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3.5 करोड़ रूपये की फर्जी निकासी करने वाले इंजीनियर JBVNL में स्वतंत्र, कुछ तो प्रमोशन से बने अधिकारी

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  • फरवरी 2019 में निदेशक मंडली ने मुकदमा चलाने की स्वीकृति दी.
  • इसके बाद भी प्रमोशन से बड़े पद पर बन गये अधिकारी
  • 11 साल पुराने मामले में विभागी जांच कमेटी से लेकर हाईकोर्ट ने एसआईटी तक की थी गठित

Ranchi: राज्य बिजली वितरण निगम लिमिटेड में वित्तिय अनियमितताएं अब आम बात हो गयी हैं. वरीय अधिकारी ऐसी अनियमितताएं करके भी कार्यरत हैं. साल 2008-09 में कुछ निजी एजेंसी को फर्जी बिलिंग के जरिये लाभ पहुंचाने का मामला साल 2010 में तत्कालीन राज्य बिजली बोर्ड के सामने आया.

इस मामले में बोर्ड की ओर से पांच सदस्यीय कमेटी का गठन भी किया गया. मामला जमशेदपुर, चाईबासा और घाटशिला का है. जिसके लिए साल 2011 में बिष्टुपुर थाना में प्राथमिकी भी दर्ज की गयी. विभागीय जांच कमेटी ने पाया कि साल 2008 से 09 तक लगभग 3.5 करोड़ रूपये की राशि फर्जी बिलिंग के जरिये निजी कंपनियों को दी गयी.

Mayfair 2-1-2020

साथ ही रकम कई किस्तों में दी गयी. भले ही कमेटी ने 11 साल पहले नौ अभियंताओं पर दोष सिद्ध कर दिया हो, लेकिन इस साल फरवरी में उर्जा निगम के निदेशक मंडली ने उक्त नौ अभियंताओं पर मुकदमा चलाने की स्वीकृति दी. इसके बाद भी ये जेबीवीएनएल की अलग-अलग शाखाओं में कार्यरत हैं.

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विभागीय कमेटी के साथ हाईकोर्ट गठित एसआईटी ने पायी थी संलिप्तता

सिर्फ विभागीय कमेटी ही नहीं इस मामले में बिष्टुपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद हाईकोर्ट में मामला पहुंचा और तब कोर्ट के आदेश पर एसआइटी गठित कर मामले की जांच की गयी. जिसमें नौ अभियंताओं की ओर से 3.5 करोड़ रूपये की फर्जी निकासी का मामला सामने आया.

Vision House 17/01/2020
3.5 करोड़ रूपये की फर्जी निकासी करने वाले इंजीनियर JBVNL में स्वतंत्र, कुछ तो प्रमोशन से बने अधिकारी
फर्जी निकासी से संबंधित PMO को लिखा गया लेटर

इन नौ अभियंताओं में विभागीय और हाईकोर्ट की ओर से जांच में आरोपी पाये गये तत्कालीन जमशेदपुर एग्जीक्यूटिव इंजीनियर एचके सिंह ने मेसर्स क्रिस्टल और मेसर्स प्रकृति इंटरप्राइजेज को कुल 15,50800 रूपये का अधिक भुगतान किया.

जबकि उन्होंने आदित्यपुर के ईइ ने इंफो सॉफ्ट डाटा को 49,28319 रूपये का अधिक भुगतान, आदित्यपुर ईइ प्रतोष कुमार ने इंफोसॉफ्ट डाटा को 19,62863 का, घाटशिला ईइ सुकरू खड़िया ने 73,79360, गोपाल मांझी ने 48,0252, मुकुल गरवारे ने 13,4252 रुपये, चाईबासा ईइ ने 58,7052  रूपये, चक्रधरपुर ईइ अजीत कुमार ने 49,19567 रूपये और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ओपी अंबष्ट पर आरोप सिद्ध हुआ कि इन्होंने सभी बिलों पर हस्ताक्षर किया. हालांकि अभी कुछ अभिंयता रिटायर हैं और कुछ का प्रमोशन हो गया है.

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समिति के सदस्य अमित बनर्जी की कार्रवाई भी संदिग्ध पायी गयी

विभागीय जांच में शामिल वित्त नियंत्रण अमित बनर्जी, सीएम शर्मा संयुक्त सचिव, आरके अग्रवाल उप लेखा निदेशक और तत्कालीन लेखा पदाधिकारी जमशेदपुर और अन्य लेखा पदाधिकारी थे. इसी दौरान सीएम शर्मा का स्थानंतरण किया गया. जिसके स्थान पर कमेटी में अशेाक कुमार विद्युत अधीक्षण अभियंता जेएसईबी को शामिल किया गया.

3.5 करोड़ रूपये की फर्जी निकासी करने वाले इंजीनियर JBVNL में स्वतंत्र, कुछ तो प्रमोशन से बने अधिकारी
JBVNL का विभागीय पत्र

अशोक कुमार की ओर से जांच रिपोर्ट अमित बनर्जी को सौंपी गयी. जिसे अमित बनर्जी ने यह कहते हुए नकार दिया कि बिना विचार विमर्श के इस तरह के रिपोर्ट देना गलत है. इसके बाद तत्कालीन मानव संसाधान के सलाहकार शिवेंद्र सिंह को पूरे मामले का जांच अधिकारी बनाया गया. जिन्होंने अमित बनर्जी के जांच रिपोर्ट से असहमत होने को अप्रासंगिक बताया.

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फर्जी निकासी में आरोपों के बाद भी मिली अच्छी खासी प्रमोशन

11 साल पहले विभागीय कमेटी ने इन अभियंताओं पर आरोप सिद्ध किया. हाईकोर्ट गठित एसआईटी ने भी आरोप सिद्ध किया. फरवरी 2019 में निदेशक मंडली ने मुकदमा चलाने की स्वीकृति दी. इसके बाद भी जेबीवीएनएल की ओर से इन अभियंताओं को प्रमोशन दिया गया.

3.5 करोड़ रूपये की फर्जी निकासी करने वाले इंजीनियर JBVNL में स्वतंत्र, कुछ तो प्रमोशन से बने अधिकारी
फर्जी निकासी को लेकर लिखा गया आवेदन

इसमें प्रतोष कुमार वर्तमान में धनबाद में, संजय कुमार को मुख्यालय में ही डीजीएम, मुकुल गरवारे को चास में सुपरिडेंटेड इंजीनियर, गोपाल मांझी मुख्यालय धुर्वा में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, अजीत कुमार धनबाद में कार्यरत हैं. वहीं एचके सिंह, ओपी अंबष्ट, घनेश झा और सुकरू घड़िया रिटायर हैं.

इस मामले में जनसंवाद से लेकर पीएमओ तक की गयी शिकायत

जेबीवीएनएल में निमयों को ताक पर रखकर प्रमोशन और वित्त अनियमितता के मामले सिद्ध होने पर कई बार शिकायत की गयी.

3.5 करोड़ रूपये की फर्जी निकासी करने वाले इंजीनियर JBVNL में स्वतंत्र, कुछ तो प्रमोशन से बने अधिकारी
मुख्यमंत्री जन संवाद को लिया गया आवेदन

इतना ही नहीं सीएम जनंसवाद और पीएमओ में भी शिकायत की गयी. लेकिन फिर भी इसपर कोई कार्रवाई नहीं की गयी.

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Ranchi Police 11/1/2020

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