्भ में कोयले की मौजूदगी का पता सर्वप्रथम यहां राज कर रहे अंग्रेजों ने लगाया और उसका दोहन शुरू किया. जिसके बाद कोयले की ढुलाई के लिए अंग्रेजो ने ही 1905 में यहां रेलवे लाइन का निर्माण कराया. आजादी के बाद भारतीय रेल ने इस रेल लाइन को और विकसित करते हुए इसे धनबाद-झरिया-सिंदरी रेल लाइन में विकसित कर दिया. जिसके बाद इस रेल मार्ग पर रोजाना दर्जनों छोटी-बड़ी ट्रेनें दौड़ने लगी. लेकिन यहां कोयला उत्खनन कर रही कोयला कंपनी भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) ने इस क्षेत्र को अग्नि प्रभावित क्षेत्र घोषित करते हुए रेल प्रशासन को एक पत्र लिखा और यह रूट बंद करने का अनुरोध किया. जिसके बाद 2004-2005 में इस रेल मार्ग को रेलवे ने बंद कर दिया.

इसे भी पढ़ें- चिकनगुनिया : चार दिन बाद हरकत में आयी सरकार, मंत्री ने अधिकारियों को लगायी फटकार

क्या है स्टेशनों का हाल

इसके बाद इस रेल रूट पर आने वाले कई स्टेशनों पर लूट मच गई. लेकिन इसकी परवाह ना तो रेल अधिकारियों ने की और ना ही सुरक्षा के लिए जवाबदेह एजेंसियों ने. देखते ही देखते धनसार, झरिया सहित कई रेलवे स्टेशनों के नामोनिशान तक गायब कर दिए गए. धनबाद से धनसार जाने वाले रेल रूट पर खेती की जा रही है और धनसार स्टेशन पर लोगों ने दुकानें खोल दी है. यही नहीं, धनसार स्टेशन से होकर गुजरने वाली रेलवे ट्रैक भी चोरी हो गई. कई स्थानों पर तो ट्रैक के किनारे लगे खंभे, फाटक, सिग्नल लाइट्स समेत कई महंगे उपकरण और कीमती पार्ट्स भी लोगों ने बेच दिया. कह सकते हैं कि करोड़ों रुपये की संपत्ति सुनियोजित तरीके से गायब कर दी गई. वहीं एक स्थानीय अशोक कुमार ने बताया कि झरिया स्टेशन तो बंद होने के साथ ही उजड़ गया था. लेकिन स्टेशन पर फुटओवर ब्रिज, यात्री शेड, रेलवे ट्रैक जैसे कई पुराने अवशेष बचे हुए थे, लेकिन कुछ ही दिनों में लोगों ने स्टेशन परिसर में सुरक्षा की कमी का फायदा उठाते हुए वहां मौजूद रेलवे का सारा सामान गायब कर दिया. रेलवे के आॅफिस में मवेशी फाॅर्म खोल लिए गए. लोदना स्टेशन पर भी ऐसी चोरी जारी है. एक अनुमान के मुताबिक स्टेशन पर लोहे के सामान की अनुमानित कीमत 50 करोड़ से अधिक की थी. लेकिन आज वह स्टेशन परिसर खंडहर में तब्दील हो चुका है.

SMILE

इसे भी पढ़ें- यशवंत,शौरी व प्रशांत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा, राफेल डील आजाद भारत का सबसे बड़ा घोटाला

क्या कहना है जन संपर्क पदाधिकारी का

यहीं पास में रहने वाले बिहारी लाल चौहान ने बताया कि ऐसा नहीं है की बंद हो चुके इस झरिया स्टेशन से रेलवे का हर नाता टूट चूका है और वो यहां से अपना मुह मोड़ चुके हैं. झरिया के इसी खंडहर हो चुके रेलवे स्टेशन के दूसरी दिशा में रेलवे का आरक्षण काउंटर चल रहा है. जहां से रोजाना सैकड़ो यात्रियों को आरक्षित रेलवे सीट दी जा रही है. लेकिन चोरों और अतिक्रमणकारियों का कारनामा यहां आने वाले किसी भी रेल अधिकारियों को ना तो दिखलाई देती है और ना ही उनके कारनामों के किस्से सुनाई देती है. वहीं धनबाद रेल मंडल के जन संपर्क पदाधिकारी कि माने तो 2004-2005 में जब इन रेल स्टेशनों को बंद किया गया था, तभी यहां के सभी सामानों की नीलामी कर दी गयी थी, साथ ही उन्होंने कहा कि यदि इसके बावजूद वहां अपराधियों या अतिक्रमणकारियों ने उत्पात मचाया है, तो उनके खिलाफ विधि सम्मत कार्यवाई की जाएगी.

इसे भी पढ़ें- जेडीयू विधायक और बिहार की समाज कल्याण मंत्री ने दिया इस्तीफा

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like
%d bloggers like this: