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दुश्मनों को घर में घुस कर मारेंगे, सर्जिकल स्ट्राइक के लिए स्पेशल यूनिट बनाने की तैयारी

राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद से जुड़े एक सीनियर अधिकारी के अनुसार सर्जिकल स्ट्राइक यूनिट राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल डोभाल का ब्रेन चाइल़्ड है.

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 NewDelhi : दुश्मन देशों में भय पैदा करने व मनोवैज्ञानिक युद्ध रणनीति तैयार करने के संदर्भ में भारत सरकार दुश्मन के क्षेत्र में घुसकर हमला करने के लिए अलग से सर्जिकल स्ट्राइक यूनिट बनाने पर काम कर रही है. एनडीवीटीवी के अनुसार सरकार से जुड़े एक वरिष्ठ सूत्र ने बताया कि सेना के तीनों अंगों के जांबाज जवान इस स्पेशल यूनिट में शामिल होंगे. जानकारी के अनुसार स्पेशल यूनिट दुश्मन के क्षेत्र में घुसकर हमला करने, कम से कम समय में दुश्मन का ज्यादा नुकसान करने में सक्षम होगी. इस क्रम में एक अधिकारी ने बताया कि सरकार को लगता है कि सर्जिकल स्ट्राइक के लिए उन्नत क्षमताओं वाले एक विशेष दल की जरूरत है. बताया कि इसलिए सेना के सभी तीनों अंगों के जवानों से यह सर्वश्रेष्ठ इकाई बन रही है. राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद से जुड़े एक सीनियर अधिकारी के अनुसार सर्जिकल स्ट्राइक यूनिट राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल डोभाल का ब्रेन चाइल़्ड है. इस सर्जिकल स्ट्राइक यूनिट (कमांडो ग्रुप) में वायुसेना, सेना और नेवी की विशेष फोर्स गरुड़, मार्कोस और पैरा के जवान शामिल किये जायेंगे.

युद्ध क्षमताओं में निपुण इन जवानों की स्किल्स यूएस नेवी सील जैसी

युद्ध क्षमताओं में निपुण इन जवानों की स्किल्स यूएस नेवी सील जैसी हैं. ये जवान जंगल और पहाड़ों से लेकर समुद्र में हर जगह काम करने में सक्षम हैं. यह यूनिट सीधे तौर पर सेना प्रमुख को रिपोर्ट करेगी. सूत्रों के अनुसार इस यूनिट की हमलावर और प्लानिंग दो ब्रांच होंगे.  साथ ही हमलावर ग्रुप  दो सब यूनिट में बांटा गया है. खबरों के अनुसार सरकार ने 96 जवानों का चयन प्लानिंग ग्रुप और 124 जवानों का हमलावर ग्रुप के लिए किया है. हमलावर ग्रुप के जवानों में युद्ध की उच्च कौशलता होने के साथ ही उनमें हाईटेक मैप समझने और एयर सपोर्ट के साथ सामंजस्य जैसे स्किल्स होंगे. सपोर्ट ग्रुप में ऐसे जवान भी शामिल होंगे, जिन्हें टारगेट एरिया की स्थानीय जानकारी होगी और वे हमलावर ग्रुप को खुफिया जानकारी मुहैया करा सकेंगे. अभी इस ग्रुप का नाम तय नहीं किया गया है. बता दें कि इस यूनिट का अलग से बजट होगा.  इसे पड़ोसी देशों में भय पैदा करने लिए मनोवैज्ञानिक युद्ध रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है.

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