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Book Review: यौन शोषण की अंतहीन दास्तान मोंय सुशीला

Naveen Sharma

Ranchi : मोंय सुशीला पढ़ते हुए कई बार आपको यकीन करना मुश्किल होगा कि किसी का इतना अधिक शोषण भी हो सकता है. एक के बाद एक बड़े पदों पर बैठे सफेदपोश लोग कैसे एक महिला का बेशर्मी से यौन शोषण करते हैं, लेकिन यही कड़वा सच है.

सत्य घटना से प्रेरित मोंय सुशीला गहराई तक झकझोर देती है. इस उपन्यासिका की सबसे बड़ी विशेषता इसका अपनी जमीन से गहरे जुड़ा होना है. नायिका सुशीला सहित अन्य कई पात्र जो झारखंड की ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते हैं वो यहां की संपर्क भाषा नागपुरी ही बोलते हैं.

इस लिहाज से मोंय सुशीला हिंदी- नागपुरी उपन्यासिका है. नागपुरी में बोलते पात्र सहज और स्वभाविक लगते हैं इसलिए वो आकर्षित करते हैं.

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रोचक इतनी कि एक बैठक में पढ़ जायेंगे

111 पन्नों की ये कथा इतने रोचक अंदाज में कही गई है कि आप एक बैठक में इसे पढ़ कर खत्म कर सकते हैं. समाज के रक्षक होने की जिम्मेदारी जिन पुलिस अफसरों पर होती है वो कैसे भक्षक बन जाते हैं उसका दिल दहला देनेवाला वर्णन है. सुशीला गुमला की रहनेवाली है. उसके शोषण की दास्तान रांची और पलामू में पदस्थापित पुलिस अफसर करते हैं.

पत्रकारिता और आकाशवाणी से जुड़े रहे लेखक ये लेखकीय तटस्थता बरतते हैं कि वो अपनी नायिका के अंतहीन यौन शोषण की दास्तान बताते हुए भी भावनाओं में बहकर उसके साथ अतिरिक्त सहानुभूति नहीं दिखाते.

वे सुशीला की चारित्रिक कमजोरियों और जीवन में शार्टकट अपना कर ऐश की जिंदगी जीने के उसके फैसले को डिफेंड नहीं करते बल्कि अन्य लड़कियों को एक तरह से चेतावनी देते हैं कि वे सुशीला के अंजाम से सबक लेकर वैसी गलती ना करें. अंत में एक बात ये उपन्यासिका देर से आयी इसे और पहले आना चाहिए था.

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