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भाजपा नेताओं से ही महिलाओं की सुरक्षा पुख्ता कर लें, यही होगी मुख्यमंत्री की उपलब्धि : डॉ अजय

रघुवर दास के चार सालों की उपलब्धि पर कांग्रेस ने भाजपा को घेरा

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सरकारी विज्ञापन का उपयोग कर झूठे आंकड़े पेश करने का लगाया आरोप

Ranchi : राज्य में महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करते हुए झारखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ अजय कुमार ने कहा कि महिला सुरक्षा देने में मुख्यमंत्री रघुवर दास की कोई औकात ही नहीं है. अगर इस क्षेत्र में कुछ करना है तो पहले मुख्यमंत्री अपने भाजपा नेताओं से ही महिलाओं की सुरक्षा कर लें. अगर ऐसा वे कर पाते है कि उनकी यह चार साल की एक बड़ी उपलब्धि होगी. प्रदेश अध्यक्ष ने उक्त बातें रघुवर दास सरकार के चार सालों की उपलब्धियों को लेकर पार्टी मुख्यालय में शुक्रवार को आयोजित एक प्रेस वार्ता को दौरान कहीं. उन्होंने कहा कि उनकी पूरी उपलब्धियां जुमलेबाजी पर आधरित है.

देश में पहली बार हुआ है कि झूठ के नींव पर बैठी कोई सरकार बिना किसी बेशर्मी के सरकारी विज्ञापन का उपयोग कर झूठे आंकड़े पेश किया है. डॉ अजय ने कहा कि बात चाहे रोजगार की हो या बिजली, ओडीएफ, मॉब लिंचिग, कृषि, आयुष्मान भारत योजना की, सभी की सभी जुमलेबाजी से ज्यादा कुछ नहीं है. विज्ञापन में दिये झूठ को आधार बनाते हुए डॉ अजय ने साफ किया कि साबित होता है कि मुख्यमंत्री के सचिव कितने अनपढ़ है. ऐसे अनपढ़ अधिकारियों को उन्होंने तत्काल ट्रांसर्फर करने की मांग की.

रघुवर सरकार के दौरान बेरोजगारी है अपने चरम पर

उन्होंने कहा कि सरकार यह दावा करती है कि चार सालों में उन्होंने 35 लाख युवाओं को रोजगार दिया है. इस हिसाब से राज्य की 10 प्रतिशत आबादी आज रोजगार कर रही है. जबकि हकीकत यह है कि रघुवर सरकार के दौरान बेरोजगारी अपने चरम पर है. नोटबंदी के बाद तो कई नौकरियां खत्म हो चूकी हैं.

कृषि विकास दर की बात केवल एक सफेद झूठ

उन्होंने कहा कि सरकार कृषि विकास दर की बढ़ोतरी (14 प्रतिशत) की बात करती है. जबकि इस साल का ऑकड़ा तक सरकार के पास नहीं है. ऐसे में यह साफ पता चलता है कि विकास दर की बात करना केवल एक सफेद झूठ है. अगर कृषि में विकास हो भी रहा है तो यह उपलब्धि केवल किसानों की है. जबकि इसी सरकार में कई किसानों की भूख से मौत हो चूकी है. सरकार प्रति एकड़ पांच हजार रुपये देने की बात करती है, जबकि राज्य के अधिकांश जिलों में पांच प्रतिशत से कम डिजीटाइल खतियान हैं. जब सरकार की रिकॉर्ड ही डिजिटाइल नहीं है, तो उक्त राशि देने की बात ही गलत है.

बिजली, आयुष्मान भारत योजना सभी में है सरकार फेल

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना को लेकर सरकार दावा करती है कि पूरे प्रदेश में करीब 18,000 लोगों को फायदा पहुंचा है. जबकि हकीकत यह कि रिम्‍स, एमजीएम जैसे हॉस्पिटल में तो हर महीने 18,000 लोगों का सरकारी खर्च पर इलाज होता है. बिजली की उपलब्धियों पर तो डॉ अजय कुमार ने कहा कि सरकार कहती है कि 68 लाख घरों तक सरकार ने बिजली पहुंचाई. जबकि हकीकत 2014 तक राज्य के केवल 2000 घरों तक ही बिजली नहीं थी. मुख्यमंत्री ने दावा किया था कि 2018 के अंत पूरे प्रदेश के लोगों को बिजली नहीं मिले, तो वह इस्तीफा दे देंगे. राज्य में बिजली की स्थिति किसी से छिपी नहीं है. पार्टी मांग करती है कि ऐसे झूठ के सहारे सत्ता चला रहे मुख्यमंत्री को तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए.

पोस्टर और होर्डिंग की सरकार है रघुवर सरकार : सुबोधकांत सहाय

पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने कहा कि चार साल के दौरान रघुवर सरकार केवल पोस्टर और होर्डिंग की सरकार के अलावा कुछ नहीं है. सरकार ने विज्ञापन पर अरबों रुपये तक खर्च कर दिया, जिसमें सरकार ने केवल झूठ ही बोला है. सुशासन की बात सरकार करती है, जबकि होमगार्ड, पुलिस के लोग सरकार के खिलाफ लड़ रहे है. पारा शिक्षक जिस तरह आंदोलनरत है, उससे शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गयी है. जेपीएससी की परीक्षा अभी तक पूरा नहीं किया गया है. भूख से अबतक 19 लोग मारे जा चूके है. लेकिन अभी तक सरकार ने पूरे राज्य को सूखा ग्रस्त नहीं घोषित किया है. अभी भी सरकारी टीम दिल्ली का ही दौरा कर रही है. उपरोक्त पूरी घटना प्रशासनिक असफलता का परिचायक है.

13 महीने के वेतन देने का वादा भूली सरकार : चंद्रशेखर दुबे

तीन साल पहले रघुवर दास के उस ऐलान पर बात करते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता चंद्रशेखर दूबे ने कहा कि 24 घंटे ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मियों को उन्होंने 13 महीने का वेतन की बात ने की थी. लेकिन आज तक मुख्यमंत्री ने कोई कदम नहीं उठाया. जबकि पड़ोसी राज्यों ने ऐसा कर दिया है. वहीं पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी ने कहा कि राज्य की रघुवर सरकार केवल अनिर्णयवाली और बिचौलियों के सहारे चलने वाली सरकार है. आज भी गांव के किसान सरकारी योजनाओं से वंचित है. मनरेगा योजना के तहत 2500 करोड़ की राशि स्वीकृति की गयी थी. लेकिन सरकार ने केवल योजना बनाओ अभियान नाम ही कई करोड़ रुपये खर्च कर दिये. गांवों में आज भी शौचालय निर्माण नहीं हो सका है. जबकि सरकार पूरे प्रदेश को ओडीएफ करने का दावा करती है.

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