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जेल से रिहा हुए पूर्व मंत्री एनोस एक्का, पारा शिक्षक हत्या मामले में HC से मिली राहत

Ranchi: पारा शिक्षक हत्या मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे एनोस एक्का मंगलवार को बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार से रिहा हुए.

गौरतलब है कि पूर्व मंत्री एनोस एक्का को झारखंड हाइकोर्ट से 26 सितंबर को बड़ी राहत मिली थी. हाइकोर्ट ने उन्हें पारा शिक्षक हत्या मामले में जमानत दी और साथ ही पासपोर्ट जमा कराने और राज्य से बाहर नहीं जाने का आदेश भी दिया था.

जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता और जस्टिस राजेश कुमार की अदालत से पूर्व मंत्री को राहत मिली थी.  3 जुलाई 2018 को पारा शिक्षक मनोज कुमार हत्याकांड में पूर्व मंत्री एनोस एक्का को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गयी थी.

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अदालत ने मांगी थी फॉरेंसिक रिपोर्ट 

झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस एके गुप्ता और जस्टिस राजेश कुमार की खंडपीठ में पिछले सप्ताह 19 सितंबर को राज्य के पूर्व मंत्री एनोस एक्का की जमानत पर सुनवाई हुई थी.

अदालत ने इस मामले में फॉरेंसिक रिपोर्ट मांगी थी. जिसके बाद मामले में अगली सुनवाई 26 सितंबर को निर्धारित की गयी थी. सुनवाई के दौरान एनोस की ओर से कहा गया कि इस मामले में सीडी (कॉम्पैक्ट डिस्क) की फॉरेंसिक रिपोर्ट नहीं मिली है, इसलिए उस रिपोर्ट को मंगाया जाए. इस पर अदालत ने फॉरेंसिक रिपोर्ट मांगी थी.

दरअसल, एनोस एक्का को सिमडेगा के एक पारा शिक्षक की हत्या का आरोपित बनाया गया था. इस पर सुनवाई पूरी होने के बाद निचली अदालत ने एनोस एक्का को इस मामले में दोषी पाते हुए उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी.

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एनोस की ओर से निचली अदालत के आदेश के खिलाफ हाइकोर्ट में अपील दाखिल करते हुए जमानत देने का आग्रह किया गया था. एनोस की ओर से याचिका में कहा गया है कि निचली अदालत का आदेश सही नहीं है. उनके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं मिला है. बिना ठोस साक्ष्य के ही उन्हें सजा सुनाई गयी है.

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निचली अदालत ने सुनाई थी आजीवन कारावास की सजा

पारा टीचर हत्याकांड में पूर्व मंत्री एनोस एक्का को 3 जुलाई 2018 को आजीवन कारावास की सजा सुनायी गयी थी. कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए उनपर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था.

एनोस एक्का सहित तीन को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नीरज कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने दोषी करार दिया था. अदालत ने सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए तीन जुलाई 2018 की तिथि निर्धारित की थी.

कोर्ट ने कोलेबिरा विधायक एनोस एक्का को धारा 302, 120 बी, 201 और 171 एफ के तहत दोषी माना था. इस सजा के साथ ही उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो चुकी थी.

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क्या है मामला

26 नवंबर 2014 को सिमडेगा जिले के जताडांड़ प्राथमिक विद्यालय से पारा टीचर मनोज कुमार का अपहरण कर लिया गया था. इस मामले में विधायक एनोस एक्का के खिलाफ प्राथमिकी ( 58/2014) दर्ज करायी गयी थी.

दूसरे दिन सुबह मनोज कुमार की लाश मिलने के बाद मामला हत्याकांड में बदल गया. पुलिस ने पहले से पीएलएफआइ उग्रवादी बारूद गोप का मोबाइल फोन सर्विलांस पर रखा था. इस फोन पर हुई बातचीत के आधार पर पुलिस ने जांच के बाद विधायक एनोस एक्का और बारूद गोप के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया.

इसमें यह आरोप लगाया गया था कि विधायक के कहने पर बारूद गोप ने मनोज कुमार की हत्या की. घटना को अंजाम देने से पहले उग्रवादी धनेश्वर बड़ाइक ने रेकी की थी.

शिक्षक की हत्या के आरोप में तत्कालीन एसपी राजीव रंजन सिंह ने रात दो बजे एनोस एक्का को ठाकुरटोली स्थित घर से गिरफ्तार किया था. 27 नवंबर 2014 की शाम को एक्का को जेल भेज दिया था.

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